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'1995 गेस्ट हाउस कांड' की टीस नहीं भुला सकीं मायावती, मुलायम के सामने ही कर दिया जिक्र

Fri, 19 Apr 2019 05:14 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Fri, 19 Apr 2019 05:14 PM IST
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Lok sabha chunav 2019: Mayawati has not forgotten 1995 Guest house incident
एक साथ आए मायावती और मुलायम सिंह यादव - फोटो : पीटीआई

लोकसभा चुनाव 2019 के महासंग्राम में पुराने सियासी दुश्मन भी एक मंच पर आ रहे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव 24 साल बाद अपनी पुरानी दुश्मनी को भुलाकर मैनपुरी में एक मंच पर आ गए। दोनों के बीच मनमुटाव की असली वजह थी 1995 का गेस्ट हाउस कांड। मायावती गेस्ट हाउस कांड की यादें भुलाकर आज मुलायम के साथ एक मंच पर आ गईं, लेकिन इस दौरान उनकी टीस उभर ही आई। 

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भले ही 24 साल बाद मायावती ने मुलायम के साथ मंच साझा किया, लेकिन इस दौरान वह पुरानी टीस को भुला नहीं सकीं। मंच से इसका जिक्र कर मायावती ने बता दिया कि कड़वी यादें अभी खत्म नहीं हुई हैं। गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा, न भूलने वाले कांड के बावजूद हम लोग जनता की भलाई के लिए चुनाव में साथ आए हैं। 
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मायावती ने बताई साथ आने की वजह

गठबंधन करने के फैसले पर सफाई देते हुए मायावती ने कहा- सवाल उठेगा कि 2 जून 1995 को हुए गेस्ट हाउस कांड के बावजूद यूपी में सपा-बसपा में मिलकर चुनाव क्यों लड़ रहे हैं। इसका जवाब वह पहले ही दे चुकी हैं और इसे दोबारा दोहराना नहीं चाहतीं। उन्होंने कहा- देश, जनता और पार्टी के हित में कभी-कभी हमें ऐसे कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। हमने देश के वर्तमान हालातों के चलते प्रदेश में सपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
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मायावती का ये बयान बताता है कि 24 साल पुराना वो दर्द अभी भी कम नहीं हुआ है। लेकिन मौजूदा सियासी मजबूरियों ने उन्हें सपा के करीब ला दिया है। मायावती का इसे 'न भूलने वाला कांड', बताना यह साबित करने के लिए काफी है कि उस भयावह कांड को आज तक वह भूली नहीं हैं। भाजपा से मुकाबला करने के लिए उन्हें मजबूरी में ये फैसला लेना पड़ा है। 2014 चुनाव में मोदी लहर में बसपा पूरी तरह साफ हो गई थी। सपा को भी महज पांच सीटें ही मिली थीं। दोनों का साथ आना लाजिमी था। 

जमकर की एक-दूसरे की तारीफ

रैली में दोनों नेताओं ने एक दूसरे की जमकर तारीफ की। मायावती ने कहा कि मुलायम सिंह ने सभी वर्गों को जोड़ा है। मोदी की तरह वो नकली पिछडे़ वर्ग के नहीं है। अपने भाषण में माया ने कई बार प्रधानमंत्री मोदी की जाति पर सवाल उठा और कहा कि मुलायम ही पिछड़ों के असली नेता हैं। जबकि मुलायम ने कहा कि मायावती हमारे लिए वोट मांगने आई हैं। हम उनका स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि आपके इस एहसान को कभी नहीं भूलूंगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि मायावती का बहुत सम्मान करना होगा। माया ने हमेशा हमारा साथ दिया है।

क्या था गेस्ट हाउस कांड?

अजय बोस की किताब, 'बहनजी- ए पॉलिटिकल बायोग्राफी ऑफ मायावती' में गेस्ट हाउस कांड का जिक्र बड़ी तफसील से किया गया है। उस दिन लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में जो कुछ हुआ, वो शर्मसार कर देने वाला था। बाबरी विध्वंस के बाद 1993 में बसपा और सपा साथ आए और सरकार बनाई। लेकिन 2 जून 1995 में बसपा ने अचानक समर्थन वापसी का एलान कर दिया। इससे बौखलाए कुछ सपा कार्यकर्ता, गेस्ट हाउस के कमरा नंबर एक में घुस गए जहां मायावती ठहरी थीं। उन पर हमला हुआ, बदसलूकी हुई। किसी तरह उन्हें बचाया गया। 


लेकिन एक न भूलने वाला दर्द, मायावती के जेहन में बस गया। इसके बाद उन्होंने कई मौकों पर कहा कि वह दोबारा कभी सपा के साथ नहीं आएंगी। मुलायम के लिए उन्होंने कई बार कठोर शब्दों का भी इस्तेमाल किया। लेकिन 2019 में सियासी हालात ने करवट बदली और ढाई दशक पुराने सियासी दुश्मन एक साथ आ गए।   

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