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जैन शिकंजी पर लटका ताला......मकान किराए के लिए उपलब्ध है

Wed, 04 Nov 2020 11:11 PM IST
संजीव कुमार झा डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 04 Nov 2020 11:11 PM IST
सार

  • बाजार में दिखाई देने लगा है आर्थिक मंदी का असर
  • साढ़े तीन लाख किराया, बिजली का बिल, कर्मचारी खर्च निकालना मुश्किल
  • खाली हो रहे हैं किराए के रिहाईशी मकान और दुकानें

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Lock down in delhi,jain shikanji shut down in lockdown,
जैन शिकंजी(फाइल फोटो) - फोटो : social media

विस्तार

दिल्ली के विकास मार्ग पर जैन शिकंजी की यह फ्रेंचाइजी काफी चलती थी। कोविड-19 का संक्रमण, लॉकडाउन और लॉकडाउन के बाद बाजार खुलने के दो-तीन महीने के अंदर जैन शिकंजी की इस दुकान पर ताला लग गया। प्रबंधकों ने बताया कि मार्च 2020 तक अच्छी कमाई हो रही थी, लेकिन लॉकडाउन के बाद खर्च संभाल पाना भारी पड़ रहा था, लिहाजा बंद करना पड़ा। विकास मार्ग पर आगे बढि़ए तो भीड़-भाड़, ग्राहकों से भरे रहने वाले इस मार्ग पर हर 50-60 मीटर के अंतराल पर किराए के लिए उपलब्ध है....का बोर्ड टंगा मिल जाएगा।

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जैन शिकंजी की फ्रेंचाइजी लेने वाले प्रबंधकों का कहना है कि यह कोविड-19 संक्रमण के बाद पैदा हुई स्थिति का असर है। दुकान पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी उन्होंने उनके पैसे देकर जाने के लिए कह दिया और अब इसे नहीं चलाएंगे। वह बताते हैं कि बिजली और पानी के बिल में कोई कटौती नहीं की है। ऊपर से साढे़ तीन लाख रुपये महीने का किराया देना और फ्रेंचाइजी चलाना काफी मुश्किल हो गया था।
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दुकान पर सामान की आपूर्ति करने वाले बंटी चौहान का कहना है कि बाजार में अभी राशन, दवा, इलेक्ट्रॉनिक के सामान को छोड़कर काम नहीं है। हर रोज कामकाज के लिए घर से निकलने वाले रमेश यादव इटावा के हैं। रमेश का कहना है कि पिछले पांच साल से वह घर से 500 रुपये लेकर निकलते हैं थे हर दिन शाम को 12-1400 रुपये कमाकर घर से लौटते थे।
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अब स्थिति यह है कि वह 500 रुपये लेकर निकलते हैं, लेकिन घर 650-700 रुपये लेकर ही जा पा रहे हैं। जबकि खाना-पानी घर से लेकर निकलते हैं और दिन भर में कहीं नाश्ता या चाय नहीं पीते। लेकिन इस उम्मीद में मेहनत कर रहे हैं कि जल्द ही कामकाज पटरी पर लौट आएगा। रमेश कहते हैं कि जीना है तो जीवटता भी पालनी ही होगी। उनकी परेशानी यह भी है कि अक्तूबर से मकान मालिक ने किराया अब पूरा लेने का दबाव है और सितंबर का किराया अभी वह नहीं दे पाए हैं।

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