नेताओं के विवादित बयानों पर चुनाव आयोग की 'बेबसी', सख्त सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को किया तलब
सुप्रीम कोर्ट ने नेताओं के आपत्तिजनक बयान पर कड़ा एक्शन नहीं लेने वाले चुनाव आयोग के प्रति असंतुष्टि जताई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में आयोग के प्रतिनिधि को मंगलवार को कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा है।
जाति और धर्म को लेकर राजनेताओं और पार्टी प्रवक्ताओं के आपत्तिजनक बयानों पर राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाई।
The court was hearing a PIL seeking strict action against political parties if their spokespersons and representatives deliver speeches and make remarks along religion and caste lines. https://t.co/4UDTpoysp7
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) April 15, 2019
चुनाव प्रचार के दौरान जाति और धर्म को आधार बना कर घृणा फैलाने वाली टिप्पणियों से निपटने संबंधी चुनाव आयोग की शक्तियों पर गौर करने को तैयार है। लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा सुप्रीमोे मायावती और अन्य नेताओं के आचार संहिता के खिलाफ दिए गए बयानों को लेकर नाराजगी जताई है और आयोग के पास सीमित अधिकार होने के प्रति असंतुष्टि जताई है।
मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से जाति और धर्म को लेकर नेता विवादित भाषण देते आ रहे हैं। उनके भाषणों में अली और बजरंग बली का नाम लेकर भी विवादित टिप्पणियां सुनी जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान घृणा फैलाने वाली टिप्पणियों के मामले में चुनाव आयोग के प्रतिनिधि को तलब किया है।
अली और बली को लेकर शुरू हुई थी सियासत
मालूम हो कि पिछले दिनों बसपा सुप्रीमो मायावती ने सहारनपुर के देवबंद रैली में मुस्लिमों से सपा-बसपा गठबंधन को वोट देने की अपील की थी। इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अगर कांग्रेस, सपा और बसपा को अली पर विश्वास है तो हमें भी बजरंग बली पर विश्वास है। योगी के इस बयान के बाद चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा था और शुक्रवार शाम तक जवाब देने को कहा था। अपने जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी मंशा गलत नहीं थी। वह भविष्य में इस तरह के बयान देने में सतर्कता बरतेंगे।