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Kiren Rijiju: कानून मंत्री ने की 'संस्थागत मध्यस्थता' की वकालत, AI कर सकता है मध्यस्थों की मदद

Sun, 19 Feb 2023 05:14 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 19 Feb 2023 05:14 PM IST
सार

कानून मंत्री ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी (एआई) दस्तावेज समीक्षा और विश्लेषण, कानूनी अनुसंधान और पुरस्कारों का मसौदा तैयार करने जैसे कार्यों में मध्यस्थों की मदद कर सकता है।

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Law Minister Rijiju pitches for institutional arbitration says AI can help arbitrators
Kiren Rijiju (File) - फोटो : ANI

विस्तार

कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को देश में संस्थागत मध्यस्थता (इंस्टीट्यूशनल आर्बिट्रेशन) की वकालत की। रिजिजू ने तदर्थ मध्यस्थता (एड हॉक आर्बिट्रेशन) में खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्यवाही कोर्ट के हस्तक्षेप के लिए अतिसंवेदनशील होती है, जिससे अंतिम परिणाम में देरी होती है। 

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उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी (एआई) दस्तावेज समीक्षा और विश्लेषण, कानूनी अनुसंधान और पुरस्कारों का मसौदा तैयार करने जैसे कार्यों में मध्यस्थों की मदद कर सकता है।
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दिल्ली हाईकोर्ट में आर्बिट्रेशन वीकेंड कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कानून मंत्री ने कहा कि ज्यादातर लोग तदर्थ मध्यस्थता के लिए जाते हैं, जहां कार्यवाही पूर्व निर्धारित नियमों से नहीं होती है। नतीजतन, ये कार्यवाही विभिन्न चरों में कोर्ट के हस्तक्षेप के लिए अतिसंवेदनशील होती हैं, जो शामिल पक्षों के लिए अंतिम फैसले में देरी की ओर ले जाती हैं। रिजिजू ने कहा, दूसरी ओर संस्थागत मध्यस्थता एक संस्था के नियमों द्वारा विनयमित की जाती है, जो ज्यादा सुरक्षित प्रक्रिया प्रदान करती है। 
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उन्होंने कहा, इसके अलावा सभी पक्षी अच्छी गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे वाले मध्यस्थ संस्थान की विशेषज्ञता से लाभ उठा सकते हैं। रिजिजू ने आगे कहा, 2030 तक सरकार का विजन यह सुनिश्चित करना है कि मध्यस्थता की गुंजाइश गतिशील बनी रहे, सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के साथ-साथ अनुबंध संबंधी विवादों के समयबद्ध और अंतिम निर्णय की जरूरतों के प्रति भी सचेत रहे। 


उन्होंने आगे कहा, संस्थागत मध्यस्थता पर जोर देने के साथ ही यह जरूरी है कि गैर-महानगरीय शहरों में नए मध्यस्थता केंद्र स्थापित किए जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्थागत मध्यस्थता की पूरी प्रणाली कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) के लिए माहौल बनाने और उसे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ईज ऑफ लिविंग से जुड़ा हुआ है। 

उन्होंने कहा कि जब समाज में समृद्धि आएगी और कारोबार सुगमता के माहौल को बढ़ावा देने वाली एक मजबूत प्रणाली होगी, तभी जीवन की सुगमता (ईज ऑफ लिविंग) देखी जाएगी। वर्ल्ड बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट का हवाला देते हुए रिजिजू ने कहा कि भारत को किसी भी विवाद को सुलझाने में 1,445 दिन लगते हैं।


उन्होंने कहा कि कारोबार सुगमता और जीवन यापन में सुगमता के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए न्यायपालिका का समर्थन जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अदालतों को कागज रहित होना चाहिए। केंद्रीय बजट में ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के तीसरे चरण के लिए 7,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 
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