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संसद में सरकार पर एकजुट हो कर धावा बोलेगा विपक्ष, सत्र के पहले ही दिन हंगामा तय

Wed, 16 Nov 2016 07:22 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 16 Nov 2016 07:22 AM IST
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live Parliament  winter session  oppositions against demonetisation

संसद के बुधवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र के पहले ही नोट बंदी पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस, राजद, झामुमो, वाम दल, बसपा, टीएमसी, जदयू, एनसीपी समेत 13 दलों ने बैठक कर इस मुद्दे पर एक साथ सरकार पर धावा बोलने का मन बनाया है।

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नोट बंदी के कारण आम लोगों को हो रही तकलीफ पर विपक्षी दल एकजुट होकर सरकार को घेरने के पक्ष में तो हैं, मगर इन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई पसंद नहीं है। यही कारण है कि वाम दलों के बाद कांग्रेस ने भी ममता की अगुवाई में इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति से मुलाकात करने से मना कर दिया है। 
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हालांकि जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने सभी मुद्दों पर एकजुटता बनाने के लिए बुधवार को विपक्षी दलों की एक और बैठक बुलाने की घोषणा की है, जबकि ममता ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर किसी ने साथ नहीं दिया तो वह बुधवार को अकेले राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगी।
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नोट बंदी मामले में सरकार पर एक साथ धावा बोलने की रणनीति बनाने में जुटी कांग्रेस ने सोमवार के बाद मंगलवार को भी कई दलों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई। हालांकि इस बैठक में सपा, एआईएडीएमके और बीजेडी की अनुपस्थिति से सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने की योजना परवान नहीं चढ़ पाई। हालांकि जदयू अध्यक्ष सत्र शुरू होने से कुछ देर पहले बैठक से अनुपस्थित दलों को साधने की कोशिश करेंगे। 

पीएम मोदी ने मांगा विपक्ष का समर्थन

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सरकार ने भी नोट बंदी के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपना लिया है। सत्र से एक दिन पहले सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देशहित से जुड़ा फैसला बताते हुए विपक्ष का समर्थन मांगा है। पीएम ने नोट बंदी के फैसले को जरूरी बताया।

हालांकि बैठक में कई विपक्षी दलों ने आम लोगों को हो रही परेशानी और निर्णय लेने से पहले पर्याप्त तैयारी न करने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जाहिर की। कई विपक्षी दलों ने पहले ही दिन नोट बंदी पर चर्चा की मांग करते हुए दोनों सदनों में चर्चा का नोटिस दिया है। ऐसे में सत्र के पहले ही दिन इस मुद्दे पर सियासी कोहराम मचना तय है। माकपा के सीताराम येचुरी ने लोगों को हो रही परेशानी का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से पूरा देश बीते एक हफ्ते से सड़क पर है।

लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ हों : पीएम
इस बैठक में प्रधानमंत्री ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव को साथ साथ कराने केलिए विपक्ष का सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि देशहित में बार-बार चुनाव उचित नहीं है। इस कारण आदर्श आचार संहिता से देश का विकास प्रभावित होता है। पीएम ने विपक्ष से इस मामले में अपना मानस बनाने की अपील भी की।

देश में ऐसा एक भी व्यक्ति नहीं है जो इस फैसले से परेशान न हो। यह आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला है। कांग्रेस इस मुद्दे को पूरी ताकत से संसद में उठाएगी।

-'गुलाम नबी आजाद, नेता प्रतिपक्ष, राज्यसभा'

सरकार हर मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए तैयार है। किसी भी मुद्दे पर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। सरकार चाहती है कि संसद में सार्थक चर्चा हो। 

-वेंकैया नायडू, सूचना-प्रसारण मंत्री

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