महाराष्ट्र में फिर चली मोदी लहर कांग्रेस के आए सबसे बुरे दिन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा सीटों के लिहाज से यूपी के बाद सबसे अधिक सीटों वाले महाराष्ट्र में एक बार फिर मोदी लहर चली है। अकेले भाजपा को 23 और सहयोगी शिवसेना को 18 सीटें मिली हैं। कांग्रेस के खाते में 01 और एनसीपी को 4 सीटों पर सिमटना पड़ा।
लोगों ने राष्ट्रवाद और विकास के मुद्दे पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन को समर्थन दिया। कांग्रेस को सूबे में सबसे बुरा दिन देखना पड़ा है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना के साथ गठबंधन कर पहले ही चुनाव का रूख अपनी ओर मोड़ दिया था। ग्रामीण इलाको में सूखे की मार पर राष्ट्रवाद भारी पड़ गया। किसान हो या नौजवान उन्हें राष्ट्रवाद और विकास का मुद्दा ज्यादा पसंद आया। मराठा आरक्षण मुद्दा भी भाजपा महाराष्ट्र में बारिश के बाद विधानसभा का चुनाव होना है। नतीजे फिर दोहराए जा सकते हैं।
महाराष्ट्र में बारिश के बाद विधानसभा का चुनाव होना है। समझा जा रहा है कि यही नतीजे फिर दोहराए जा सकते हैं।
वहीं, दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस के दिग्गज राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे सुजय पाटिल को पार्टी में शामिल कर कांग्रेस का मनोबल तोड़ दिया था। वहीं, एनसीपी सुप्रीमों शरद पवार के पश्चिम महाराष्ट्र में माढ़ा से एनसीपी सांसद विजय सिंह मोहिते पाटिल को पार्टी में शामिल कर एनसीपी की रणनीति को तार-तार कर दिया था। इसका असर चुनाव नतीजों पर साफ दिखाई पड़ा है। महाराष्ट्र में जीत की दूसरी, सबसे बड़ी उपलब्धि मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की मानी जाएगी। उन्होंने शिवसेना से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं को न सिर्फ जोश भार बल्कि विधायकों और जनप्रतिनिधियों को भी सक्रिय किया। इसका फायदा दोनो दल के प्रत्याशियों को मिला।
सूखे पर भारी पड़ा राष्ट्रवाद
चुनाव के दौरान महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाको में लोग सूखे की मार से जूझ रहे थे। पानी की किल्लत से परेशान थे। लेकिन, सूखे पर राष्ट्रवाद भारी पड़ गया। किसान हो या नौजवान (नए वोटर) उन्हें राष्ट्रवाद और विकास का मुद्दा ज्यादा पसंद आया। मराठा आरक्षण भी अहम मुद्दा था फिरभी भाजपा ने जीत दर्ज की। महाराष्ट्र में बारिश के बाद विधानसभा का चुनाव होना है। समझा जा रहा है कि यही नतीजे फिर दोहराए जा सकते हैं।
पवार परिवार को बड़ा झटका
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार खुद 14 चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन, उन्होंने कभी हार का मुंह नहीं देखा। लेकिन, इस बार न सिर्फ उनकी पुत्री सांसद सुप्रीया सुले को भाजपा कंचन कुल से करारी टक्कर मिली बल्कि पौत्र पार्थ पवार मावल लोकसभा सीट से बुरी तरह हारे। पार्थ पूर्व उपमुख्यमंत्री और शरद पवार के भतीजे अजीत पवार के पुत्र हैं।
महाराष्ट्र
कुल सीटें: 48
भाजपा शिवसेना कांग्रेस राकांपा
2019 23 18 01 04
2014 23 02 04 18
2009 09 17 08 11
प्रकाश आंबेडकर ने बिगाड़ा खेल
भारतरत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर ने इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-एनसीपी का खेल बिगाड़ दिया। आंबेडकर ने एमआईएम के साथ गठबंधन कर दलित-मुस्लिम एकता का चक्रब्यूह तैयार किया जिसमें कांग्रेस और एनसीपी के कई दिग्गज फंस गए। वहीं, वंचित आघाड़ी का लाभ भाजपा-शिवसेना ने उठाया।