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खुलासा: गिरफ्तार वामपंथी विचारकों की कई शिक्षण संस्थानों में माओवादी विचारधारा फैलाने की थी योजना

Sun, 02 Sep 2018 02:35 AM IST
गुंजन कुमार, नई दिल्ली
गुंजन कुमार, नई दिल्ली Updated Sun, 02 Sep 2018 02:35 AM IST
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leftist thinkers plan to spread maoist ideology in many educational institutions
भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किए गए पांच लोग

पुणे पुलिस के हाथों गिरफ्तार माओवाद समर्थक कार्यकर्ताओं और उनकी संस्थाओं की जांच में एक नया खुलासा हुआ है। मामले की जांच कर रही खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि इन लोगों की योजना देश के  करीब 35 शिक्षक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों से नए छात्र छात्राओं को माओवादी विचारधारा के लिए तैयार करना है।

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साथ ही इनका मकसद विश्वविद्यालयों और संस्थानों में मजबूत हो रहे दक्षिणपंथी विचारधारा और उससे संबंधित राजनीतिक गतिविधियों की काट तैयार करना भी है। इसके लिए एससी-एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र छात्रा खास निशाने पर हैं।  
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खुफिया एजेंसी के शीर्ष अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि गिरफ्तार कार्यकर्ताओं के कंप्यूटर से करीब 30 जीबी डाटा निकाला गया। इसकी जांच से पता चला है कि शिक्षण संस्थानों में वामपंथ और माओवाद विचारधारा को नए सिरे से फैलाने की व्यापक योजना है। इन जांच के कई अन्य खुलासे को पुणे पुलिस ने सार्वजनिक भी किया है।  
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सूत्रों के मुताबिक खासतौर पर दक्षिण भारत के कुछ शिक्षण संस्थानों से नक्सलवाद और माओवादी गतिविधी के लिए युवकों की खासी बहाली होती थी। उस दौरान पढ़े लिखे युवक माओवाद से प्रभावित हो कर जंगलों में नक्सलियों का हाथ थामते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों से इनकी संख्या में काफी कमी आई है। दिल्ली, मुंबई, पुणे समेत उत्तर भारत के संस्थानों में यह कार्यकर्ता लंबे समय से ऐसे युवकों को लुभाने की कोशिश में हैं। सूत्रों ने बताया कि खासतौर पर पिछले चार साल में विश्वविद्यालयों और संस्थानों में दक्षिणपंथी विचारधारा ने पैठ बनाई है। इससे वामपंथी और माओवादी खासे चिंतित हैं।  

खुफिया विभाग के मुताबिक हाल में गिरफ्तार इन कार्यकर्ताओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश की पुलिस थ्यौरी में दम नहीं। इनकी ऐसी क्षमता बिल्कुल नहीं कि वह शहरी इलाकों में प्रधानमंत्री तो क्या किसी भी राजनेता की हत्या कर सकें।  


सूत्रों ने बताया कि शिक्षण संस्थानों से युवकों को माओवादी विचारधारा के लिए तैयार करने की इनकी योजना को कानूनी तौर पर अपराध साबित करना काफी मुश्किल है। इनकी अन्य गतिविधियां भी कानूनी तौर पर अपराध की श्रेणी में नहीं आता। यही वजह है कि वरवर राव, साईनाथ और कोबाद गांधी जैसे लोग गिरफ्तारी के बाद आसानी से छूट जाते हैं। 

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