गोपीनाथ मुंडे की 'बीड' में बेटी बचा पाएंगी गढ़ या एनसीपी मारेगी बाजी! पढ़ें पूरा सियासी समीकरण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण के तहत देश की 97 लोकसभा सीटों पर मतदान होने हैं। भाजपा के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे की सीट होने के कारण महाराष्ट्र की बीड लोकसभा सीट अहम मानी जाती है। महाराष्ट्र में मुख्यत: भाजपा-शिवसेना गठबंधन और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के बीच टक्कर है, लेकिन बीड की बात करें तो यहां से निर्दलीय समेत कुल 36 उम्मीदवार मैदान में हैं। बीड लोकसभा सीट पर 19,57,132 मतदाता हैं। इनमें से 10,39,789 पुरुष हैं और 9,17,343 महिलाएं हैं।
बीड सीट से भाजपा ने दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे को चुनाव मैदान में उतारा है। वह मौजूदा सांसद भी हैं। वहीं, उनके खिलाफ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(एनसीपी) की ओर से बजरंग मनोहर सोनवणे उम्मीदवार हैं। समाजवादी पार्टी के सैयद मुजम्मिल सैयद जमील और बहुजन आघाडी पार्टी के विष्णु जाधव भी मैदान में हैं। प्रीतम की बहन पंकजा महाराष्ट्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री हैं। वह गुड गवर्नेंस के दावे पर प्रीतम के लिए वोटिंग कैंपेन करती रहीं। वहीं, राज्य सरकार में नेता प्रतिपक्ष धनंजय मुंडे भी प्रीतम के रिश्तेदार हैं और एनसीपी उम्मीदवार के लिए उन्होंने ताकत झोंक दी है। ऐसे में यहां लड़ाई मुंडे बनाम मुंडे हो गई है।
पहले एक नजर आंकड़ों पर
2014 लोकसभा उपचुनाव:
| प्रीतम मुंडे, भाजपा
9,22,416 वोट |
अशोक राव पाटिल, कांग्रेस
2,26,095 वोट |
2014 लोकसभा चुनाव:
| गोपीनाथ मुंडे, भाजपा
6,35,995 वोट (35%) |
सुरेश रामचंद्र धास, एनसीपी
4,99,541 वोट(27%) |
2009 लोकसभा चुनाव:
| गोपीनाथ मुंडे, भाजपा
5,53,994 वोट(33%) |
रमेश बाबूराव कोकाते, एनसीपी
4,13,042 वोट(25%), |
2004 लोकसभा चुनाव:
| जयसिंहराव पाटिल, एनसीपी
4,25,051वोट(32%) |
सोलंकी प्रकाश सुन्दरराव, भाजपा
377,639 वोट(28%) |
गोपीनाथ मुंडे की मौत के बाद रिकॉर्ड मतों से जीती थीं प्रीतम
बीते 10 सालों के दौरान हुए तीन चुनावों से यह सीट भाजपा के पास है। 2009 लोकसभा चुनाव में एनसीपी नेता रमेश बाबूराव को हराकर गोपीनाथ मुंडे यहां से जीते थे। 2014 में एक बार फिर उन्होंने जीत हासिल की और नरेंद्र मोदी की सरकार में कैबिनेट गठन के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री की शपथ ली। दुर्योगवश नौ दिन बाद ही एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी बेटी प्रीतम जीतीं और सांसद बनीं। बीड लोकसभा के इतिहास में यह उनकी रिकॉर्ड मतों सें जीत थी।
छह में से पांच विधानसभा पर भाजपा का कब्जा
बीड लोकसभा क्षेत्र के तहत छह विधानसभा सीटें आती हैं। गेवराई, माजलगांव, आष्टी, कैज और परली विधानसभा सीटों पर भाजपा का वर्चस्व है, जबकि एकमात्र विधानसभा सीट बीड में एनसीपी विधायक हैं। पांच विधानसभा सीटों पर कब्जा होने के कारण भाजपा यहां से ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल करना चाहेगी। वहीं, एनसीपी भी एक बार फिर से 2009 से पहले वाला अपना इतिहास दोहराना चाहेगी।
इसके लिए कांग्रेस के साथ मिलकर एनसीपी ने खूब मेहनत भी की है। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार भी यहां 'वोटकटवा' की भूमिका में होंगे। 26 में से कुछ उम्मीदवार भाजपा का वोट काटेंगे तो वहीं कुछ एनसीपी का वोट फीसदी कम करेंगे। फिलहाल यहां चुनाव प्रचार थम चुका है और पूरी ताकत झोंक चुकी भाजपा और एनसीपी की निगाह अपने पक्ष में ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल करने की है।