झारखंड में छह साल में 34 फीसदी बढ़ी ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या, 2013 में सिर्फ 9 थे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झारखंड में पिछले छह सालों में ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या में 34 फीसदी इजाफा आया है। सूबे के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनय कुमार चौबे ने यह जानकारी दी है। उनका कहना है कि साल 2013 के बाद से प्रदेश में ट्रांसजेंडर मतदाता बढ़े हैं। सूबे में 30 जनवरी 2019 तक कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2.19 करोड़ है। इनमें से ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या 307 है, जबकि छह साल पहले ट्रांसजेंडर मतदाताओं की कुल संख्या नौ थी।
पिछले दो सालों में ज्यादा बढ़े ट्रांसजेंडर वोटर्स
विनय कुमार चौबे का कहना है कि सूबे में ट्रांसजेंडर वोटर्स की संख्या में सबसे ज्यादा इजाफा साल 2017 और 2018 के दौरान हुआ है। इस दौरान प्रदेश में मतदान जागरुकता को लेकर कार्यक्रम हुए, जिसकी वजह से ट्रांसजेंडर्स वोटर्स की संख्या भी बढ़ी। उनका कहना है कि साल 2016 में प्रदेश में 29 थर्ड जेंडर मतदाता पंजीकृत थे। 2017 में ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या बढ़कर 133 हुई और इसके एक साल बाद ही यह संख्या बढ़कर 290 पहुंच गई। 2019 में ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या 307 पहुंच गई।
जमशेदपुर और रांची में सबसे ज्यादा वृद्धि
विनय कुमार चौबे का कहना है कि झारखंड के दो जिलों जमशेदपुर और रांची में सबसे ज्यादा ट्रांसजेंडर मतदाताओं का पंजीकरण हुआ है। इन जिलों में ट्रांसजेंडर वोटर्स के लिए विशेष अभियान भी चलाया गया है ताकि उनका नाम निर्वाचन नामावली में शामिल किया जा सके। उनका कहना है कि आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 281 ट्रांसजेंडर मतदाताओं को पहली बार मतदान का अभ्यास भी कराया गया है। विनय का कहना है कि ट्रांसजेंडर समुदाय ने इस पहल का स्वागत किया है।
'चुनाव आयोग करे ऐसा प्रावधान ताकि आसानी से लड़ सकें चुनाव'
झारखंड में लोकसभा की 14 सीटें हैं। सूबे के ट्रांसजेंडर समुदाय से आने वाली नरगिस का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को पहले ही थर्ड जेंडर को मतदान का अधिकार दे देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वह ट्रांसजेंडर्स समुदाय के मतदान के अधिकार के लिए चुनाव आयोग और सरकार को धन्यवाद करना चाहती हैं, जिनकी वजह से हमारे समुदाय को मत का अधिकार मिल सका।नरगिस का कहना है कि ट्रांसजेंडर्स को चुनाव लड़ने का मौका भी मिलना चाहिए ताकि वो समाज के विकास में अपनी भूमिका निभा सके। उनका कहना है कि वह चुनाव लड़ना चाहती हैं, लेकिन यह उनके लिए संभव नहीं है क्योंकि उनके पास इतना पैसा नहीं है। नरगिस का कहना है कि चुनाव आयोग को ऐसे विशेष प्रावधान करने चाहिए ताकि ट्रांसजेंडर समुदाय आसानी से चुनाव भी लड़ सके।