फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha election 2019: everythings you need to know about 1962 lok sabha election

नेहरू-शास्त्री के देहांत से लेकर इंदिरा के पीएम बनने सहित कई वाकयों का गवाह रहा 1962 लोकसभा चुनाव

Tue, 12 Mar 2019 02:07 PM IST
ललित फुलारा ललित फुलारा, चुनाव डेस्क, अमर उजाला
ललित फुलारा, चुनाव डेस्क, अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Tue, 12 Mar 2019 02:07 PM IST
विज्ञापन
Lok Sabha election 2019: everythings you need to know about 1962 lok sabha election
1962 में भारत में तीसरा लोकसभा चुनाव हुआ। कांग्रेस फिर सत्ता में आई। - फोटो : रोहित

1962 में भारत में तीसरा लोकसभा चुनाव हुआ। कांग्रेस फिर सत्ता में आई। यह लगातार तीसरी बार था जब आम चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला था। जवाहरलाल नेहरू एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री बने। चुनाव में कांग्रेस ने 494 सीटों में से 361 सीटें जीतीं जो  पहले और दूसरे आम चुनाव के मुकाबले कम थीं। पहले आम चुनाव में कांग्रेस के खाते में 364 सीटें आई थींं जबकि दूसरे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 371 सीटें जीती थीं।

विज्ञापन


तीसरे आम चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के खाते में 29 सीटें आई थीं। इस बार पार्टी ने पहले और दूसरे आम चुनाव के मुकाबले ज्यादा सीटें जीती थीं। 1952 के पहले लोकसभा चुनाव में सीपीआई ने 16 सीटें और 1957 के दूसरे लोकसभा चुनाव में 27 सीटें जीती थीं।

विज्ञापन

28 पार्टियां थी मैदान में, जनसंघ के खाते में आईं थीं 14 सीटें

भारत के तीसरे आम चुनाव में 28 पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। चुनाव में भारतीय जनसंघ ने 14 सीटें जीती थीं। कुल सीटों की 60 फीसदी से ज्यादा सीटें कांग्रेस के खाते में गईं थी। स्वतंत्र पार्टी ने चुनाव में 18 सीटें जीती। वहीं, हिंदुत्व के विरोध में दक्षिण में उभरी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) इस चुनाव में सात सीटें जीतने में कामयाब रही। निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव में 20 सीटें जीती थीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

इसे भी पढ़ें-1957 लोकसभा चुनाव: कांग्रेस को मिला था प्रचंड बहुमत, वाजपेयी पहली बार पहुंचे थे संसद
 

कांग्रेस का वोट शेयर घटा, उभरकर नहीं आया था मजबूत विपक्ष 

तीसरे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर घटा था। पार्टी ने दूसरे लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस चुनाव में 10 सीटें कम जीती थीं। मुस्लिम लीग, अकाली दल, अखिल भारतीय हिंदू महासभा  और राम राज्य परिषद बुरी तरह से चुनाव हार गए। 1957 की ही तरह इस चुनाव में भी मजबूत विपक्ष उभरकर सामने नहीं आया। चुनाव में भारतीय जनसंघ का प्रदर्शन जरूर ठीक रहा। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने इस चुनाव में 12 सीटें जीतीं। कांग्रेस का वोट शेयर जहां पहले आम चुनाव में 45 फीसदी और दूसरे आम चुनाव में 48 फीसदी से ज्यादा था, वहीं तीसरे आम चुनाव में यह घटकर 44.72 फीसदी हो गया। इस चुनाव में मतदाताओं की कुल हिस्सेदारी  55.42 फीसदी रही।

इसे भी पढ़ें- 67 साल पहले हुआ था आजाद भारत का पहला लोकसभा चुनाव, 53 पार्टियां उतरी थीं मैदान में

दिल्ली के दिल कनाट प्लेस में बोर्ड पर दिखाए गए थे चुनाव नतीजे

पहला और दूसरा आम चुनाव जहां कई महीने चला वहीं, तीसरा लोकसभा चुनाव एक ही हफ्ते में संपन्न हो गया था। यह चुनाव 19 फरवरी से 25 फरवरी के बीच हुआ था। चुनाव परिणामों को दिल्ली के दिल कनाट प्लेस में काले रंग के बोर्ड पर दिखाया गया था। यह चुनाव 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुआ था। 


4 पार्टियों ने ही छुआ दहाई का आंकड़ा

1962 के लोकसभा चुनाव परिणामों में कांग्रेस के अलावा सिर्फ चार पार्टियां ही दहाई का आंकड़ा छू पाई थीं। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने 29 सीटें जीती थीं। स्वतंत्र पार्टी के खाते में 18 सीटें और भारतीय जनसंघ ने 14 सीटें जीती थीं। वहीं, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने चुनाव में 12 सीटें और सोशलिस्ट पार्टी ने 6 सीटें जीती थीं। अकाली दल के खाते में 3 सीटें और अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने चुनाव में एक सीट जीती थी।

 

Lok Sabha election 2019: everythings you need to know about 1962 lok sabha election
जिस सीट से पहली बार संसद पहुंचे थे, तीसरे लोकसभा चुनाव में वहीं से हार गए थे वाजपेयी 

इंदिरा का आधिकारिक तौर पर राजनीति में प्रवेश और 'स्वतंत्र' पार्टी का अस्तित्व

तीसरे लोकसभा चुनाव में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र से एक ही सदस्य चुना गया। इंदिरा गांधी का तब तक आधिकारिक तौर पर भारतीय राजनीति में प्रवेश हो चुका था। 1959 में इंदिरा को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था। यह ऐसा वक्त था जब जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस के विरोध में सी राजगोपालाचारी ने 'स्वतंत्र पार्टी' की स्थापना की थी। पार्टी 1959 में बनी। 'स्वतंत्र पार्टी' एक उदारवादी-रुढ़िवादी राजनीतिक पार्टी थी जिसका मकसद सीधे जवाहरलाल नेहरू को चुनौती देना था। राजगोपालाचारी ने नेहरू की समाजवादी नीतियों के विरोध में स्वतंत्र पार्टी बनाई थी। पार्टी ने 1962 का लोकसभा चुनाव लड़ा और 18 सीटें जीती।


जिस सीट से पहली बार संसद पहुंचे थे, तीसरे लोकसभा चुनाव में वहीं से हार गए थे वाजपेयी 

अटल बिहारी वाजपेयी दूसरे लोकसभा चुनाव में जिस सीट से चुनकर संसद पहुंचे थे, तीसरे लोकसभा चुनाव में उसी सीट से हार गए। उन्हें यूपी के बलरामपुर सीट से कांग्रेस की सुभद्रा जोशी ने हराया था। 1957 में जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले वाजपेयी को इस सीट ने उभरता हुआ राजनेता बनाया था। संसद में उनके भाषणों से नेहरू इतने प्रभावित हुए कि कह डाला यह लड़का एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा। 

दरअसल,  अटल 1953 में लखनऊ से उप-चुनाव हार गए थे। 1957 में उन्होंने मथुरा, बलरामपुर और लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ा था। मथुरा से वाजपेयी की करारी हार हुई लेकिन वह बलरामपुर में कांग्रेस के हैदर हुसैन से 10 हजार वोटों से जीत गए। इसके बाद तीसरे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बलरामपुर सीट से गांधीवादी सुभद्रा जोशी को मैदान में उतारा। जोशी और वाजपेयी एक साथ 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से देश सेवा में आए थे, लेकिन दोनों की विचारधाराएं अलग-अलग थीं। वाजपेयी उस वक्त संसद में धीरे-धीरे विपक्ष का प्रमुख चेहरा बन रहे थे लेकिन 1962 में बलरामपुर सीट ने उनकी इस लोकप्रियता पर थोड़ी रोक लगा दी। लोकसभा चुनाव हारने के बाद वाजपेयी इसी साल जनसंघ की तरफ से राज्यसभा सांसद नियुक्त हुए।  

 

Lok Sabha election 2019: everythings you need to know about 1962 lok sabha election
चुनाव जीतने के दो साल बाद हो गया था नेहरू का देहांत, 1966 में इंदिरा बनी थी पीएम

चुनाव जीतने के दो साल बाद हो गया था नेहरू का देहांत, 1966 में इंदिरा बनी थी पीएम

तीसरे लोकसभा चुनाव की जीत के दो साल बाद 27 मई 1964 को पंडित जवाहरलाल नेहरू का देहांत हो गया था। उनकी जगह लाल बहादुर शास्त्री भारत के प्रधानमंत्री बने। 19 महीने के कार्यकाल के बाद 1966 में लाल बहादुर शास्त्री का देहांत हो गया। इसके बाद गुलजारी लाल नंदा को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया। 1966 में आखिर में इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।

तीसरा लोकसभा चुनाव कई मायनों में अहम रहा था। इस चुनाव में सिर्फ  485 सीटों के परिणाम घोषित हुए थे। नौ सीटों में से यूपी की दो सीटों पर फिर से काउंटिंग हुई और मणिपुर की दो सीटों पर हाल ही में चुनाव हुए थे।  बर्फ पड़ने की वजह से हिमाचल की चार और पंजाब की एक सीट के लिए अप्रैल में चुनाव हुए। इन पांचों सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। चुनाव के बाद ही अक्टूबर 1962 से लेकर नवंबर 1962 के बीच भारत और चीन का युद्ध हुआ था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed