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ग्वालियर की लड़ाई: सियासी दलों से ज्यादा सिंधिया राजघराने का रहा है असर

Wed, 01 May 2019 02:40 PM IST
Prachi Priyam चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Wed, 01 May 2019 02:40 PM IST
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Lok Sabha Chunav 2019: Political history of Gwalior Vivek Narayan BJP Ashok Singh Congress 
ग्वालियर की लड़ाई - फोटो : Amar Ujala

मध्य प्रदेश की ग्वालियर लोकसभा सीट पर 12 मई को छठे चरण में मतदान होगा। ग्वालियर को सिंधिया राजघराने के गढ़ के रूप में गिना जाता है। इस बार यहां भाजपा के विवेक नारायण शेजवलकर और कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक सिंह के बीच मुकाबला है। लंबे समय तक सिंधिया राजघराने के असर में रहने वाले ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र में सबसे अच्छी बात यह है यहां के लोगों का सियासी मूड। यहां की जनता कभी किसी एक पार्टी की नहीं रही, बल्कि समय-समय पर बाकियों को भी मौका दिया। आगे विस्तार से पढ़िए कैसा रहा है ग्वालियर का सियासी इतिहास, यहां का चुनावी समीकरण और कैसी होगी इस बार की लड़ाई?

 

Lok Sabha Chunav 2019: Political history of Gwalior Vivek Narayan BJP Ashok Singh Congress 
माधवराव सिंधिया-अटल बिहारी वाजपेयी

ग्वालियर का सियासी इतिहास

यहां 1957 में हुए पहले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के सूरज प्रसाद को जीत मिली थी, लेकिन 1967 में यह सीट कांग्रेस के हाथ से फिसलकर जनसंघ के खाते में चली गई। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने यहां झंडा बुलंद किया, लेकिन 1984 में फिर से जनता ने कांग्रेस के माधवराव सिंधिया को अपना समर्थन दिया। 2001 में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद साल 2007 और 2009 में यशोधराराजे सिंधिया ने यहां भाजपा की जड़ें मजबूत कीं। 2014 में नरेंद्र सिंह तोमर ने जीत हासिल कर यहां भगवा लहराया। 

Lok Sabha Chunav 2019: Political history of Gwalior Vivek Narayan BJP Ashok Singh Congress 
भाजपा-कांग्रेस का मुकाबला - फोटो : Amar Ujala

मौजूदा चुनावी समीकरण

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2014 के चुनाव में यहां 1877003 मतदाता थे, जिनमें से 1024155 पुरुष थे और महिला मतदाताओं की संख्या 852848 थी। इस बार ग्वालियर के मुकाबले को वहां की मौजूदा स्थिति के कारण बेहद खास माना जा रहा है। पिछले तीन लोकसभा चुनावों में यहां भाजपा को जीत मिली थी। इस दौरान राज्य में भाजपा की सरकार थी, लेकिन इस बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और ग्वालियर क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से सात पर कांग्रेस का कब्जा है। ऐसे में भाजपा को यहां अपनी साख बचाए रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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विवेक नारायण शेजवलकर-अशोक सिंह

इनके बीच होगी इस बार की टक्कर 

ग्वालियर लोकसभा सीट से भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर मौजूदा सांसद हैं। उन्होंने 2014 में कांग्रेस उम्मीदवार अशोक सिंह को महज 29 हजार वोटों से हराकर जीत हासिल की थी। इस बार तोमर की जगह भाजपा ने विवेक नारायण शेजवलकर को टिकट दिया है। विवेक एक बार राज्यसभा सदस्य और ग्वालियर नगर निगम के महापौर रह चुके हैं। वहीं अशोक सिंह कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और पिछले कई चुनावों में कांग्रेस के उम्मीदवार रह चुके हैं। हालांकि इस बार भी सिंधिया परिवार के किसी चेहरे को चुनाव में उतारने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन ऐसे हो नहीं पाया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एक परिवार से प्रभावित ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र का रुझान इस बार किसकी तरफ होगा।

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सिंधिया परिवार

राजनीतिक दल से ज्यादा असरदार सिंधिया परिवार

ग्वालियर लोकसभा सीट पर हमेशा से ही किसी राजनीतिक दल से ज्यादा सिंधिया परिवार का असर रहा है। समय-समय पर कांग्रेस, जनसंघ और भाजपा सिंधिया घराने की मदद से यहां पैर जमाने की कोशिश करते आए हैं। यहां से माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी, और वो सबसे ज्यादा बार सांसद चुने गए। ग्वालियर में कांग्रेस के विस्तार के पीछे माधवराव सिंधिया का बहुत बड़ा योगदान माना जाता है। 2001 में माधवराव सिंधिया का निधन कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका था। उनके बाद यहां कि राजनीति में सिंधिया परिवार को माधवराव की बहन यशोधराराजे सिंधिया ने आगे बढ़ाया। यशोधराराजे सिंधिया 2007 के उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर जीत कर आई थीं। उन्होंने ग्वालियर में भाजपा को उपर उठाया। माधवराव से पहले उनकी मां विजयाराजे सिंधिया भी यहां से कांग्रेस सांसद रह चुकी थीं। 

अब सिंधिया परिवार की अगली पीढ़ी भी यहां की राजनीतिक हलचल में उतनी ही सक्रिय है। इस सीट से पहले माधवराव के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया के मैदान में उतरने की बात थी, मगर बाद में पता चला कि वो गुना लोकसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया को यहां से कांग्रेस के टिकट पर उतारे जाने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 

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