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Law Minister: 'जज के तौर पर योग्य की होनी चाहिए नियुक्ति, उनकी नहीं जिन्हें कॉलेजियम जानता हो', रिजिजू का तंज
Sat, 05 Nov 2022 01:17 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 05 Nov 2022 01:17 PM IST
सार
एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में कानून मंत्री ने कहा, ‘‘मैं न्यायपालिका या जजों की आलोचना नहीं कर रहा, बल्कि मैं सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मौजूदा व्यवस्था से खुश नहीं हूं। कोई भी व्यवस्था सही नहीं है, लेकिन हमें हमेशा एक बेहतर प्रणाली की दिशा में बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।’’
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किरेन रिजिजू
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने जजों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कॉलेजियम व्यवस्था पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि जजों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा कॉलेजियम प्रणाली पारदर्शी नहीं है। रिजिजू ने तंज कसते हुए कहा कि कोर्ट में सबसे योग्य व्यक्ति को जज के तौर पर नियुक्त किया जाना चाहिए, न कि किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे कॉलेजियम पहचानता हो।
एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में कानून मंत्री ने कहा, ‘‘मैं न्यायपालिका या जजों की आलोचना नहीं कर रहा, बल्कि मैं सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मौजूदा व्यवस्था से खुश नहीं हूं। कोई भी व्यवस्था सही नहीं है, लेकिन हमें हमेशा एक बेहतर प्रणाली की दिशा में बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि व्यवस्था को जवाबदेह और पारदर्शी होना चाहिए। अगर यह पारदर्शी नहीं है, तो अगर इस व्यवस्था से जुड़े मंत्री इस पर नहीं बोलेंगे तो और कौन बोलेगा।’’ रिजिजू ने कहा कि वे सिर्फ वकील समुदाय और कुछ जजों के अलावा लोगों की सोच के बारे में बता रहे हैं। मंत्री ने आगे कहा, ‘‘मौजूदा कॉलेजियम प्रणाली की मुख्य समस्या यह है कि जज सिर्फ उन सहयोगियों की सिफारिश कर रहे हैं, जिन्हें वे जानते हैं। जाहिर है वे ऐसे जज की सिफारिश नहीं करेंगे, जिन्हें वे नहीं जानते।’’ मंत्री ने इसी व्यवस्था को बदलने की मांग करते हुए कहा, ‘‘सबसे योग्य को नियुक्त किया जाना चाहिए, न कि ऐसे किसी को जिसे कॉलेजियम जानता हो।’’
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रिजिजू से जब पूछा गया कि अगर सरकार को इस व्यवस्था में शामिल किया जाता है तो प्रक्रिया अलग कैसे हो जाएगी, तो इस पर रिजिजू ने कहा कि सरकार के पास जानकारी इकट्ठा करने और जांच-पड़ताल के लिए एक आजाद तंत्र है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के पास निर्णय लेने से पहले खुफिया ब्यूरो और कई अन्य रिपोर्ट होती है, जिसका वह इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन कोर्ट और जजों के पास यह तंत्र नहीं है।’’
कानून मंत्री ने कहा कि दुनिया भर में सरकारें न्यायाधीशों की नियुक्ति करती हैं। इसकी वजह से न्यायपालिका में भी राजनीति है। जज इसे जाहिर नहीं होने दे सकते हैं, लेकिन गहरी राजनीति होती है।’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या न्यायाधीशों को नियुक्ति जैसे प्रशासनिक कार्यों में फंसना चाहिए या न्याय देने में ज्यादा समय लेना चाहिए।’’
रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता में विश्वास करती है। इसलिए उसने इसे कमजोर करने वाला कोई कदम नहीं उठाया। लेकिन न्यायपालिका को कार्यपालिका की भूमिका में नहीं आना चाहिए। जब न्यायाधीश मौखिक टिप्पणी करते हैं, तो इसे व्यापक कवरेज मिलता है। हालांकि, इस तरह की टिप्पणियों का (मामले पर) कोई असर नहीं पड़ता है। एक न्यायाधीश को अनावश्यक टिप्पणियां करने और आलोचना आमंत्रित करने के बजाय अपने आदेश के माध्यम से बोलना चाहिए।’’
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एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में कानून मंत्री ने कहा, ‘‘मैं न्यायपालिका या जजों की आलोचना नहीं कर रहा, बल्कि मैं सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मौजूदा व्यवस्था से खुश नहीं हूं। कोई भी व्यवस्था सही नहीं है, लेकिन हमें हमेशा एक बेहतर प्रणाली की दिशा में बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।’’
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उन्होंने कहा कि व्यवस्था को जवाबदेह और पारदर्शी होना चाहिए। अगर यह पारदर्शी नहीं है, तो अगर इस व्यवस्था से जुड़े मंत्री इस पर नहीं बोलेंगे तो और कौन बोलेगा।’’ रिजिजू ने कहा कि वे सिर्फ वकील समुदाय और कुछ जजों के अलावा लोगों की सोच के बारे में बता रहे हैं। मंत्री ने आगे कहा, ‘‘मौजूदा कॉलेजियम प्रणाली की मुख्य समस्या यह है कि जज सिर्फ उन सहयोगियों की सिफारिश कर रहे हैं, जिन्हें वे जानते हैं। जाहिर है वे ऐसे जज की सिफारिश नहीं करेंगे, जिन्हें वे नहीं जानते।’’ मंत्री ने इसी व्यवस्था को बदलने की मांग करते हुए कहा, ‘‘सबसे योग्य को नियुक्त किया जाना चाहिए, न कि ऐसे किसी को जिसे कॉलेजियम जानता हो।’’
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रिजिजू से जब पूछा गया कि अगर सरकार को इस व्यवस्था में शामिल किया जाता है तो प्रक्रिया अलग कैसे हो जाएगी, तो इस पर रिजिजू ने कहा कि सरकार के पास जानकारी इकट्ठा करने और जांच-पड़ताल के लिए एक आजाद तंत्र है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के पास निर्णय लेने से पहले खुफिया ब्यूरो और कई अन्य रिपोर्ट होती है, जिसका वह इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन कोर्ट और जजों के पास यह तंत्र नहीं है।’’
कानून मंत्री ने कहा कि दुनिया भर में सरकारें न्यायाधीशों की नियुक्ति करती हैं। इसकी वजह से न्यायपालिका में भी राजनीति है। जज इसे जाहिर नहीं होने दे सकते हैं, लेकिन गहरी राजनीति होती है।’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या न्यायाधीशों को नियुक्ति जैसे प्रशासनिक कार्यों में फंसना चाहिए या न्याय देने में ज्यादा समय लेना चाहिए।’’
रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता में विश्वास करती है। इसलिए उसने इसे कमजोर करने वाला कोई कदम नहीं उठाया। लेकिन न्यायपालिका को कार्यपालिका की भूमिका में नहीं आना चाहिए। जब न्यायाधीश मौखिक टिप्पणी करते हैं, तो इसे व्यापक कवरेज मिलता है। हालांकि, इस तरह की टिप्पणियों का (मामले पर) कोई असर नहीं पड़ता है। एक न्यायाधीश को अनावश्यक टिप्पणियां करने और आलोचना आमंत्रित करने के बजाय अपने आदेश के माध्यम से बोलना चाहिए।’’