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उत्तराखंड में 35 साल से शनिवार को वकील कर रहे हड़ताल, सुप्रीम कोर्ट ने बताया गैरकानूनी

Sat, 29 Feb 2020 12:05 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sat, 29 Feb 2020 12:05 AM IST
सार

शीर्ष कोर्ट ने उत्तराखंड में 35 साल से हर शनिवार वकीलों के कार्य बहिष्कार को अवैध ठहराया है। साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिल को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस भी भेजा है।

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Lawyers strike in three District Uttarakhand from 35 years on Saturday, Supreme Court said illegal

विस्तार

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि हड़ताल पर जाना या अदालत का बहिष्कार करना वकीलों का मौलिक अधिकार नहीं है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने 35 साल से हर शनिवार को उत्तराखंड के तीन जिलों देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में वकीलों की हड़ताल को अवैध करार दिया। पाकिस्तान के स्कूल में विस्फोट, नेपाल में भूकंप या वकीलों के परिवार के किसी सदस्य के निधन सहित अन्य कारणों से राज्य के वकील प्रत्येक शनिवार को हड़ताल पर चले जाते हैं।

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने शुक्रवार को कहा, हर शनिवार वकीलों द्वारा अदालतों का बहिष्कार अवमानना है। यह किसी भी तरीके से न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने अपने कई फैसलों में कहा है कि वकीलों को हड़ताल पर नहीं जाना चाहिए, बावजूद इसके वकील हड़ताल पर जाते हैं। जब अदालतें लंबित मामलों के बोझ तले दबी हों तो संस्थान महीने में चार दिन हड़ताल नहीं झेल सकता। 

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सितंबर, 2002 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया, बावजूद इसके न तो बीसीआई और न किसी राज्य बार काउंसिल ने कोई दंडात्मक कदम उठाया। बार काउंसिल का दायित्व है कि यह सुनिश्चित करे कि कोई वकील गैर पेशेवर रवैया न अपनाए और न ही अनुचित आचरण करे।

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अदालतों का बहिष्कार करना न्यायसंगत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन की उस दलील को खारिज कर दिया कि हड़ताल पर उनका जाना संविधान के तहत मिले अभिव्यक्ति के अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने कहा, अभिव्यक्ति के अधिकार का इस्तेमाल न तो वादियों और न न्यायिक वितरण प्रणाली की कीमत पर किया जा सकता है। अभिव्यक्ति के अधिकार के नाम पर वकीलों का हड़ताल पर जाना या अदालतों का बहिष्कार करना न्यायसंगत नहीं है।

बार काउंसिल से छह हफ्ते में मांगा सुझाव

पीठ ने मामले को गंभीर माना और स्वत: संज्ञान लेते हुए बीसीआई और सभी राज्य बार काउंसिल को नोटिस जारी करते हुए इस समस्या से निपटने को सुझाव मांगे हैं। पीठ ने छह हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

हाईकोर्ट ने भी ठहराया था गलत

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वकीलों की हड़ताल को गलत बताया था और कई निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने सभी जिला बार एसोसिएशन को हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है। जो पालन नहीं करेगा तो वह अदालत की अवमानना सहित अन्य परिणामों को भुगतने के लिए तैयार रहे।

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