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हिसार: भव्य बनाम दुष्यंत के बहाने देवी लाल बनाम भजन लाल की लड़ाई

Thu, 25 Apr 2019 12:11 PM IST
Trainee Trainee चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Thu, 25 Apr 2019 12:11 PM IST
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Lok Sabha Chunav 2019: Fight between two Lal of Haryana on Hisar Seat
Bhavya Bishnoi- Dushyant Chautala - फोटो : Amar Ujala

बात 30 साल पुरानी यानी 1989 की है। हरियाणा के मुख्यमंत्री देवी लाल को उप प्रधानमंत्री बनाया जा रहा था और मुख्यमंत्री की कमान दे दी गई उनके पुत्र ओम प्रकाश चौटाला को। प्रेस कांफ्रेंस में किसी ने देवी लाल से सवाल किया कि पार्टी में क्या कोई और नेता नहीं है कि आप परिवार के कुनबे से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं और अपने पुत्र को ही आगे बढ़ाने में लगे हैं। अपने अंदाज में देवी लाल ने कुछ ऐसा जवाब दिया, अपने छोरे को आगे न बढ़ांऊ तो थारे छोरे को बढाऊं क्या? तीस सालों में न केवल देवी लाल के पुत्र और पोते राज्य की राजनीतिक गलियारों में काफी सक्रिय रहे बल्कि बाकी दोनों 'लाल' यानी भजन लाल और बंसी लाल के वंशज भी लगातार राजनीति में सक्रिय रहे।

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इन तीनों लालों की आपसी प्रतिद्वंद्विता के बिना हरियाणा की राजनीति अधूरी है। इनकी प्रतिद्वंद्विता अगली पीढ़ी में भी पहुंची और फिर दूसरी से तीसरी पीढ़ी में। रविवार को इनकी प्रतिद्वंद्विता में एक और अध्याय जुड़ गया जब कांग्रेस के नेता और गैर जाटों के दिग्गज माने जाने वाले भजन लाल के पोते और कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई को कांग्रेस ने हिसार से टिकट दे दिया। उनका मुकाबला होगा देवी लाल के बेटे ओमप्रकाश चौटाला के पोते दुष्यंत चौटाला से, जिसे राजनीति पर नजर रखने वाले एक बड़ी लड़ाई की तरह देख रहे हैं।
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1982 विधानसभा चुनाव

खास तौर पर इसलिए भी क्योंकि दोनों परिवारों की प्रतिद्वंद्विता बड़ी और दिलचस्प हुआ करती थी। लोग अभी भी याद करते हैं साल 1982 के विधानसभा चुनाव जब भजन लाल की कांग्रेस पार्टी को 90 में से 35 सीटें मिली थी जबकि लोक दल के देवी लाल को 31 और बीजेपी जिसके साथ उनका गठबंधन था उनके पास छह सीटें थी। सरकार बनाने की कवायद तेज थी। जहां देवी लाल अकाली दल के अपने मित्र प्रकाश सिंह बादल की मदद से अपने विधायकों को हिमाचल के परवाणु शहर के पहाड़ों के बीच एक होटल में पहुंचा रहे थे वहीं भजन लाल अपने बीचक्राफ्ट जहाज से दिल्ली से आए और सीधे राज भवन पहुंचे। कुछ ही घंटों बाद भजन लाल मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले रहे थे।
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एक पूर्व आईएस अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि जाहिर है कि देवी लाल इससे बहुत आग बबूला हुए थे। उन्होंने बताया कि मुझे याद है अगले दिन यहां अखबारों में एक तस्वीर छपी थी जो मुझे अभी तक याद है। उस तस्वीर में देवी लाल का हाथ राज्यपाल जीडी तपासे की कमीज के कालर पर था जो सारी कहानी बयान कर रहा था। वे कहते हैं कि कुल मिला कर भजन लाल को हमेशा से एक चतुर नेता माना जाता था। उनका तरीका यह था कि विरोधियों को अपनी ओर करने के लिए उन्हें कोई फायदे का ओहदा दे देते थे। वे कहते थे कि अपने तो साथ में हैं ही, जरूरी है दुश्मनों को बस में करना।
 

बिश्नोई दो फीसदी से भी कम

वह कहते हैं कि शायद यही कारण है कि बिश्नोईयों की राज्य में संख्या दो प्रतिशत से भी कम है और इतना जातिवाद होने के बावजूद भजन लाल तीन बार मुख्यमंत्री बने। वहीं दूसरी ओर देवी लाल और फिर ऐसे ही ओम प्रकाश चौटाला अपने प्रतिद्वंद्वियों को न तो भूलते थे न ही खुश करने की कोशिश करते थे। देवी लाल दो बार और चौटाला चार बार मुख्यमंत्री बने। सवाल यह है कि क्या वही प्रतिद्वंद्विता फिर से दोनों परिवारों के युवा पीढ़ी के बीच में दिखने वाली है या फिर वक्त के साथ चीजें बदली हैं?

जेजेपी के दुष्यंत चौटाला ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि राजनीति में कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं होता तो भजन लाल के पोते को वो बस एक और उम्मीदवार की तरह ही ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां तो जो सबसे काबिल है वही रहता है। मेरे लिए वो एक ऐसी पार्टी (कांग्रेस) के उम्मीदवार हैं जिसने दस साल तक अपने राज में लोगों को बहुत लूटा। ठीक वैसे ही जैसे बीजेपी के उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह है जिनकी पार्टी ने लोगों को जातपात के नाम पर बांटने का काम किया। वैसे पिछले चुनाव में दुष्यंत ने भव्य के पिता कुलदीप बिश्नोई को हिसार में ही हराया था लेकिन भव्य का कहना है कि उनके सामने दुष्यंत कोई चुनौती नहीं हैं।

कौन हैं भव्य बिश्नोई

महज 26 वर्षीय भव्य ने बताया कि वो लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और फिर आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं। भव्य का छोटा भाई चैतन्य बिश्नोई क्रिकेटर हैं और आईपीएल में चेन्नई की टीम से खेलते है। उनकी एक छोटी बहन भी है। वे कहते हैं कि लोगों को उम्मीद थी कि दुष्यंत देश के सबसे युवा सांसद बने हैं पर वो कुछ कर ही नहीं पाए जिससे पूरा हिसार उनसे निराश है। पूछे जाने पर कि क्या अपने दादा भजन लाल जो गैर जाटों के 'आइकन' माने जाते थे, उन्हीं की तरह वो भी गैर जाटों के समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं, तो उन्होंने दावा किया कि मैं जात-पात में विश्वास नहीं करता और मुझे विश्वास है कि मुझे सभी लोगों से समर्थन मिलेगा।

वैसे रविवार को भव्य को टिकट मिलना काफी नाटकीय रहा। टिकट मिलने से पहले ही जिंदल हाउस ने भव्य के प्रत्याशी होने का एलान कर दिया था। पूर्व मंत्री और पार्टी की वरिष्ठ नेता सावित्री जिंदल ने दोपहर को ही इसके बारे में ट्वीट कर दिया जो सोशल मीडिया पर काफी फैला भी जबकि टिकट की सूची रात को जारी की गई। मुकाबला कठिन है। पिछली बार जीतने के बाद दुष्यंत अब तजुर्बेकार नेता हैं वहीं आईएएस छोड़ कर राजनीति में आए बीजेपी के बृजेंद्र सिंह एक सशक्त दावेदार हैं। जाहिर है कि राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले अपनी नज़रें खास तौर पर हिसार पर गड़ाए बैठे हैं।

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