इस बार जातिवाद के भंवर में फंसा महाभारत का गवाह रहा हरियाणा, 9 दिग्गजों को विरासत बचाने की चुनौती
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इनके अलावा जो दूसरे उम्मीदवार अपनी राजनीतिक विरासत बचाने के लिए चुनाव मैदान में हैं, उनमें दिग्विजय चौटाला सोनीपत सीट, दुष्यंत चौटाला हिसार, श्रुति चौधरी भिवानी-महेंद्रगढ़, अर्जुन चौटाला कुरुक्षेत्र, राव इंद्रजीत गुरुग्राम, कुमारी शैलजा अंबाला, भव्य बिश्नोई हिसार और ब्रजेंद्र सिंह हिसार, शामिल हैं। प्रदेश में चल रही जातिवाद की लहर ने इन सभी उम्मीदवारों की जीत-हार के समीकरण बिगाड़ दिए हैं।
प्रदेश में विकास का कोई मुद्दा नहीं हैं। देश के दूसरे राज्यों में कहीं राहुल तो कहीं मोदी फैक्टर काम कर रहा है, लेकिन हरियाणा में ये दोनों ही नाम नहीं हैं। केवल पार्टी या उसके उम्मीदवार ही पीएम नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी का नाम ले रहे हैं, लेकिन आम जनता के बीच अगर इन दोनों नेताओं की बात की जाए तो ये दोनों कहीं नहीं ठहरते। खासतौर पर, जाट समुदाय के उम्मीदवार खुद को जातिवाद और आरक्षण के चक्रव्यूह में फंसा हुआ पा रहे हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अमित शाह जैसे धुरंधर नेता हरियाणा आकर चुनाव को मोदी-राहुल पर केंद्रित करने का भरसक प्रयास कर चुके हैं, लेकिन वे जातिवाद को दूर नहीं कर पाए। जातिवाद यानी जाट और नॉन जाट फैक्टर के चलते इस बार वे सीटें भी कड़े मुकाबले में फंस गई हैं, जिन्हें पहले बहुत सामान्य माना जाता था। जैसे, रोहतक सीट पर भूपेंद्र हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा जो कि पहले ही सांसद बनाने की हैट्रिक लगा चुके हैं। इस बार उन्हें भाजपा उम्मीदवार डॉ. अरविंद शर्मा की ओर से कड़ी टक्कर मिल रही है। यहां तक कि प्रियंका गांधी को दीपेंद्र के समर्थन में रोड शो निकालना पड़ा।
उसके बाद पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू भी यहां प्रचार के लिए आए हैं।जो स्थिति इस बार है, वैसी पहले कभी नहीं देखी गई। 2016 में आरक्षण के नाम पर हरियाणा में जो दंगे हुए, उसके बाद जाट और गैर-जाट के बीच फासला बढ़ता चला गया। राजनीतिक दलों ने दिखावे के लिए भाईचारा सम्मेलन आयोजित किया, लेकिन वह सब ढकोसला ही निकला। कहीं न कहीं राजनीतिक दलों ने भी जाट और नॉन जाट फैक्टर को ही आगे बढ़ा दिया। आज हालत यह है कि प्रदेश की दस साल तक कमान संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को अपनी सोनीपत सीट निकालने के लिए लोगों के सामने झुकना पड़ रहा है।
दस मई को गोहाना रैली में मंच पर भाषण देने के दौरान हुड्डा अलग से दूर आकर लोगों के सामने कई बार झुके। उन्होंने कहा, कि वे आरक्षण दंगों के आरोपियों को सजा दिलाकर रहेंगे। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि दंगों के पीछे पूर्व सीएम और उनकी पार्टी का हाथ था। हम सभी वर्गों को एक साथ लेकर आगे बढ़े हैं। नतीजा, लोग समझ गए हैं कि उनका असली हितैषी कौन है। कांग्रेस की पोल खुल चुकी है। 23 मई को आने वाले नतीजे बता देंगे कि कौन झूठ बोल रहा है और कौन सच।
भाजपा के अलावा बाकी सभी पार्टियों तक पहुंच रही है दंगों की आंच
2016 के दौरान आरक्षण के नाम पर जो दंगे हुए थे, उसके बाद भाजपा को गैर-जाटों की पार्टी बता दिया गया। हालांकि इससे पहले भी भाजपा को शहरी लोगों की पार्टी कहा जाता था। कांग्रेस और इनेलो ने आरोप लगाया था कि दंगों के पीछे भाजपा का हाथ है।
सीएम मनोहर लाल खट्टर ने 'हरियाणा एक, हरियाणवी एक' का नारा देकर इन आरोपों से पीछा छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके। आज स्थिति यह है कि प्रदेश में पंजाबी, ब्राह्मण, यादव, सैनी, ठाकुर, वैश्य और दूसरी पिछड़ी एवं अनुसूचित जातियां कहीं न कहीं अपने हितों को भाजपा के साथ सुरक्षित मान कर चल रही हैं।अब यह समीकरण भाजपा को भी अपने पक्ष में सही लग रहा है।
हरियाणा में जाटों की आबादी करीब 25 प्रतिशत है। अगर मौजूदा स्थिति को देखें तो जाटों की अधिकांश आबादी कांग्रेस, जजपा और इनेलो के साथ है। बाकी ज्यादातर जातियां भाजपा के साथ जाती दिख रही हैं। इसके चलते दिग्विजय चौटाला, दुष्यंत चौटाला, श्रुति चौधरी, अर्जुन चौटाला, राव इंद्रजीत, कुमारी शैलजा, भव्य बिश्नोई और ब्रजेंद्र सिंह जैसे दिग्गजों को अपनी राजनीतिक विरासत बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।
दिग्गजों में कौन किसे टक्कर दे रहा है, जानिये
रोहतक में दीपेंद्र हुडा के सामने भाजपा के अरविंद शर्मा हैं। करीब डेढ़ दशक के बाद कांग्रेस पार्टी को यह सीट बचाने के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है। मौजूदा केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह के बेटे ब्रजेंद्र सिंह को हिसार लोकसभा सीट से टिकट मिला है। यहां पर उनका मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल और भजनलाल के परिवार से होगा। दुष्यंत चौटाला जजपा से और भव्य बिश्नोई कांग्रेस से ब्रजेंद्र सिंह को टक्कर दे रहे हैं। कुमारी शैलजा के पिता चौ. दलबीर सिंह चार बार सांसद रहे हैं।
इनके सामने भाजपा के मौजूदा सांसद रत्नलाल कटारिया हैं। यहां पर मुकाबला कांटे का है। भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से पूर्व सीएम बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी मैदान में हैं। उन्हें भाजपा के उम्मीदवार धर्मवीर से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। अभय चौटाला के पुत्र अर्जुन चौटाला भी कुरुक्षेत्र सीट से भाग्य आजमा रहे हैं। इनके सामने भाजपा के नायाब सैनी हैं। अर्जुन की राह भी आसान नहीं बताई जा रही।
इन सभी दिग्गजों की सीटों पर जाट और नॉन जाट फैक्टर हावी है। इनमें से जो भी उम्मीदवार अपनी सीट निकालने में कामयाब होंगे, उन्हें चार माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी मिलना तय है। अगर भूपेन्द्र हुड्डा और दीपेन्द्र हुड्डा जीत जाते हैं तो आगामी विधानसभा चुनाव में हुड्डा ही केंद्र में होंगे।