लॉकडाउन के दौरान बढ़ी बाल उत्पीड़न की घटना, वकीलों ने लिखी मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 12 Apr 2020 07:34 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

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कोरोना वायरस को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से देशभर में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान बच्चों के कथित उत्पीड़न के मामलों में आई तेजी ने भी परेशानी बढ़ा दी है। ऐसे में देश के मुख्य न्यायाधीश एस.ए.बोबडे को दो वकीलों ने एक पत्र लिखकर आग्रह किया गया है कि देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान बच्चों के उत्पीड़न में हुई बढ़ोतरी का संज्ञान लिया जाए। 
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दरअसल वकील सुमीर सोढ़ी और आरजू अनेजा की तरफ से मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि बंद के दौरान जहां अपराध की दर में कमी आई है, वहीं बच्चों के उत्पीड़न और उनसे हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्र में कहा गया है, ‘‘आम तौर पर जब परिस्थितियां सामान्य होती हैं तब उत्पीड़न के शिकार बच्चों को घर में रहना सुरक्षित नहीं माना जाता है, क्योंकि उन्हें अपने ही परिवार के सदस्यों से और उत्पीड़ित होना पड़ सकता है। ऐसे में लॉकडाउन के दौरान इन बच्चों के लिए खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि वे घर से बाहर नहीं जा पाएंगे। लॉकडाउन के चलते उनका समर्थन नेटवर्क भी बंद हो गया है, जिससे पीड़ित बच्चों को मदद पाने या बच निकल कर भागना भी मुश्किल हो गया है।’’ 
पत्र में आगे कहा गया है कि लॉकडाउन के कारण भारत में बाल उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ चुकी हैं। वकीलों की तरफ से कहा गया है कि इस संकट की घड़ी में अगर पीड़ित बच्चों के सहयोग और सुरक्षा के लिए अगर तुरंत कदम नहीं उठाए जाते हैं तो ऐसी घटनाएं आने वाले समय में और भी बढ़ती जाएंगी।

वकीलों ने यह भी बताया कि उनका यह पत्र मीडिया में छपे लेखों पर आधारित है। लेख में बताया गया है कि बाल उत्पीड़न के मामलों की काफी शिकायतें हॉटलाइन पर आ रही हैं। ऐसे में लॉकडाउन के दौरान चाइल्डलाइन इंडिया हेल्पलाइन पर पिछले कुछ दिनों में 92 हजार से अधिक फोन कॉल कर बच्चों को उत्पीड़न और हिंसा से बचाने की गुहार लगाई जा चुकी है। 

पत्र में कहा गया है, ‘‘अदालत से आग्रह है कि कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुए हालातों में बच्चों की सुरक्षा का स्वत: संज्ञान लिया जाए।’’
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