राजनीति में ‘बदला’राज: बग्गा मामले की तर्ज पर जब पंजाब ने रोका बंसीलाल का रास्ता, मिला था ऐसा करारा जवाब
1996 में बंसीलाल, चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उनके तीसरे कार्यकाल में पंजाब के नेताओं ने एसवाईएल विवाद के संदर्भ में चौ. बंसीलाल को लेकर एक टिप्पणी की थी। इसमें कहा गया था कि हरियाणा से किसी को चंडीगढ़ आना है तो उसे पंजाब से होकर जाना पड़ता है। अब वे इस रास्ते को बंद कर सकते हैं...
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भाजपा नेता तजिंदर बग्गा की गिरफ्तारी का मामला गरमा गया है। पंजाब पुलिस ने बग्गा को दिल्ली से गिरफ्तार किया। जब उन्हें मोहाली 'पंजाब' ले जाया जा रहा था तो बीच रास्ते में कुरुक्षेत्र के पास हरियाणा पुलिस ने पंजाब पुलिस की गाड़ियां रोक दीं। बग्गा को नीचे उतार लिया गया। थोड़ी देर में दिल्ली पुलिस, कुरुक्षेत्र पहुंची और बग्गा को वापस ले आई। पंजाब पुलिस के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर लिया गया। लेकिन ऐसा ही एक किस्सा हरियाणा में पहले भी हो चुका है। उसमें मुख्य किरदार तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल और पंजाब के नेता रहे थे।
सत्तर-अस्सी के दशक में सतलुज-युमना लिंक नगर (एसवाईएल) नहर खुदाई का विवाद जोरों पर था। पंजाब के नेताओं ने सीएम बंसीलाल पर टिप्पणी की थी कि हम आपको चंडीगढ़ नहीं आने देंगे। तब हरियाणा से चंडीगढ़ जाने का मुख्य रास्ता पंजाब से होकर गुजरता था। चौ. बंसीलाल ने रातोंरात सड़क बनवा दी थी, जो हरियाणा से सीधे पंचकुला होते हुए चंडीगढ़ जाती थी। इस बाबत बंसीलाल ने पंजाब के नेताओं से कहा था, हम तो चंडीगढ़ पहुंच जाएंगे, अब तुम दिल्ली जाकर दिखाओ।
पंचकुला से सीधे चंडीगढ़ जाती थी सड़क
प्रदेश के राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, एसवाईएल नहर मुद्दा दशकों तक हरियाणा व पंजाब के बीच विवाद का कारण बना रहा है। चौ. बंसीलाल, चार बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे। 1967 में बंसीलाल पहली बार सीएम बने थे। 1972 में बंसीलाल दोबारा मुख्यमंत्री बन गए। 1985 में बंसीलाल ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद 1996 में बंसीलाल, चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उनके तीसरे कार्यकाल में पंजाब के नेताओं ने एसवाईएल विवाद के संदर्भ में चौ. बंसीलाल को लेकर एक टिप्पणी की थी। इसमें कहा गया था कि हरियाणा से किसी को चंडीगढ़ आना है तो उसे पंजाब से होकर जाना पड़ता है। अब वे इस रास्ते को बंद कर सकते हैं।
चौ. बंसीलाल ने उनकी इस टिप्पणी का करारा जवाब दे दिया। रातोंरात चंडीगढ़ जाने के लिए एक नया रास्ता तैयार किया गया। ऐसा रास्ता जो सीधे हरियाणा से चंडीगढ़ जा रहा था। पहले किसी को हरियाणा से चंडीगढ़ जाना होता, तो वह मुख्य हाईवे का इस्तेमाल करता था। यह हाईवे अंबाला के बाद पंजाब के जीरकपुर से होते हुए चंडीगढ़ पहुंचता था। पंजाब के नेताओं ने कहा था, हरियाणा के मुख्यमंत्री को पंजाब की धरती से होकर राजधानी चंडीगढ़ नही जाने दिया जाएगा। यमुनानगर से नारायणगढ़, रामगढ़ और बरवाला होते हुए एक सड़क पंचकुला तक तैयार कर दी गई। पंचकुला से चंडीगढ़ जाने के लिए पंजाब की सीमा से गुजरने की जरुरत नहीं पड़ती। वहां से सीधे चंडीगढ़ पहुंचा जा सकता था। इसके बाद चौ. बंसीलाल ने पंजाब के नेताओं से कहा, अब तुम दिल्ली जाकर दिखाओ। चूंकि उस वक्त पंजाब से दिल्ली जाने के लिए हरियाणा पार करना जरूरी था। आज भी पंजाब से दिल्ली जाने का रास्ता हरियाणा से ही गुजरता है। यह बात दोनों राज्यों के लोगों में खासी चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि बाद में दोनों राज्यों ने व्यवहारिक तौर पर किसी का रास्ता नहीं रोका।