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राष्ट्रवाद की आंधी में उखड़ गये गठबंधन के खंभे, यूपी सहित देशभर में भाजपा की सुनामी

Thu, 23 May 2019 01:02 PM IST
रत्नेश मिश्र अमर उजाला, चुनाव डेस्क, नई दिल्ली
अमर उजाला, चुनाव डेस्क, नई दिल्ली Published by: रत्नेश मिश्र Updated Thu, 23 May 2019 01:02 PM IST
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Lok Sabha Chunav Result 2019: sapa baspa gathbandhan vs vjp
यूपी में महागठबंधन बनाम बीजेपी, किसकी चित किसकी पट? - फोटो : Amar Ujala
लोकसभा चुनाव 2019 मतगणना से पहले अटकलबाजियों में फंसा हुआ लग रहा था। 10 मई के बाद जब एक्जिट पोल्स आए और सभी ने भाजपा और सहयोगी दलों को बहुमत के पार पहुंचा दिया, तो बहस शुरू हुई कि यह आंकलन सही नहीं है, कयासों का दौर चलता रहा। क्योंकि कुछ ही दिन पहले पहले ऑस्ट्रेलिया में 'प्री पोल' की धज्जियां उड़ गईं थीं। बहरहाल मतगणना चालू है और बीजेपी  2014 से भी बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है। एक्जिट पोल्स में भी ऐसा ही हुआ अधिकतम संस्थानों ने भाजपा गठबंधन को 300 पार कर दिया लेकिन साथ ही कांग्रेस और महागठबंधन की भी सीटें भी बढ़ा दीं। अब जब रुझान आने लगे हैं तब बीजेपी ही बीजेपी दिख रही है। सपा-बसपा गठबंधन की, जिस तरह से उम्मीद की जा रहा थी वैसी तस्वीर बनती नहीं दिख रही है। 
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- 2 दिन पहले तक चुनाव परिणामों को लेकर जो असमंजस की स्थिति थी वह अब तक लगभग साफ होती नज़र आ रही है और सपा-बसपा गठबंधन को अपने इरादों में कामयाबी मिलती नहीं दिख रही। कुछ सीटों पर बसपा के कैंडिडेट तो आगे दिख रहे हैं लेकिन सपा की जो स्थिति बन रही है उसे  बेहतर तो नहीं कहा जा सकता। 
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- अभी तक यह माना जाता रहा है कि बसपा प्रमुख मायावती को अपना जनाधार शिफ्ट करने में महारत हासिल है लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा होतो दिख नही रहा है। इस गठबंधन में बसपा को तो फायदा हो रहा है लेकिन सपा नुकसान में है, इसका मतलब यह हुआ कि बसपा का परंपरागत वोट सपा को ट्रांसफर नहीं हो पाया।  
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- यूपी में 2014 की मोदी की लहर थी वो लहर इस बार और तीब्र है।  केंद्र और राज्य में सत्ता होने से प्रशासनिक और संसाधनों से बीजेपी मजबूत है और गठबंधन अपने जनाधार को एक-दूसरे को या तो ट्रांसफर नहीं कर पाया या किया भी तो उससे बीजेपी को फर्क नहीं पड़ा।  

- ओबीसी का एक बड़ा वर्ग नरेन्द्र मोदी से प्रभावित रहा है, जबकि नॉन जाटव दलित बीजेपी और गठबंधन के बीच बंटे होने के बावजूद यादव, दलित और मुस्लिम के साथ मिल जाने से भी गठबंधन, मोदी की लोकप्रियता का सामने टिक नहीं पाया। 

बीजेपी राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों के साथ चुनाव में उतरी थी और रुझान बता रहे हैं कि देश राष्ट्रवाद के साथ है। 
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