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खास बातचीत में बोले पीएम मोदी, नेहरू से मनमोहन तक अन्याय, इसलिए कांग्रेस का अब 'न्याय' पर दांव

Tue, 16 Apr 2019 09:51 AM IST
Prabudhh Jain डॉ. इन्दुशेखर पंचोली, अमर उजाला
डॉ. इन्दुशेखर पंचोली, अमर उजाला Published by: Prabudhh Jain Updated Tue, 16 Apr 2019 09:51 AM IST
सार

  • जब 'मोदी लाओ' की बात होती है, तो सामान्य व्यक्ति के दिल में यह बात होती है कि पिछले पांच सालों में जो सरकार चली है, उसे वापस लाओ।
  • इस नामदार परिवार ने ‘गरीबी हटाओ' का नारा देकर ही तो गरीबों के वोट हड़पे।
  • खुशी है, कांग्रेस ने माना कि उन्होंने जनता के साथ न्याय नहीं किया।
  • हर दिन पानी पी-पीकर मोदी को नई-नई गाली कौन दे रहा है? ऐसी-ऐसी गालियां दी जा रही हैं साहब कि आप बंद कमरे में भी उन शब्दों को नहीं बोल सकते।

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Lok Sabha Chunav 2019: PM Narendra Modi exclusive interview to Amar Ujala on big issues
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

विस्तार

लोकसभा चुनाव 2019 पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रित हो गया है। एक ही मुद्दा है- मोदी लाओ या मोदी हटाओ। लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी खुद ऐसा नहीं मानते। वे साफ कहते हैं कि चुनाव देश की जनता पर केंद्रित है। विश्वास और सकारात्मकता के साथ आकांक्षाओं को पूरा करने का चुनाव है। विपक्षी उन पर निशाना इसलिए साध रहे हैं कि किसी भी दल के पास देश को लेकर कोई स्पष्ट नजरिया है ही नहीं। कांग्रेस की 'न्याय' योजना पर वे कहते हैं कि उन्होंने खुद मान लिया कि नेहरू, इंदिरा से लेकर मनमोहन सरकार तक जनता से न्याय नहीं हुआ। इस महापर्व में अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. इंदुशेखर पंचोली के साथ विस्तृत बातचीत में अगले पांच साल के लक्ष्य भी गिनाए। कहा- तेज विकास के साथ हमारा लक्ष्य 2025 तक देश की इकोनॉमी फाइव ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का है...

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तब आक्रोश का चुनाव था, अब आकांक्षाओं का है...

Lok Sabha Chunav 2019: PM Narendra Modi exclusive interview to Amar Ujala on big issues

- लोकसभा चुनाव 2019 आप पर केंद्रित है। इंदिरा गांधी के बाद आप पहली शख्सियत हैं, जिनके इर्द-गिर्द चुनाव लड़ा जा रहा है?

जी नहीं, ये चुनाव देश की जनता पर केंद्रित है, उनकी आशाओं और आकांक्षाओं के लिए है। देखिए, पांच साल देश ने प्रगति की है। अब हमें सोचना है कि हमें आगे जाना है या फिर पीछे? एक दल है जो देश को आगे ले जाना चाहता है, तो दूसरी तरफ बाकी सारे दल हैं जो देश को पीछे ले जाना चाहते हैं। तो क्या देश वापस से पीछे जाना चाहेगा? ये चुनाव न्यू इंडिया और पुराने तौर-तरीकों के बीच है। ये चुनाव दल प्रेम और देश प्रेम के बीच है। ये चुनाव 'इंडिया फर्स्ट और फेमिली फर्स्ट' के बीच है। ये चुनाव बढ़ते भारत और बढ़ते भ्रष्टाचार के बीच है। ये चुनाव परफॉर्मेन्स की राजनीति और प्रोमिसेज की राजनीति के बीच है। 2014 का चुनाव आक्रोश का चुनाव था- भ्रष्टाचार, परिवारवाद, पॉलिसी पैरालिसिस के विरोध में आक्रोश था। देश का स्वाभिमान नीचा था, देश की कमजोर छवि को लेकर लोगों में ग्लानि थी, आक्रोश था। 2019 का चुनाव विश्वास और सकारात्मकता के साथ आकांक्षाओं को पूरा करने का है। आज देश जबर्दस्त आत्मविश्वास से भरा हुआ है। देश को लगता है कि नामुमकिन अब मुमकिन है। 2014 से 2019 का समय देश की आवश्यकताओं को पूरा करने का था, 2019 से आगे का समय देश की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए विश्व में भारत का डंका बजाने का होगा।

- पूरे चुनाव में दो ही बातें हैं, ‘मोदी लाओ-मोदी हटाओ।’ आपको रोकने के लिए ही सारे गठजोड़ हो रहे हैं? भाजपा भी चाहती है कि चुनाव आपके ही व्यक्तित्व पर केंद्रित हो जाए?

जब मोदी लाओ की बात होती है, तो सामान्य व्यक्ति के दिल में यह बात होती है कि पिछले पांच सालों में जो सरकार चली है, उसे वापस लाओ। आतंकवाद पर भारत में जो मुहिम चली है, उसे वापस लाओ। तेज गति से गरीबी कम होने का जो अभियान चला है, उसे वापस लाओ। किसानों के लिए जो कल्याणकारी काम हुए है, उन्हें वापस लाओ। गरीब माता-बहनों के जीवन में बदलाव लाने की मुहिम को वापस लाओ। ‘मोदी लाओ’ के पीछे यही मिशन है। विपक्ष नहीं बताता है कि क्या लाओ, क्यों लाओ, कैसे लाओ- इसलिए वे केवल हटाओ की बात करते हैं।

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कांग्रेस मुकाबला नहीं कर सकती इसलिए बहस का स्तर नीचे ले जा रही..

Lok Sabha Chunav 2019: PM Narendra Modi exclusive interview to Amar Ujala on big issues

- ऐसा नहीं लगता कि चुनाव मूलभूत मुद्दों से भटक रहा है?

यदि आप मेरे भाषणों को देखें, तो पाएंगे कि मेरे भाषण इन्हीं मुद्दों के लिए समर्पित होते हैं, हालांकि वो बातें कभी हेडलाइंस नहीं बनती हैं। मेरी किसी भी रैली का भाषण सुनिए, आज मैंने मुरादाबाद में छोटे उद्योगों से लेकर गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस, किसान कल्याण से लेकर गरीबों के उत्थान की बातें की हैं। मेरे भाषणों में विज्ञान की भी बातें होती हैं, न्यू इंडिया की बातें होती हैं, मेक इन इंडिया की बातें होती हैं, देश की सुरक्षा की बातें होती हैं, लोगों की आकांक्षा की बातें होती हैं। हम विकास की बात करते हैं, वे विनाश की बात करते हैं। आप बताइये हर दिन, एक नए झूठ का शगूफा कौन छोड़ता है? वे जनता को मुद्दों से भटकाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मैं आपको इतना बता देना चाहता हूं कि देश की जनता बहुत समझदार है, अब वह इनके मायाजाल में नहीं फंसने वाली है। राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला भी विकास से जुड़ा है। इस पर बोलना भी देश के विकास की बात करना ही है। हमारे सारे निवेश, पर्यावरण, आर्थिक समृद्धि, यह सभी इस बात पर सबसे पहले निर्भर करता है कि हम कितने सुरक्षित हैं। आप विकास का सपना नहीं देख सकते, जब देश में बम धमाकों का डर हो, असुरक्षा का माहौल हो। कांग्रेस और उनके साथी यह जानते हैं कि विकास के मुद्दे पर हमारा मुकाबला नहीं कर सकते, इसलिए बहस का स्तर नीचे ले जाने के लिए मुझे या सेना को अपमानित करते हैं।

-भाजपा संकल्प पत्र को लेकर कितनी गंभीर है? किसान सम्मान निधि का दायरा बढ़ाना, छोटे किसान/व्यापारी पेंशन, ये सब ‘न्याय’ का जवाब तो नहीं?

खुशी है, कांग्रेस ने माना कि उन्होंने जनता के साथ न्याय नहीं किया। आप भाजपा का और कांग्रेस का घोषणापत्र देख लीजिए। आप महसूस करेंगे कि एक संकल्पपत्र है उस पार्टी का, जो गंभीरता से जिम्मेदारी पूर्वक देश को चलाना चाहती है। दूसरी तरफ, कांग्रेस को पता है वो सत्ता में आने वाली नहीं है, इसलिए उन्होंने केवल झूठे वादों की घोषणाएं की हैं। हमारा संकल्प पत्र, सुशासन पत्र भी है, राष्ट्र की सुरक्षा का पत्र भी। हमारा संकल्प पत्र राष्ट्र-समृद्धि का पत्र भी है। 

आपको यह भी जानना पड़ेगा कि हमारा संकल्प पत्र तैयार कैसे हुआ है। करीब छह करोड़ लोगों के सुझाव इकट्ठा किए गए, सुझाव-पेटी, ई-मेल्स, वेबसाइट, फोन-कॉल्स, व्हाट्स-अप, संकल्प रथ और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लोगों के सुझाव आए, जबकि बाकी पार्टियों के घोषणापत्र तो चार-पांच लोगों ने एसी कमरे में बैठकर बनाए हैं। हमने देश की सुरक्षा, देश की समृद्धि और देश के 130 करोड़ जनता की खुशहाली लाने के लिए संकल्प पत्र बनाया है। कांग्रेस पार्टी कह रही है -अब होगा न्याय। मुझे खुशी है, उन्होंने माना कि पंडित नेहरू की सरकार, इंदिरा गांधी की सरकार, राजीव गांधी की सरकार और रिमोट कंट्रोल से चलने वाली मनमोहन सिंह की सरकारों ने अब तक देश के लोगों के साथ अन्याय किया था। 

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इनके अन्याय की गिनती लाखों में हैं और कहते हैं कि अब न्याय होगा

Lok Sabha Chunav 2019: PM Narendra Modi exclusive interview to Amar Ujala on big issues

इस नामदार परिवार ने ‘गरीबी हटाओ' का नारा देकर ही तो गरीबों के वोट हड़पे। भाई, आप आजादी के 70 सालों में गरीबी नहीं हटा पाए और अब कहते हो कि अब होगा न्याय! जनता कह रही है, देश से कांग्रेस हटेगी, तब हटेगी गरीबी और तभी हो पाएगा न्याय। ओबीसी कमीशन को संविधानिक दर्जा देने का मामला 1955 से पेंडिंग था, आपने न्याय किया क्या? 40 वर्षों से ओआरओपी पेंडिंग था, आपने न्याय किया क्या? 26/11 के बाद वायुसेना स्ट्राइक करना चाहती थी, आपने कार्रवाई करने का आदेश देकर न्याय किया क्या? सेना बार-बार लड़ाकू विमान, बुलेट-प्रूफ जैकेट और अन्य हथियारों की मांग कर रही थी, आपने उन मांगों को पूरा कर देश की सेना के साथ न्याय किया क्या? अंतरिक्ष से लेकर पाताल तक घोटाले कर अपना घर भरकर देश की जनता के साथ न्याय किया क्या? 84 में सिख दंगों के आरोपियों को सजा दिलाकर सिख भाइयों के साथ न्याय किया क्या? कश्मीरी पंडितों के साथ न्याय किया क्या? जम्मू-कश्मीर को विवादित बनाकर भारत के साथ न्याय किया क्या? ये लिस्ट बहुत लंबी है, इनके अन्याय की गिनती हज़ारों-लाखों में जायेगी और ये कहते हैं कि अब होगा न्याय।

-चुनाव प्रचार में नेताओं की भाषा का स्तर गिर रहा है? कौन कितना जिम्मेदार है?

हर दिन पानी पी-पीकर मोदी को नई-नई गाली कौन दे रहा है? ऐसी-ऐसी गालियां दी जा रही हैं साहब कि आप बंद कमरे में भी उन शब्दों को नहीं बोल सकते। जिस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष जो अपने एम. फिल की डिग्री दिखाता है, जो प्रधानमंत्री पद का सपना पाले बैठा नामदार है, वह ऐसी-ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा है कि शर्म को भी शर्म आ जाए। मोदी तो पिछले 17 साल से इन लोगों की गालियां सुन-सुनकर गाली-प्रूफ हो गया है।


- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल/एयरस्ट्राइक से माहौल बदला है? कितना मुश्किल था ये फैसले लेना?

जब रक्षा और भारत के नागरिकों की सुरक्षा की बात आती है, तो मुश्किल फैसले भी लेने पड़ते हैं। मुझे हमारे सशस्त्र बलों की क्षमता पर पूरा विश्वास है। लेकिन, जब हमारे जवानों की जान जोखिम में होती है, तो मेरे लिए बहुत ही चिंता की बात होती है। मैं तब-तक चैन से नहीं बैठ सका, जब तक ये खबर नहीं आ गई कि हमारे जवानों ने ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया है और सभी सकुशल वापस लौट आए हैं। यदि हमें मजबूर किया गया कि हमें अपने लोगों को सुरक्षित रखने के लिए लड़ाई वहां तक ले जानी है, जहां आतंकवादियों को तैयार किया जाता है तो हम यह करने के लिए तैयार हैं। इसके उलट जब मुंबई में सैकड़ों लोग आतंकवादियों द्वारा मार दिए गए, तबकी सरकार ने इस बारे में कुछ नहीं किया। यह हमारे और उनके एप्रोच का अंतर है। आतंक के मामले में हमारी नीति जीरो टोलरेंस की रही है। भारतीय नागरिकों की रक्षा एवं सुरक्षा से कोई समझौता संभव नहीं है। यह हमारा मार्गदर्शक मूल्य है। हम भविष्य में भी अपने 130 करोड़ नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो भी कदम आवश्यक होगा उठाएंगे।

- फारुक अब्दुल्ला ने तो आपको पाकिस्तानी करार दे दिया?

दुश्मनों को डर सताए तो यह डर अच्छा है...

- पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को आशंका है कि भारत फिर हमला करेगा, और पाकिस्तानी पीएम कहते हैं कि मोदी फिर जीतते हैं, तो बातचीत अच्छी होगी। यह खेल क्या है? कैसे देखते हैं?

पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा क्या है, यह मेरे लिए ज्यादा अहमियत नहीं रखता है। हालांकि मैं कहना चाहता हूं कि जब दुश्मन देश को और आतंकवादियों को डर सताए, तो ये डर अच्छा है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इमरान खान एक क्रिकेटर थे और उनका हालिया बयान भारतीय चुनाव को प्रभावित करने के लिए रिवर्स स्विंग बॉलिंग का प्रयास है। लेकिन, भारतीय यह भलीभांति जानते हैं कि रिवर्स स्विंग बॉल पर किस तरह हेलिकॉप्टर शॉट मारा जाता है। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि उन्होंने नवाज शरीफ को किस तरह निशाना बनाया था। पाकिस्तान में चुनाव के समय उनका नारा था : ‘मोदी का जो यार है, वो गद्दार है, वो गद्दार है’

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- पुलवामा हमले / एयर स्ट्राइक पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, सेना के राजनीतिकरण के भी आरोप लगे हैं। आप पर भी आरोप हैं।

क्या हमें आतंकवादियों के खिलाफ देश की कार्रवाई पर गर्व नहीं करना चाहिए? क्या हमें इस बात पर गर्व नहीं करना चाहिए कि भारत ने वह हासिल किया है, जो दुनिया के बहुत कम देश हासिल कर सके हैं? आखिरकार विपक्ष को देश की इस उपलब्धि से क्या समस्या है? पिछले कुछ दिनों में मैंने देशभर का दौरा किया है और देखा है कि बालाकोट में जो कुछ भी हुआ, उसे लेकर पूरा देश बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहा है। इसके बाद भी कांग्रेस अध्यक्ष के सबसे करीबी सलाहकार, उनके गुरु ने कहा है कि हमें आतंकी हमले के जवाब में कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। अगर कोई और जिम्मेदार पार्टी होती तो इस प्रकार का बयान देने वाले व्यक्ति को तत्काल हटा दिया जाता या निलंबित कर दिया जाता। लेकिन, यह कांग्रेस पार्टी है, जहां इस तरह के नेताओं को प्रमोट किया जाता है। वैश्विक शांति को सुनिश्चित करने की गारंटी है शक्तिशाली भारत। इसका मतलब है कि अगर भारत शक्तिशाली है तो शांति की भी गारंटी है। भारत को और सुरक्षित व ताकतवर राष्ट्र बनाना हमारा संकल्प है। कांग्रेस शासन में वोट बैंक के चलते सेना के हाथ बांध रखे थे। सरकार का हित देश हित और सेना दोनों पर हावी था। इसे कहते हैं सेना का राजनीतिकरण। आज तो सेना हर दबाव, हर बंधन से मुक्त है।

- ए-सैट की उपलब्धि पर आपके संबोधन पर भी सवाल उठे हैं?

इस पर बहस निरर्थक है। चुनाव आयोग ने जांच कर के इस बारे में क्लीन चिट दे दी है। मैं वास्तव में विपक्ष के नैतिक दिवालियेपन पर हैरान हूं। भारत ऐसी ताकत रखने वाला विश्व का चौथा देश बन गया, पूरा देश इस उपलब्धि पर गर्व कर रहा था, सिर्फ विपक्ष को छोड़कर। किसी ने कहा कि सिर्फ एक सैटेलाइट को मार गिराया, किसी ने कहा कि हमें इसे गोपनीय रखना चाहिए था। देश के वैज्ञानिकों ने कहा कि उनके पास यह क्षमता थी, लेकिन उन्हें यूपीए सरकार से कभी भी इसकी मंजूरी नहीं मिली। अगर चिंता का कोई कारण है तो यह है। मैं इस बात की उम्मीद नहीं करता कि मेरी जीत पर विपक्ष खुश हो, लेकिन, जब वैश्विक मंच पर भारत का दबदबा बढ़ रहा है तो कम से कम इस बात से तो उन्हें खुश होना चाहिए। आखिर भारत का दबदबा बढ़ने से उन्हें क्या दिक्कत है?

करोड़ों रुपए बाहर आ गए, सुबूत भी है, फिर चिल्ल-पों क्यों

Lok Sabha Chunav 2019: PM Narendra Modi exclusive interview to Amar Ujala on big issues

- चार राज्यों में नेताओं पर आईटी के छापों को विपक्ष सत्ता का दुरुपयोग बता रहा है?

मूल सवाल यह है कि भ्रष्टाचार पर कार्रवाई होनी चाहिए कि नहीं? इसका उत्तर ना है, तो फिर इस पर बहस करने से कोई फायदा नहीं है। लेकिन, अगर उत्तर हां है, तो क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोई भी समय खराब होता है? आप बताइये जब चुनाव होते हैं तो रेलवे में बिना टिकट यात्रा करने वालों को पकड़ना चाहिए या नहीं? एजेंसियां नियमित रूप से मामलों की जांच-पड़ताल करती हैं और छापे तब पड़ते हैं, जब उनके पास कुछ सुबूत या खुफिया जानकारी होती है। ये इतनी मोटी चमड़ी के हैं कि करोड़ों रुपए जब बाहर आ गए हैं, सुबूत जनता के सामने है तब भी चिल्ल-पों मचा रहे है।

- रॉबर्ट वाड्रा/चिदंबरम पर कार्रवाई पर भी ऐसे ही आरोप लगे हैं? चुनावी साल/चुनावी मौके पर यह अतिसक्रियता क्यों?

इन लोगों के खिलाफ मामले काफी दिनों से चल रहे हैं। यूपीए सरकार के दौरान ही इनके जमीन घोटाले की खबर सबसे पहले सामने आई थी। कोई भी व्यक्ति चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, जिस किसी ने भी देश को लूटा है, उसे सजा जरूर मिलेगी।

- आप चुनावी सभाओं में, तुगलक रोड घोटाले की चर्चा करते हैं, लेकिन वैसी प्रभावी कार्रवाई दिखती नहीं है?

पहले आपको हमारी कार्रवाई से परेशानी हो रही थी, अब आप पर्याप्त कार्रवाई के लिए कह रहे हैं। दरअसल, यह पूरा मामला मीडिया में नहीं दिख रहा है। हमने देखा है कि कैसे राफेल के मुद्दे पर मीडिया ने झूठे और काल्पनिक आरोपों के आधार पर हजारों पन्ने भर दिए। लेकिन, नेशनल हेराल्ड, अगस्ता वेस्टलैंड, तुगलक रोड घोटाले जैसे मामले मीडिया को शायद ज्यादा नहीं लुभाते हैं। अभी एक ऑनलाइन मैग्जीन ने नामदार के कई जमीन घोटालों को बकायदा सुबूतों के साथ दिखाया, लेकिन मजाल कोई मीडिया इसको हाथ भी लगाता। नेशनल हेराल्ड मामले में आरोप तय कर दिए गए हैं और आरोपी मां-बेटा जमानत पर हैं। अगस्ता वेस्टलैंड मामले में मामा कई राज उगल रहे हैं। यह तो ऐसा मामला है, जिसमें उनके रक्षामंत्री ने भी यह स्वीकार किया था कि घोटाला हुआ है। तुगलक रोड घोटाले में नोटों के बंडल बरामद किए गए हैं और जो निःसंदेह तौर पर गड़बड़झाले और घोटाले की ओर इशारा कर रहे हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

- संकल्प पत्र में, अनुच्छेद 370 व 35 ए हटाने का वादा है। इस पर पिता-पुत्र अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं?

अगर किसी को भी कश्मीर पॉलिसी के बारे में सवाल पूछना है, तो उसे कांग्रेस पार्टी से पूछना पड़ेगा। हम भारत की एकता को लेकर प्रतिबद्ध हैं, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं चाहती है। कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में कहा है कि वह धारा 370 नहीं हटाएगी। उन्होंने अनुच्छेद-35ए का उल्लेख तक नहीं किया है। इतना ही नहीं, वे सेना को कमजोर करना चाहते हैं और आतंकवादियों को ताकतवर बनाना चाहते हैं। वे ऐसे लोगों के साथ खड़े हैं, जो भारत में दो प्रधानमंत्री होने के विचार का समर्थन करते हैं। उन लोगों को देशवासियों को जवाब देना चाहिए कि वे देश को एक रखने वाली ताकतों के साथ खड़े हैं या फिर अलगाववाद की ताकतों के साथ। जिन लोगों ने पहले भारत को दो देशों में बांटा, वही लोग अब उन लोगों के साथ खड़े हैं, जो हमारे देश में दो प्रधानमंत्री चाहते हैं। 

- इस चुनाव के नतीजों पर आपका आकलन क्या है?

हमें पूरा विश्वास है कि चुनाव में एनडीए पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करेगा। वंशवाद के खिलाफ विकास की जीत होगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ ईमानदार शासन की जीत होगी। चुनाव के परिणाम अवसरवादियों के खिलाफ होंगे।


- आप यूपी से चुनकर आते हैं, गठबंधन का कैसा असर देखते हैं?

हम उत्तरप्रदेश में बेहतर प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त हैं, लोगों के विश्वास और समर्थन के लिए धन्यवाद। यह बिलकुल स्पष्ट है कि सपा और बसपा में जरा सी भी वैचारिक समानता नहीं है और उनका गठबंधन कभी भी टूट सकता है। सपा और बसपा दोनों पार्टियां कांग्रेस के खिलाफ लड़ेंगी, लेकिन बाद में गठबंधन में अस्थिरता की बात कहते हुए उसी से हाथ मिला लेंगी। कांग्रेस अब कह रही है कि  उसका फोकस 2022 के विधानसभा चुनावों पर है। इसका सीधा सा मतलब है कि उसने पहले ही अपनी हार स्वीकार कर ली है। हमने 2017 में कांग्रेस-सपा गठबंधन को हराया, और अब हम इस बुआ-भतीजा के गठबंधन को भी हरा देंगे। अगर सवाल यह है कि वंशवाद की राजनीति और विकास की राजनीति में कौन जीतेगा, तो इस सवाल का उत्तर, उत्तर प्रदेश देगा। अगर सवाल यह है कि पीछे ले जाने वाली राजनीति की जीत होगी या फिर आगे ले जाने वाली राजनीति की, तो इस सवाल का उत्तर, उत्तर प्रदेश देगा। अगर सवाल यह है कि पॉलिटिक्स ऑफ करप्शन की जीत होगी, या नये भारत की होगी, तो इसका भी उत्तर, उत्तरप्रदेश देगा। जो कल तक एक दूसरे को जेल भेज रहे थे, आज जुगल बंदी कर रहे हैं, क्योंकि राजनीति इनकी दुकानदारी है। वोटर इनके लिए मोहरे हैं। 2012 में जब उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आई थी तो वहां के मुख्यमंत्री ने कहा था कि बहनजी ने 40 हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया है। अब वे उन्हीं बहनजी से मिल गए हैं। क्या अब वे उस घोटाले को भूल गए हैं? 2017 में जब चुनाव प्रचार जोरों पर था, तब बहनजी ने राज्य की तत्कालीन सरकार को गुंडों, बदमाशों, माफियाओं, भ्रष्टाचारियों, दुराचारियों की सरकार कहा था। अब वे उन्हीं से जाकर मिल गई हैं! पहले एक-दूसरे से लड़ते थे, अब एक-दूसरे के लिए लड़ने जा रहे हैं।

मुझे पूर्वोत्तर से प्रेम, वे तो वेशभूषा और संस्कृति का मजाक उड़ाते हैं 

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GFX

- आप पूर्वोत्तर में सर्वाधिक दौरे करने वाले पीएम हैं, वहां से क्या उम्मीदें हैं?

उन्होंने पूरे पूर्वी भारत खासकर पूर्वोत्तर भारत के साथ भेदभाव किया। क्या आप जानते हैं कि पूर्वोत्तर में हजारों ऐसे गांव हैं, जहां आजादी के 70 साल बाद भी बिजली नहीं थी, वहां के लोग अंधेरे में जी रहे थे। लेकिन, हमने इन सभी गांवों में बिजली पहुंचाई है। 
क्या आपको नहीं लगता कि बोगीबीला और ढोला सदिया पुलों के निर्माण में देरी से व्यापार और विकास कार्यों में नुकसान हो रहा था। हमने इन पुलों का निर्माण भी पूरा किया। क्या आप जानते हैं कि वे लोग पूर्वोत्तर के लोगों की वेशभूषा और संस्कृति का मजाक उड़ाते हैं, जबकि मुझे उनके परिधान पहनना बेहद पसंद है। 
क्या आपको इसका एहसास नहीं कि वे इन राज्यों में केवल चुनाव के समय ही जाते थे। जबकि हमारे लिए यह सिर्फ चुनावी विषय नहीं है। हमारी सरकार के मंत्री अमूमन हर सप्ताह पूर्वोत्तर के राज्यों में जाते रहे हैं। 
क्या आप जानते हैं कि वे एक अदद कानून तक नहीं बदल पाए? उन्होंने बांस को वृक्ष की श्रेणी में बनाए रखा, जिससे लोगों का जीना मुश्किल था। हमने इसे बदलकर वहां के लोगों की मुश्किलें आसान कर दीं। 
क्या आप यूपीए और एनडीए शासन के दौरान आई हिंसा में कमी को महसूस नहीं करते? उग्रवाद में ऐतिहासिक कमी आई है और करीब-करीब खत्म हो चुका है।

2025 तक फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का लक्ष्य

- दोबारा प्रधानमंत्री बनने पर आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?

विकास के मामले में हमारा रिकॉर्ड शानदार रहा है। हमने अपने इन कार्यक्रमों को तय लक्ष्यों के साथ आगे भी जारी रखने का फैसला किया है। हम अपने देश को दुर्बल पांच की श्रेणी से निकालकर सबसे तेज विकसित हो रही अर्थव्यवस्था बनाने में सफल रहे हैं। हमारा अगला लक्ष्य 2025 तक इसे फाइव ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था में तब्दील करना है।
पहले पांच साल में हम लुटेरों को जेल के दरवाजे तक लाने में कामयाब रहे। हम सुनिश्चित करेंगे कि भ्रष्टाचार में शामिल लोग जेल जाएं। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करेंगे।
2014 में देश में मोबाइल और इसके पार्ट्स बनाने की सिर्फ चार यूनिट थीं, अब यह 268 हो चुकी हैं। हम भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने को प्रतिबद्ध हैं।
हाईवे बनाकर, सभी गांवों में बिजली पहुंचाकर, गैस कनेक्शन देकर हमने आम लोगों की जिंदगी आसान बनाई है। अब हम अगली पीढ़ी के लिए गैस ग्रिड, वाटर ग्रिड और इन्फॉर्मेशन हाइवे जैसी आधुनिक सुविधाओं का निर्माण करेंगे।
स्टार्ट अप इंडिया के जरिये युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसे अगले स्तर पर ले जाते हुए 2024 तक 50 हजार नए स्टार्ट अप को 50 लाख तक का लोन बिना बैंक गारंटी के देने की नई योजना शुरू करेंगे।
पीएम किसान योजना शुरू की। आगे इसके दायरे में हर किसान को लाया जाएगा। असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा दी है। भविष्य में छोटे दुकानदार व छोटे किसानों के लिए भी पेंशन योजना की शुरुआत करेंगे।
हमने भारतमाला और सागरमाला जैसी विशाल परियोजनाओं की शुरुआत की है, जिनकी लागत 5.36 लाख करोड़ व आठ लाख करोड़ है। अगले चरण में, कृषि-ग्रामीण क्षेत्र के लिए 25 लाख करोड़ और विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।
अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में 8-10 फीसदी जीडीपी दर बनाए रखने की कोशिश होगी। इससे पहले, जब भी हमने यह विकास दर हासिल की है, महंगाई व बैंकिंग सेक्टर में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। महंगाई पर काबू व बैंकिंग प्रणाली में सुधार कर हमने तेज विकास दर बनाए रखने का फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है।
शिक्षा-सेहत में हमारा लक्ष्य विश्वस्तरीय गुणवत्ता हासिल करना होगा। पाठ्यक्रम अपडेट किया जाएगा। शिक्षकों के खाली पद भरे जाएंगे, शोध पर जोर होगा और शिक्षा को इंडस्ट्री के साथ जोड़ने की कोशिश होगी। वर्कफोर्स को शिक्षित व स्किल्ड बनाए बिना 8-10 फीसदी विकास दर टिकाऊ नहीं हो सकती।
गरीब और किसानों के सशक्तीकरण की दिशा में सबके लिए पक्का घर, किसानों की आय दोगुना करने की योजनाएं 2022 तक पूरी करने का लक्ष्य है। किसान हित में सुधार आगे भी हमारी शीर्ष प्राथमिकता में शामिल होगा।

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