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भूल सुधारने का आखिरी मौका : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- भूखे को खाना देना चाहते हैं तो किसी कानून में मनाही नहीं
Wed, 17 Nov 2021 06:44 AM IST
योगेश साहू
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Wed, 17 Nov 2021 06:44 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यह भी कहा है कि कल्याणकारी सरकार का यह पहला दायित्व है कि वह भूख से मर रहे लोगों को भोजना मुहैया कराए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
देशभर में सामुदायिक रसोई खोलने की योजना पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आप अगर भूखे को खाना देना चाहते हैं तो इसके लिए किसी कानून में मनाही नहीं है। हमने इसीलिए आपसे एक योजना बनाने को कहा था।
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इससे पहले केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान ने कहा, 27 अक्तूबर के आदेश के बाद केंद्र ने राज्यों के साथ बैठक की और उनकी राय आने के बाद हलफनामा दायर किया गया। इस पर सीजेआई ने कहा, इसमें तो कहीं नहीं लिखा कि आप योजना बनाने पर विचार कर रहे हैं।
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सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने आश्वासन दिया कि केंद्र इस मुद्दे पर बैठक कर उचित फैसला लेगा। उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्तों का समय मांगा।
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भूल सुधारने का आखिरी मौका
पीठ ने कहा, हम आपको आखिरी मौका दे रहे हैं। तीन हफ्तों के भीतर सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा नया हलफनामा दाखिल कीजिए। इसमें राज्यों से बातचीत के आधार पर देशभर में सामुदायिक रसोई की योजना बताइए। पीठ ने 27 अक्तूबर को केंद्र सरकार को सामुदायिक रसोई के लिए अखिल भारतीय योजना लेकर आने को कहा था।
सभी राज्य बैठक में शामिल हों, अगली सुनवाई में आपत्तियों पर विचार
पीठ ने साथ ही कहा, सभी राज्य अपनी योजना के साथ केंद्र की बैठक में आवश्यक तौर पर हिस्सा लें। आपकी आपत्तियां भी हम अगली सुनवाई सुनेंगे। कोर्ट अरुण धवन व अन्य की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें भूख से कोई न मरे, इसके लिए सामुदायिक रसोई स्थापित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।