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महबूबा ने सत्ता नहीं बड़े मकसद के लिए बनाई थी सरकार, अब्दुल्ला को है चुनाव का इंतजार

Tue, 19 Jun 2018 09:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 19 Jun 2018 09:31 PM IST
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Live news update on Jammu-Kashmir BJP-PDP breakdown, reactions and analysis

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को इस्तीफा देने के बाद कहा कि पीडीपी ने बड़े मकसद के लिए भाजपा से मिलकर सरकार बनाई थी। ये गठबंधन सत्ता के लिए नहीं था। महबूबा ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने रिस्क लेते हुए बड़े विजन के साथ गठबंधन किया। विकास का एजेंडा बढ़ाने, पाकिस्तान से बातचीत करने, राज्य के सभी दलों व लोगों से बातचीत कर कश्मीर में शांति बहाली के लिए गठबंधन किया।

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प्रेस वार्ता में महबूबा बोलीं- जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के साथ चार साल तक किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ नहीं होने दिया गया। 35 ए का मुद्दा भी उठाया गया और उसे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया गया। वहां भी जम्मू कश्मीर के लोगों का पक्ष रखा गया। कई लोगों में भ्रांतियां थीं कि राज्य टूटेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विकास के लिए विशेष पैकेज पाने, रमजान में सीजफायर कराने में पीडीपी सफल रही।
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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से बातचीत के द्वार खोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं लाहौर पहुंचे और बातचीत की अपील की। विकास कार्यों में भी तेजी आई। जम्मू में भाजपा और कश्मीर में पीडीपी को बहुमत मिला। जम्मू-कश्मीर के  लोगों की अपेक्षाओं को बरकरार रखने के लिए गठबंधन किया गया था। पीडीपी ने जम्मू और कश्मीर को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई है। इससे पहले महबूबा ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चार बजे बैठक बुलाई और इसके बाद शा पांच बजे सार्वजनिक तौर पर इस्तीफे की घोषणा की। 
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महबूबा ने कहा कि  पीडीपी का हीलिंग टच का एजेंडा रहा है। पाकिस्तान से और अंदर के लोगों से बातचीत होनी चाहिए। पीडीपी ने सुलह प्रक्रिया की पूरी कोशिश की। आगे भी बातचीत और सुलह प्रक्रिया की कोशिश जारी रहेगी। भाजपा के सत्ता में आने के बाद अल्पसंख्यकों में थोड़ा भय पैदा हुआ था। रसाना मामले को हल कर इस आशंका को दूर किया गया। पीडीपी कार्यकर्ताओं ने भरपूर सहयोग दिया।

अब और किसी से मिलकर सरकार नहीं बनाएंगे: महबूबा
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के बाद घोषणा की है कि वह किसी भी अन्य पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन सरकार नहीं बनाएंगी। तीन साल में जम्मू-कश्मीर की अलग पहचान बरकरार रखने के लिए पीडीपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। बाहुबल की नीति से कश्मीर समस्या का हल नहीं हो सकता है। बाहुबल से नहीं, प्यार से शांति बहाल हो सकती है।
राजनीति में कुछ भी हो सकता है

पीडीपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरताज मदनी ने कहा कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है। सरकार गिरती है और बनती है। अब भाजपा वालों ने सरकार से समर्र्थन से वापस लिया है तो  भाजपा ही वजह बता सकती है।

नेशनल कान्फ्रेंस वैकल्पिक सरकार नहीं बनाएगी: उमर

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Omar Abdullah
भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार के टूटने के संदर्भ में प्रमुख विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के उपप्रधान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नेकां मौजूदा परिदृश्य में वैकल्पिक सरकार नहीं बनाएगी। पूर्ण बहुमत न होने से नेकां 2014 में सरकार नहीं बना पाई और आज भी वैसे ही हालात हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी दल ने नेकां को पेशकश नहीं की है और न ही पार्टी ने ऐसी कोई पेशकश किसी दल से की है। जम्मू-कश्मीर में बदतर हालात में महबूबा मुफ्ती को खुद पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था, मगर बदकिस्मती से भाजपा ने उनकी कुर्सी के नीचे से अचानक कालीन खींच लिया है। राज्य में मौजूदा हालात में भाजपा के लिए भी यह फैसला मजबूरी बना है। 

राजभवन श्रीनगर में राज्यपाल एनएन वोहरा से मुलाकात करके लौटे उमर ने पत्रकारों से कहा कि राज्य में अगर किसी भी दल के पास हुकूमत बनाने का बहुमत नहीं है तो राज्यपाल शासन लगना तय है। राज्यपाल धीरे-धीरे खराब हालात को दुरुस्त बनाने के साथ आगामी चुनाव के लिए माहौल सामान्य बनाने पर काम करें। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में सामान्य हालात और शांतिपूर्ण माहौल बनाने के लिए नेकां राज्यपाल को पूरा योगदान देगी। जम्मू-कश्मीर की अवाम को अपने भविष्य को चुनने का पूरा अधिकार है। चुनाव के सभी नतीजों को नेकां कबूल करेगी।

गठबंधन टूटने के सवाल पर उमर ने कहा कि राज्य में बदतर हालात के मुताबिक यह पहले से तय लग रहा था कि लेकिन इस साल इतनी जल्द यह घटनाक्रम हो जाएगा इसकी उम्मीद कम थी। गठबंधन टूटने के लिए शायद पीडीपी ज्यादा जिम्मेदार है। सरकार की गलत नीतियों से हर तबका प्रभावित हुआ है। अवाम का सरकार से विश्वास टूटा है। उन्होंने कहा कि हमें मौजूदा परिदृश्य पर जश्न नहीं मनाना चाहिए। यह जम्मू-कश्मीर के लोकतंत्र को झटका है। राज्यपाल एनएन वोहरा पिछले दस साल से जम्मू-कश्मीर को देख रहे हैं और उम्मीद है कि वह दोबारा ऐसे हालात को बेहतर बनाने पर अच्छा काम करेंगे। पीडीपी का सत्ता के साथ प्यार रहा है। जब दिल्ली में अमित शाह ने अचानक भाजपा प्रदेश नेतृत्व की बैठक बुलाई थी तभी महबूबा मुफ्ती को इस्तीफा दे देना चाहिए था। पिछले डेढ़ माह में पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या, बार्डर पर खराब हालात आदि से माहौल अधिक बिगड़ा।
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