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पहली से आठवीं कक्षा का लर्निंग आउटकम इंडिकेटर सार्वजनिक हुआ
अमर उजाला ब्यूरो/नई दिल्ली
Updated Wed, 01 Feb 2017 04:30 AM IST
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पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए पहली बार तैयार लर्निंग आउटकम का इंडिकेटर पब्लिक डोमेन (सार्वजनिक) में डाल दिया गया है। अब शिक्षाविद, अभिभावक समेत आम लोग लर्निंग आउटकम के इंडिकेटर पर अपने सुझाव दे सकते हैं। सुझावों के आधार पर आगे संशोधन के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय इसे अप्रैल सत्र से देश भर के स्कूलों में लागू करेगा।
सूत्रों के मुताबिक, पब्लिक डोमेन में लर्निंग आउटकम के इंडिकेटर के कुल 126 पेज में उसकी जानकारी दी गई है, जो कि कुल आठ विषयों अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, गणित, एनवायरमेंटल साइंस, साइंस व सोशल साइंस में सुधार के लिए है। इसमें लिखा है कि अंग्रेजी, हिंदी व उर्दू विषय में छात्रों को लिखने, पढ़ने, बोलने समझने में सक्षम बनाना है। इसके अलावा लर्निंग आउटकम में कक्षा व उम्र के आधार पर बच्चे में लिखने, पढ़ने, समझने और बोलने की क्षमता को भी परखा जाएगा ताकि उसी के आधार पर उसे विशेष कोचिंग मुहैया करवाई जा सके। लोगों के सुझाव के आधार पर संशोधन के बाद इस इंडिकेटर को लॉ मिनिस्ट्री के पास भेजा जाएगा, ताकि आरटीई एक्ट में बदलाव किया जा सके।
बता दें कि आरटीई एक्ट के तहत नो डिटेंशन पॉलिसी लागू होने के बाद से विभिन्न राज्यों से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई में गुणवत्ता की शिकायत आ रही थी। कैब कमेटी की बैठक में भी विभिन्न राज्यों के शिक्षा प्रतिनिधियों ने यह मुद्दा उठाया था। कमेटी के सुझाव पर मंत्रालय ने यह कदम उठाया है।
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सूत्रों के मुताबिक, पब्लिक डोमेन में लर्निंग आउटकम के इंडिकेटर के कुल 126 पेज में उसकी जानकारी दी गई है, जो कि कुल आठ विषयों अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, गणित, एनवायरमेंटल साइंस, साइंस व सोशल साइंस में सुधार के लिए है। इसमें लिखा है कि अंग्रेजी, हिंदी व उर्दू विषय में छात्रों को लिखने, पढ़ने, बोलने समझने में सक्षम बनाना है। इसके अलावा लर्निंग आउटकम में कक्षा व उम्र के आधार पर बच्चे में लिखने, पढ़ने, समझने और बोलने की क्षमता को भी परखा जाएगा ताकि उसी के आधार पर उसे विशेष कोचिंग मुहैया करवाई जा सके। लोगों के सुझाव के आधार पर संशोधन के बाद इस इंडिकेटर को लॉ मिनिस्ट्री के पास भेजा जाएगा, ताकि आरटीई एक्ट में बदलाव किया जा सके।
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बता दें कि आरटीई एक्ट के तहत नो डिटेंशन पॉलिसी लागू होने के बाद से विभिन्न राज्यों से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई में गुणवत्ता की शिकायत आ रही थी। कैब कमेटी की बैठक में भी विभिन्न राज्यों के शिक्षा प्रतिनिधियों ने यह मुद्दा उठाया था। कमेटी के सुझाव पर मंत्रालय ने यह कदम उठाया है।
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