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उत्तर प्रदेश: छठे चरण में कम मतदान, भाजपा के लिए खतरे की घंटी?
Mon, 13 May 2019 08:09 PM IST
अमित मंडल
शशिधर पाठक, अमर उजाला
शशिधर पाठक, अमर उजाला
Published by: अमित मंडल
Updated Mon, 13 May 2019 08:09 PM IST
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मतदान (सांकेतिक तस्वीर)
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सैदपुर, लंका चौराहा, विश्वेसरगंज और गोरखपुर बाईपास तक जहां भी चुनाव की चर्चा कीजिए, पहले मतदान के प्रतिशत की चर्चा शुरू हो जा रही है। सबको पता है कि छठवें चरण में जौनपुर, भदोही, प्रतापगढ़, समेत लगभग 14 सीटों पर अन्य चरणों की अपेक्षा कम मतदान हुआ है। कम मतदान को यहां के लोग गठबंधन के पक्ष में ज्यादा मान रहे हैं।
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शिवपूजन सिंह का कहना है कि जब मतदान अधिक होता है, तो इसका मतलब संपन्न वर्ग अपने घरों से बाहर निकला है। यह वर्ग पिछले लोकसभा चुनाव से भाजपा का वोट वर्ग है।
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घर की गृहणी सुषमा तिवारी भी मानती हैं कि ब्राह्मणों के घर का पूरा वोट नहीं पड़ पाता। एक दो लोग रह जाते हैं, जबकि पिछड़ी जाति और अनुसूचित जाति के लोगों का पूरा वोट पड़ता है। सुषमा कहती हैं कि 2014 में उनके घर का पूरा वोट भाजपा को पड़ा था। एक-दो वोट रह गए थे।
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संजय यादव मीडिया की पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी भी विश्लेषण कुछ इसी तरह का है। वह कहते हैं बसपा का एक-एक वोटर मतदान केंद्र तक जाता है। यादवों का दस में से नौ वोट जाता है। अगड़ी जातियों का दस में पांच या छह वोट जाता है। संजय यादव इस मुद्दे पर कुछ गांवों में जाकर काम कर चुके हैं। उनका कहना है कि इस बार चुनाव वैसे नीरस है। यह मुद्दों पर नहीं लड़ा जा रहा है। भाजपा के पास चुनाव में कोई लोगों के जीवन से जुड़ा जरूरी मुद्दा नहीं है। जबकि कांग्रेस पार्टी भाजपा को घेर ही नहीं पा रही है।
गठबंधन ने दबाव जरूर बनाया है, लेकिन सपा-बसपा के पढ़े लिखे मतदाताओं को भी लग रहा है कि दोनों पार्टियां केन्द्र में सरकार नहीं बनाएंगी। इसलिए इस बार सबसे अजीब स्थिति उन लोगों के सामने हैं, जो सरकार के कामकाज या पार्टियों के घोषणा पत्र या चुनाव के मुद्दे पर वोट करते हैं। संजय यादव का कहना है कि यही फ्लोटिंग वोट है। इसने ही पिछली बार जमकर भाजपा को वोट किया था। इस बार इसने छठवें चरण के मतदान में कम उत्साह दिखाया है। संजय का मानना है कि इससे छठवें चरण के मतदान में 14 सीटों पर भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जितेन्द्र सिंह एक चुनाव विश्लेषक के साथ मिलकर काम करते हैं। इस समय गाजीपुर में सर्वे के काम में बिजी है। वह भी कम मतदान को भाजपा के लिए अच्छा नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यही ट्रेंड सातवे चरण के मतदान में भी रह गया तो भाजपा के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।