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Hindi News ›   India News ›   largest rail link line Delhi UP industries get benefit 13000 tonnes of goods will come from 500 coaches trains

देश की सबसे बड़ी रेल लिंक लाइन: दिल्ली, यूपी के उद्योगों को फायदा, 500 डिब्बों की मालगाड़ी से आएगा 13000 टन माल

Tue, 16 Aug 2022 06:13 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Tue, 16 Aug 2022 06:13 PM IST
सार

कॉरिडोर के चालू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा को फायदा होगा। इन राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों में बनने वाली वस्तुएं कम समय में महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड आदि राज्यों में पहुंच सकेंगी। इस कॉरिडोर पर चलने वाली 500 डिब्बों की मालगाड़ी एक बार में 13 हजार टन माल लेकर जा सकेगी।

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largest rail link line Delhi UP industries get benefit 13000 tonnes of goods will come from 500 coaches trains
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

देश के सबसे बड़े मालवाहक रेल गलियारे की लिंक लाइन बनकर तैयार हो गई हैं। इस पर ट्रायल भी पूरा हो चुका हैं। ये लिंक लाइन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के वेस्टर्न और ईस्टर्न कॉरिडोर को आपस में जोड़ेगी। सूत्रों के अनुसार पीएम नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को इस लाइन पर मालगाड़ी चलाने जाने को लेकर हरी झंडी भी दिखा सकते है। इस लिंक लाइन का सबसे ज्यादा फायदा दिल्ली-एनसीआर समेत यूपी के उद्योगों को मिलेगा।  

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इस कॉरिडोर के चालू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा को फायदा होगा। इन राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों में बनने वाली वस्तुएं कम समय में महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड आदि राज्यों में पहुंच सकेंगी। इस कॉरिडोर पर चलने वाली 500 डिब्बों की मालगाड़ी एक बार में 13 हजार टन माल लेकर जा सकेगी।
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ईस्टर्न कॉरिडोर लुधियाना से कोलकाता और वेस्टर्न कॉरिडोर नोएडा के दादरी से मुंबई तक है। इन दोनों कॉरिडोर को जोड़ने के लिए ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी रेलवे स्टेशन से खुर्जा बुलंदशहर तक करीब 50 किलोमीटर लंबी लिंक रेल लाइन बिछाई गई है। इसी लिंक लाइन का काम अब पूरा हो चुका है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने भी लिंक लाइन पर इंजन दौड़ाकर ट्रायल पूरा करके ओके रिपोर्ट दे दी है। इस लिंक लाइन के चालू होते ही दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कारोबारी अपना माल मुंबई और कोलकाता तक सस्ते रेल भाड़े पर भेज सकेंगे और वहां से मंगा भी सकेंगे।
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रेल मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली से हावड़ा और दिल्ली से मुंबई रेल लाइन पर इस वक्त क्षमता का 115 प्रतिशत ट्रैफिक है। सामान्य रेल लाइनों और सड़कों का ट्रैफिक कम करने रेल ढुलाई बढ़ाने के लिए के लिए अप्रैल 2005 में भारत-जापान की शिखर बैठक में इस परियोजना पर चर्चा हुई। आखिर साल 2006 में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इंडिया लिमिटेड का गठन हुआ।


देश में माल ढुलाई के लिए रेल लाइनों को जोड़ने के लिए दो डायगोनल बनाए गए हैं- ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर। ये दोनों डायगोनल ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर को आपस में जोड़ेंगे। यह रेल लाइन सिर्फ और सिर्फ मालगाड़ियों के लिए होगी। जो मालगाड़ियां सामान्य लाइन पर औसत 25 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलती हैं। वो नए कॉरिडोर पर 75 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। प्रमुख रेल लाइनों से मालगाड़ियां हटाकर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर शिफ्ट कर दी जाएंगी। इससे सामान्य रेल लाइनों पर यातायात का दबाव कम होगा। ट्रेनों को सिग्नल के इंतजार में आउटर पर खड़ा नहीं करना पड़ेगा।

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