आतंकी अभियानों में सेना की आंख-कान बनेंगे कुत्ते, यह नई डिवाइस होगी मददगार
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भारतीय सेना ने एक नए ऑडियो-वीडियो सर्विलांस डिवाइस का निर्माण किया है, जिसकी मदद से वह अपने सैनिक कुत्तों को आतंक विरोधी अभियानों में ‘आंख-कान’ की तरह इस्तेमाल कर पाएगी। सेना की 26 आर्मी डॉग यूनिट की तरफ से विकसित इस डिवाइस को बुलेटप्रूफ जैकेट में लगाया गया है, जिसे प्रशिक्षित कुत्तों को पहनाया जा सकता है। ये सैनिक कुत्ते अभियानों के दौरान आगे जाकर सुरक्षा बलों को हालात की रियल टाइम ऑडियो व वीडियो जानकारी उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा भी इनका इस्तेमाल आतंकियों के ठिकाने तलाशने वाले जासूस की तरह किया जा सकेगा।
इस डिवाइस को डॉग यूनिट के वेटनरी सर्जन लेफ्टिनेंट कर्नल वी. कमलराज ने तैयार किया है। लेफ्टिनेंट कर्नल कमलराज के मुताबिक, इस जैकेट को पहनने वाले कुत्ते की डिवाइस करीब एक किलोमीटर या 500 मीटर के दायरे में मौजूद ट्रांसमीटर से जुड़ी होगी। डिवाइस से वीडियो व आवाज ट्रांसमीटर के जरिये सीधे सुरक्षा बलों को पहुंचेंगे। इसके लिए किसी तरह के इंटरनेट संपर्क की आवश्यकता नहीं होगी।
इससे किसी भी आतंकी ठिकाने पर आतंकी कहां-कहां मौजूद हैं, सतर्कता की स्थिति क्या है, किस तरह के हथियार हैं आदि जानकारी सुरक्षा बलों को मिल जाएगी और वे अपनी पुख्ता योजना तैयार कर पाएंगे। लेफ्टिनेंट कर्नल कमलराज के मुताबिक, इससे अभियानों में सैनिकों की शहीद होने की संभावना कम हो जाएगी। जैकेट के बुलेटप्रूफ होने से सैनिक कुत्ते के घायल या शहीद होने की संभावना भी नहीं के बराबर होगी। साथ ही प्रशिक्षित होने के कारण ये कुत्ते एक सैनिक की तरह आतंकियों पर हमला कर उन्हें दबोचने का भी काम कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर में किया जा चुका है परीक्षण
लेफ्टिनेंट कर्नल कमलराज के मुताबिक, इस डिवाइस को गहन शोध के बाद तैयार किया गया है और जम्मू-कश्मीर में इसका आतंकी अभियानों के दौरान सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने इन अभियानों का ब्योरा नहीं दिया।
अमेरिका समेत कई देशों में हैं ऐसी डॉग यूनिट
अमेरिका की कुछ आतंक निरोधी संस्थाओं समेत दुनिया में कई देशों की के-9 (सैन्य कुत्तों वाली) यूनिट अपने कुत्तों पर इस तरह कैमरा लगाकर जानकारियां जुटा रही हैं। ब्रिटेन की स्टेफर्डशायर पुलिस अपने कुत्तों के सिर पर कैमरा लगाकर अपराधियों की गतिविधियां रिकॉर्ड करती है, तो डरहम पुलिस भी ‘के-9 कैम’ का इस्तेमाल करती है। अमेरिका की पोर्टलैंड पुलिस ने भी पिछले साल अपनी के-9 यूनिट में इस तरह के कैमरों को लेकर परीक्षण किया था।