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लॉकडाउन का असर : सब्जी बेचने और डिलिवरी बॉय का काम करने को मजबूर वकील
Sun, 16 Aug 2020 06:05 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sun, 16 Aug 2020 06:05 PM IST
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लॉकडाउन की वजह से वकील बेच रहे हैं सब्जी
- फोटो : Flickr
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देश में वकालत का कानून एक बार वकील बनने के बाद किसी दूसरे व्यापार या नौकरी को करने की आज्ञा नहीं देता है। लेकिन, कोर्ट में आंशिक रूप से कार्यवाही और लॉकडाउन के दौरान कमाई न होने की वजह से कई वकील मजबूरन सब्जी बेचने या डिलिवरी बॉय का काम कर रहे हैं।
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पेशे से वकील आदित्य कश्यप (बदला हुआ नाम) के परिवार में छह लोग रहते हैं। उनका लालन-पालन करने के लिए आदित्य को मजबूरी में सब्जी बेचने का काम करना पड़ रहा है। आदित्य जैसे और भी कई स्वतंत्र वकील हैं जो वकालत छोड़ कोई दूसरा काम कर रहे हैं। कुछ ऑटो चला रहे हैं तो कुछ डिलिवरी बॉय बन गए हैं।
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बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ललित भसिन ने बताया कि देश में लगभग 12 लाख वकील हैं और इनमें 95 फीसदी वकील स्वतंत्र तौर पर जिला कोर्ट में काम करते हैं। लॉकडाउन की घोषणा के बाद कोर्ट ने फैसला किया कि सिर्फ जरूरी मामलों पर ही कोर्ट में सुनवाई होगी और बाकी मामलों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जाएगी।
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छोटे वकीलों की कमाई मामलों पर निर्भर करती है, वो जितने मामलों की सुनवाई करेंगे उनकी उतनी ही कमाई होगी लेकिन वरिष्ठ वकीलों की आय तय होती है। देश में ज्यादातर वकील जिला कोर्ट या निम्न कोर्ट में वकालत करते हैं। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि कश्यप कोर्ट में अतिरिक्त काम करता था जैसे- प्रॉपर्टी की रिटर्न के लिए आवेदन भरना, जमानत की याचिका और वॉरेन्ट्स को रद्द करना।
कश्यप ने बताया कि सारा काम कैश पर होता है। कभी-कभी ऐसा होता था कि आधे घंटे में वो एक हजार रुपये कमा लेता था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से पुलिस ज्यादा अपराधी नहीं पकड़ रही है और इससे कोर्ट में रिमांड एप्लीकेशन की संख्या कम हो गई है।
कश्यप बताते हैं कि शुरू के दो महीने वो और उनके परिवार ने बचत पर काम चला लिया, इसके बाद कुछ दोस्तों से उधार लिया। आखिर में मुझे अपनी पत्नी के गहने बेचने पड़े। इसके अलावा घर का किराया निकालना होता है, बच्चों की पढ़ाई की फीस देनी होती है। हालांकि सब्जी के ढेले से ज्यादा कमाई नहीं होती लेकिन खाना खाने तक के पैसे मिल जाते हैं।
वरिष्ठ वकील के लिए ड्राफ्टिंग का काम करने वाले एक जूनियर वकील ने कहा कि लोकल ट्रेन बंद हो जाने के बाद से कोर्ट कर जाना मुश्किल हो गया था। अभी वो एक ई-कॉमर्स कंपनी में डिलिवरी बॉय का काम कर रहा है। बैंक भी लोन नहीं दे रहे हैं। उसने बताया कि गुजरात के बार काउंसिल ने अपने वकीलों को दूसरा काम करने की अनुमति दे दी है।
लेकिन महाराष्ट्र और गोवा के बार काउंसिल का कहना है कि अगर वकालत के अलावा कोई और काम करना है तो इसके लिए अपनी सनद यानि की प्रैक्टिस का लाइसेंस त्यागना होगा। इसके अलावा एक महिला वकील भी हैं, जो चेक बाउंसिंग और तलाक के म्यूचुअल कंसेंट जैसे मामलों को देखा करती थी, अब किसी निजी कंपनी में कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर काम कर रही हैं।
महिला वकील ने बताया कि इस नई नौकरी से उन्हें महीने का 25,000 रुपया मिलता है, जो कि पिछली कमाई से काफी कम है। इससे पहले वो महीने का एक लाख रुपया कमा लेती थी, लेकिन नौकरी करने से उनका समय कट जाता है और कुछ पैसे घर आ जाते हैं।
कश्यप ने बताया कि महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल ने दो अवसर पर उन वकीलों को राशन मुहैया कराया, जो बुरे वक्त से गुजर रहे थे। एक राशन किट से 15 दिन का काम चल जाता था। कुछ वकीलों का मानना है कि कोर्ट में कार्यवाही दोबारा शुरू करने के बाद ही स्थिति ठीक हो पाएगी।