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योगी-माया पर कार्रवाई से सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट, कहा- लगता है चुनाव आयोग जाग गया

Tue, 16 Apr 2019 01:44 PM IST
Nilesh Kumar चुनाव डेस्क, अमर उजाला
चुनाव डेस्क, अमर उजाला Published by: Nilesh Kumar Updated Tue, 16 Apr 2019 01:44 PM IST
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Lok Sabha chunav 2019: Supreme Court satisfied Election Commission action against yogi mayawati Azam
Election Commission of India, Supreme Court of India

धर्म और जाति पर राजनेताओं के विवादित बयानों को लेकर चुनाव आयोग की कार्रवाई से सुप्रीम कोर्ट ने संतुष्टि जताई है। सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के प्रति तल्खी दिखाई थी, जिसके बाद आयोग ने दोपहर बाद से देर शाम तक चार बड़ी कार्रवाइयां की। इनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा सुप्रीमो मायावती, केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और सपा नेता आजम खान के चुनाव प्रचार पर 48 से 72 घंटे के लिए बैन लगाया गया है। 

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इसके साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान घृणा फैलाने वाले बयानों को ले कर चुनाव आयोग के बैन को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया है। आयोग सिर्फ आचार संहिता तोड़ने वालों पर कार्रवाई कर रहा है। अगर इस तरह का बयान दोबारा आता है, तो याचिकाकर्ता फिर कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
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मायावती ने याचिका दायर कर रैली में शामिल होने की इजाजत मांगी थी। मायावती को आज आगरा में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की महारैली में शामिल होना था। चुनाव आयोग के बैन के कारण वह मंगलवार से 48 घंटों तक किसी भी चुनाव प्रचार अभियान में शामिल नहीं हो पाएंगी। 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने बसपा सुप्रीमो मायावती के चुनाव प्रचार करने पर निर्वाचन आयोग द्वारा लगाए 48 घंटे के प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से भी इनकार कर दिया। पीठ ने मायावती के वकील से कहा कि निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ अलग से अपील दायर करें। 

प्रवासी भारतीय योग प्रशिक्षक ने दायर की थी जनहित याचिका

संयुक्त अरब अमीरात(यूएई) के शारजाह स्थित प्रवासी भारतीय योग प्रशिक्षक हरप्रीत मनसुखानी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में निर्वाचन आयोग को उन राजनीतिक दलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की गई थी, जिनके प्रवक्ता आम चुनावों के लिए मीडिया में जाति एवं धर्म के आधार पर टिप्पणियां करते हैं। 

इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान मायावती और योगी आदित्यनाथ के कथित रूप से विद्वेष फैलाने वाले भाषणों का संज्ञान लेते हुए आयोग से जानना चाहा था कि उसने अभी तक क्या कार्रवाई की। 

आयोग ने खुद को बताया था दंतविहिन

चुनाव आयोग ने इस मामले में खुद को 'दंतविहीन' बताया था। आयोग के वकील का कहना था कि इस संबंध में आयोग के अधिकार बहुत ही सीमित हैं। हम नोटिस देकर जवाब मांग सकते हैं, लेकिन हम किसी राजनीतिक दल की मान्यता खत्म नहीं कर सकते और न ही किसी प्रत्याशी को अयोग्य करार दे सकते हैं। हम सिर्फ सलाह जारी कर सकते हैं और यह अपराध दोबारा होने पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।   

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए चुनाव आयोग से पूछा था कि हमें बताएं कि आपने क्या कार्रवाई की है। पीठ ने आयोग के एक प्रतिनिधि को मंगलवार की सुबह हाजिर होने का भी निर्देश दिया था। कोर्ट की सख्ती के चंद घंटों के भीतर ही आयोग हरकत में आया और कार्रवाई की। 
 

मालूम हो कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की तल्खी के बाद चुनाव आयोग ने सख्त फैसला लेते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती पर कार्रवाई की। योगी के चुनाव प्रचार करने पर 72 घंटे और मायावती के चुनाव प्रचार करने पर 48 घंटे की रोक लगाई। वहीं केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता मेनका गांधी और सपा नेता आजम खान के चुनाव प्रचार करने पर भी रोक लगा दी है। मेनका पर सांप्रदायिक टिप्पणी करने जबकि आजम पर जया प्रदा के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था। 

मेनका गांधी ने सुल्तानपुर में एक रैली के दौरान मुस्लिम मतदाताओं को कहा था कि अगर उन्हें कम वोट मिले तो इसका असर होने वाले काम पर पड़ेगा। इसी तरह आजम खान ने रामपुर से भाजपा उम्मीदवार जया प्रदा के खिलाफ बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। दोनों ही मामलों में रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी गई थी। इन दोनों के बयानों पर खूब हंगामा मचा था।
 

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