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उड़ी हमलाः 'घर का भेदी' कौन? जांच एजेंसी की नजर 11 दुकानदारों पर
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 22 Sep 2016 11:05 AM IST
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- फोटो : Amar Ujala
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उड़ी आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की नजर करीब 11 स्थानीय दुकानदारों पर है। इन दुकानदारों में एक मोबाइल फोन रिटेलर भी शामिल है जिसने हमले में शहीद हुए 6 जवानों को सिम कार्ड बेचे थे।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले से ठीक पहले शनिवार को मोबाइल रिटेलर ने सामान्य से 3 घंटे अधिक तक दुकान खोले रखी थी। कुछ घंटों बाद रविवार को तड़के जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने आर्मी कैंप पर हमला किया। यह दुकानदार रोजाना करीब साढ़े छह बजे दुकान बंद कर देता था लेकिन उस दिन दुकान को देर तक खोला गया।
आर्मी कैंप के गेट पर मिलिट्री पुलिस पर आने-जाने वालों का समय आदि दर्ज करने के लिए रजिस्टर बनाया गया है। एजेंसी को सूचना देने वाले एक शख्स का कहना है, 'हालांकि वह यहां पुराना आदमी है उसने हाल में जवानों को सिम कार्ड भी दिए थे। हमले से ठीक पहले ही रात वह करीब 10 तक दुकान बंद करके नहीं गया, यह बेहद असामान्य है। उससे अब पूछताछ की जाएगी।'
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले से ठीक पहले शनिवार को मोबाइल रिटेलर ने सामान्य से 3 घंटे अधिक तक दुकान खोले रखी थी। कुछ घंटों बाद रविवार को तड़के जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने आर्मी कैंप पर हमला किया। यह दुकानदार रोजाना करीब साढ़े छह बजे दुकान बंद कर देता था लेकिन उस दिन दुकान को देर तक खोला गया।
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आर्मी कैंप के गेट पर मिलिट्री पुलिस पर आने-जाने वालों का समय आदि दर्ज करने के लिए रजिस्टर बनाया गया है। एजेंसी को सूचना देने वाले एक शख्स का कहना है, 'हालांकि वह यहां पुराना आदमी है उसने हाल में जवानों को सिम कार्ड भी दिए थे। हमले से ठीक पहले ही रात वह करीब 10 तक दुकान बंद करके नहीं गया, यह बेहद असामान्य है। उससे अब पूछताछ की जाएगी।'
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आतंकियों को थी कैंप की भीतरी जानकारी
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- फोटो : PTI
जिन 11 दुकानदारों से पूछताछ की जा रही है उनमें स्कूल और आर्मी यूनिफॉर्म बेचने वाले, किराने का सामान बेचने वाले शामिल हैं। इसके अलावा जांच एजेंसी को कुछ और दुकानदारों की तलाश है जो मोबाइल एसेसरीज बेचने का काम करते हैं।
बताया जा रहा है कि आतंकियों को यह भी पता था कि कैंप के भीतर ब्रिगेड कमांडर का दफ्तर और कार्यालय कहां है। एलओसी से सुखदर गांव होते हुए उड़ी पहुंचने के रास्ते की भी जांच की जा रही है। गांव और ब्रिगेड मुख्यालय के बीच स्थित जंगल की वजह से आंतकियों को मदद मिली होगी।
बताया जा रहा है कि आतंकियों को यह भी पता था कि कैंप के भीतर ब्रिगेड कमांडर का दफ्तर और कार्यालय कहां है। एलओसी से सुखदर गांव होते हुए उड़ी पहुंचने के रास्ते की भी जांच की जा रही है। गांव और ब्रिगेड मुख्यालय के बीच स्थित जंगल की वजह से आंतकियों को मदद मिली होगी।