फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Level of success is decided by hard work and commitment to profession, not by exam score: CJI Gavai

CJI: सीजेआई बीआर गवई ने साझा किए छात्र जीवन के अनुभव, बोले- परीक्षा के अंकों से तय नहीं होती सफलता

Sat, 23 Aug 2025 05:51 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 23 Aug 2025 05:51 PM IST
सार

CJI: सीजेआई बी. आर. गवई ने कहा कि सफलता परीक्षा के अंकों से नहीं, बल्कि मेहनत, संकल्प और पेशे के प्रति समर्पण से तय होती है। उन्होंने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह कक्षाएं छोड़ते थे। उन्होंने छात्रों को नई कानूनी शिक्षा व्यवस्था का पूरा लाभ उठाने और मेहनत से आगे बढ़ने की सलाह दी।

विज्ञापन
Level of success is decided by hard work and commitment to profession, not by exam score: CJI Gavai
मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

चीफ जस्टिस (सीजेआई) बी. आर. गवई ने शनिवार को कहा कि किसी की पेशेवर सफलता का स्तर परीक्षा के अंक से नहीं, बल्कि संकल्प, मेहनत, समर्पण और काम के प्रति प्रतिबद्धता से तय होता है। उन्होंने याद किया कि वह पढ़ाई में होनहार थे, लेकिन वह कक्षाएं छोड़ देते थे। सीजेआई वी. एम. सालगावकर लॉ कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कानूनी शिक्षा व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव आया है।
विज्ञापन


उन्होंने छात्रों से कहा कि परीक्षा में रैंक देखकर अपना निर्णय नहीं लेना चाहिए क्योंकि ये परिणाम यह नहीं बताते कि आपकी सफलता का स्तर क्या होगा। जो मायने रखता है, वह है आपका संकल्प, मेहनत, समर्पण और पेशे पर आपकी प्रतिबद्धता। सीजेआई गवई ने बताया कि वह होनहार छात्र थे, लेकिन कक्षाएं छोड़ते थे। उन्होंने हंसते हुए आगे कहा, लेकिन हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: विपक्षी उम्मीदवार रेड्डी बोले- खतरे में सविधान, दो विचारधाराओं की लड़ाई है उपराष्ट्रपति चुनाव
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि जब वह मुंबई के सरकारी लॉ कॉलेज में पढ़ते थे, तो वह अक्सर कक्षाएं छोड़कर कॉलेज की दीवार पर बैठ जाते थे और उनके दोस्त वहां उनकी उपस्थिति (अटेंडेंस) दर्ज कर देते थे। उन्होंने आगे कहा कि कानूनी अंतिम वर्ष में मुझे अमरावती जाना पड़ा क्योंकि मेरे पिता महाराष्ट्र विधान परिषद के अध्यक्ष थे। उस समय मुंबई में हमारा घर नहीं था। अमरावती में मैंने शायद छह बार ही कॉलेज गया था। मेरे एक दोस्त मेरी उपस्थिति दर्ज कर देते थे, जो बाद में हाईकोर्ट के जज बने।


सीजेआई गवई ने बताया कि उनके पिता दिवंगत आर. एस. गवई रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई) के संस्थापक थे और 1978 से 1982 तक महाराष्ट्र विधान परिषद के अध्यक्ष रहे। बाद में वह बिहार, सिक्किम और केरल के राज्यपाल भी बने।

ये भी पढ़ें: रेल नेटवर्क से जुड़ने जा रहा मिजोरम; सितंबर में पीएम मोदी करेंगे बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन

उन्होंने यह भी कहा कि परिणाम सूची में प्रथम स्थान पर रहने वाला छात्र आपराधिक मामलों का वकील बना, जबकि दूसरा हाईकोर्ट का जज। तीसरा मैं था, जो अब भारत का चीफ जस्टिस हूं। उन्होंने कहा कि वह कॉलेज गए बिना तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन किताबें पढ़ते रहे और पांच वर्ष के परीक्षा पत्र हल किए। उन्होंने छात्रों से कहा, अब आप सौभाग्यशाली हैं कि पांच वर्षीय पाठ्यक्रम के आने से कानूनी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed