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महाराष्ट्र के किसानों के लिए पानी और प्याज सबसे बड़ा मुद्दा
Sat, 27 Apr 2019 11:52 AM IST
अनिल पांडेय
विनोद अग्निहोत्री, शिरूर (पुणे)
विनोद अग्निहोत्री, शिरूर (पुणे)
Published by: अनिल पांडेय
Updated Sat, 27 Apr 2019 11:52 AM IST
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महाराष्ट्र के प्याज किसान
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बालाकोट हमले और भाजपा के राष्ट्रवाद के नारे बनाम गरीबी पर सर्जिकल स्ट्राइक के लिए कांग्रेस के चुनावी हथियार न्याय पर महाराष्ट्र के गांवों में किसानों के बीच पानी और प्याज भारी है। हाइवे से उतरकर लोगों से बात कीजिए तो पता चलता है कि गावों में सबसे बड़ा मुद्दा किसानों की बदहाली है।
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खासकर पुणे-नासिक की प्याज पट्टी में किसान इस बात से नाराज हैं कि यहां के किसानों को अपने प्याज खेतों में ही फेंकने पड़ रहे थे तो दूसरी तरफ पाकिस्तान और मिस्र से आयातित प्याज से देश के बाजार अटे पड़े थे। इसके अलावा इस इलाके के किसानों को पानी का संकट भी झेलना पड़ रहा है। जिसका अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। किसान इसे भी चुनावों में एक मुद्दे के रूप में देखते हैं।
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मुंबई से निकलकर नासिक होते हुए पुणे तक पहुंचते पहुंचते तस्वीर साफ हो जाती है इस इलाके की सभी सीटों पर भाजपा शिवसेना और कांग्रेस एनसीपी गठबंधनों के बीच सीधी टक्कर है। राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं और नेताओं से बात कीजिए तो वो तोते की तरह अपनी अपनी पार्टी के नारे और मुद्दे रटते हैं।
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भाजपा शिवसेना वाले अगर आतंकवाद पर प्रहार, राष्ट्रवाद और नरेंद्र मोदी की छवि को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हैं तो कांग्रेस एनसीपी वाले बेरोजगारी, नोटबंदी और जीएसटी की मार और कांग्रेस की न्याय योजना की चर्चा करते हैं। लेकिन आम लोगों से बात कीजिए तो वो इन सबसे अलग अपनी स्थानीय समस्याओं और रोजमर्रा की जिंदगी की दिक्कतों को सबसे बड़ा मुद्दा मानते हैं।
पुणे जिले की शिरूर लोकसभा सीट पर डिंबा गांव में बैठे हुए अभिषेक गोलब कहते हैं कि इस इलाके में मराठा और आदिवासी किसानों का बाहुल्य है। पहाड़ी इलाके में ज्यादातर आदिवासी रहते हैं जिनके सामने पानी का भीषण संकट है। बारिश का पानी पहाड़ पर बरसकर नीचे आ जाता है और ऊपर के किसान सालभर पानी की कमी से जूझते रहते हैं। उनके लिए पानी के बंटवारे और पहाड़ पर पानी के संचयन का मुद्दा सबसे बड़ा है जिसे अभी तक कोई पूरा नहीं कर सका।
आगे बढ़ने पर मंगेश कोंकणे मिलते हैं और बताते हैं कि इस इलाके के प्याज के किसान बुरी तरह बर्बाद हो गए। बाजार में पाकिस्तान और मिस्र से मंगाया गया प्याज इतना ज्यादा भर गया कि देसी प्याज की खरीद ही नहीं हुई और किसानों को अपना प्याज खेतों में ही फेंकना पड़ा। साथ खड़े ओंकार राक्षी और लहू राक्षी इससे सहमति जताते हुए बताते हैं कि इसके अलावा नासिक पुणे रेलवे लाइन जो वर्षों से लंबित पड़ी है वह भी एक मुद्दा है।
साथ ही तकनीकी कारणों के आधार पर जिस तरह चाकण में प्रस्तावित विमानतल को पुरंदर स्थानांतरित कर दिया गया है, उसे लेकर भी स्थानीय लोगों में नाराजगी है। पुणे नासिक के रास्ते में मानचर, भोरवाडी, घोड़ेगांव, तालेघर, शिनोली आदि गावों में जहां भी उतर कर लोगों से बात कीजिए किसानों में पानी और प्याज सबसे बड़ा मुद्दा है। उनके बीच न भाजपा के बालाकोट के राष्ट्रवाद का ज्वार है और न ही कांग्रेस के न्याय को लेकर कोई रोमांच या उत्साह है।