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वाराणसी में सज रही है महामुकाबले की बिसात, प्रियंका गांधी बनाम पीएम मोदी की आहट
Sun, 21 Apr 2019 11:04 PM IST
Prabudhh Jain
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Prabudhh Jain
Updated Sun, 21 Apr 2019 11:04 PM IST
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वाराणसी में प्रियंका बनाम पीएम मोदी की आहट
- फोटो : Amar Ujala
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किंतु-परंतु, हां-ना के दिन बीत चुके हैं। अब घड़ी फैसले की है। बात हो रही है वाराणसी से प्रियंका गांधी वाड्रा की उम्मीदवारी की। सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ। एकदम आमने-सामने का मुकाबला।
किंतु-परंतु की बात इसलिए पुरानी लगती है कि भाई राहुल के प्रचार के लिए रविवार को केरल के वायनाड पहुंचीं प्रियंका ने खुद कह दिया है,
मतलब साफ है। अब तक न खुद प्रियंका गांधी वाड्रा ने, पार्टी अध्यक्ष राहुल ने, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने, न ही उनके पति रॉबर्ट वाड्रा ने कभी इस सवाल पर ये कहा कि नहीं, ऐसा होने नहीं जा रहा। खारिज न करना भी स्वीकारोक्ति का इशारा माना जा सकता है।
इससे पहले राहुल गांधी ने 'द हिंदू' अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था, "मैं आपको सस्पेंस में छोड़ता हूं। सस्पेंस हमेशा गलत नहीं होता है।" जब राहुल से पूछा गया कि क्या आप इसे खारिज नहीं करते हैं। तो इस पर उन्होंने जवाब दिया, "मैं किसी भी चीज की पुष्टि या खंडन नहीं कर रहा हूं।" राहुल का कहना है कि सस्पेंस बना रहे तो अच्छा है।
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वहीं कुछ दिन पहले प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा ने इशारा किया था कि वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रियंका गांधी वाड्रा मैदान में उतर सकती हैं। वाड्रा ने कहा कि प्रियंका वाराणसी से लड़ने को तैयार हैं। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला पार्टी ही करेगी। हम पूरी मेहनत और लगन से काम करेंगे।
खबरें तो ये भी हैं कि वाराणसी में कांग्रेस की एक टीम जमीनी हालात समझने में लगी है। ये देखा जा रहा है कि अगर प्रियंका यहां से उतरने का एलान करती हैं तो बाकी दलों का क्या रुख रहेगा। समर्थन मिलेगा या नहीं। यहां सपा-बसपा की भूमिका भी देखने वाली होगी।
कुछ समय पहले ही पार्टी की महासचिव बनी प्रियंका गांधी, पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी हैं। उनके वाराणसी से उतरने के सियासी मायने बेहद खास हैं। इस सीट से पीएम मोदी खड़े हैं। 2014 में मोदी पहली बार यहां से लड़े थे। इस बार कांग्रेस वाराणसी की लड़ाई को मोदी बनाम प्रियंका बनाने की कोशिश कर सकती है।
वाराणसी में अंतिम चरण में यानी 19 मई को मतदान होना है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी 26 अप्रैल को यहां से नामांकन कर सकते हैं।
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किंतु-परंतु की बात इसलिए पुरानी लगती है कि भाई राहुल के प्रचार के लिए रविवार को केरल के वायनाड पहुंचीं प्रियंका ने खुद कह दिया है,
अगर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी वाराणसी से लड़ने के लिए कहते हैं तो मैं खुशी से लड़ूंगी।
मतलब साफ है। अब तक न खुद प्रियंका गांधी वाड्रा ने, पार्टी अध्यक्ष राहुल ने, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने, न ही उनके पति रॉबर्ट वाड्रा ने कभी इस सवाल पर ये कहा कि नहीं, ऐसा होने नहीं जा रहा। खारिज न करना भी स्वीकारोक्ति का इशारा माना जा सकता है।
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इससे पहले राहुल गांधी ने 'द हिंदू' अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था, "मैं आपको सस्पेंस में छोड़ता हूं। सस्पेंस हमेशा गलत नहीं होता है।" जब राहुल से पूछा गया कि क्या आप इसे खारिज नहीं करते हैं। तो इस पर उन्होंने जवाब दिया, "मैं किसी भी चीज की पुष्टि या खंडन नहीं कर रहा हूं।" राहुल का कहना है कि सस्पेंस बना रहे तो अच्छा है।
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वहीं कुछ दिन पहले प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा ने इशारा किया था कि वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रियंका गांधी वाड्रा मैदान में उतर सकती हैं। वाड्रा ने कहा कि प्रियंका वाराणसी से लड़ने को तैयार हैं। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला पार्टी ही करेगी। हम पूरी मेहनत और लगन से काम करेंगे।
खबरें तो ये भी हैं कि वाराणसी में कांग्रेस की एक टीम जमीनी हालात समझने में लगी है। ये देखा जा रहा है कि अगर प्रियंका यहां से उतरने का एलान करती हैं तो बाकी दलों का क्या रुख रहेगा। समर्थन मिलेगा या नहीं। यहां सपा-बसपा की भूमिका भी देखने वाली होगी।
कुछ समय पहले ही पार्टी की महासचिव बनी प्रियंका गांधी, पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी हैं। उनके वाराणसी से उतरने के सियासी मायने बेहद खास हैं। इस सीट से पीएम मोदी खड़े हैं। 2014 में मोदी पहली बार यहां से लड़े थे। इस बार कांग्रेस वाराणसी की लड़ाई को मोदी बनाम प्रियंका बनाने की कोशिश कर सकती है।
वाराणसी में अंतिम चरण में यानी 19 मई को मतदान होना है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी 26 अप्रैल को यहां से नामांकन कर सकते हैं।