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जमीन विवाद: सांसद यूसुफ पठान को आंशिक राहत; हाई कोर्ट से चार हफ्ते का मिला समय, साथ ही मिली ये बड़ी चेतावनी

Mon, 15 Jun 2026 06:41 PM IST
Pavan पीटीआई, अहमदाबाद
पीटीआई, अहमदाबाद Published by: Pavan Updated Mon, 15 Jun 2026 06:41 PM IST
सार

ये मामला वडोदरा नगर निगम की 978 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है। जिसे यूसुफ पठान ने राज्य सरकार की नीति के तहत इस जमीन के आवंटन की मांग की थी, लेकिन सरकार ने वर्ष 2024 में उनका दावा खारिज कर दिया था। इसके बावजूद वह जमीन पर बने रहे।

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Land case: HC grants Yusuf Pathan 4 weeks' time to pursue plot claim, warns of imposing costs
यूसुफ पठान, पूर्व भारतीय क्रिकेटर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा में एक सरकारी जमीन पर अपने दावे को आगे बढ़ाने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। हालांकि अदालत ने साफ चेतावनी दी कि यदि वह जमीन खाली करने में और देरी करते हैं तो उन्हें अधिक हर्जाना देना पड़ सकता है।
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2014 से यूसुफ पठान ने जमीन पर किया है कब्जा
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन रॉय की खंडपीठ ने यह राहत यूसुफ पठान के वकील की मांग पर दी। यूसुफ पठान की ओर से अदालत में कहा गया कि राज्य सरकार की एक नीति के तहत जमीन के आवंटन का दावा किया जा रहा है और उम्मीद है कि अन्य क्रिकेटरों की तरह उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा।
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इस सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत समय देने में कोई आपत्ति नहीं रखती, लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि जितनी अधिक देरी होगी, उतना अधिक हर्जाना देना पड़ेगा। अदालत ने कहा कि यूसुफ पठान 2014 से इस जमीन पर काबिज हैं और इस दौरान उन्होंने एक भी पैसा नहीं चुकाया है।

वडोदरा नगर निगम की 978 वर्ग मी. जमीन से जुड़ा है केस
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में राज्य की नीति के तहत उन्हें यह जमीन मिल भी जाती है, तब भी उन्हें पिछले वर्षों के कब्जे की अवधि का हर्जाना देना होगा। इसलिए देरी बढ़ने के साथ उनकी आर्थिक जिम्मेदारी भी बढ़ती जाएगी। मामला वडोदरा नगर निगम की 978 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है। यूसुफ पठान ने राज्य सरकार की नीति के तहत इस जमीन के आवंटन की मांग की थी, लेकिन सरकार ने वर्ष 2024 में उनका दावा खारिज कर दिया था। इसके बावजूद वह जमीन पर बने रहे।


वडोदरा नगर निगम के नोटिस को यूसुफ पठान ने दी थी चुनौती
वहीं सांसद चुने जाने के बाद वडोदरा नगर निगम ने उन्हें जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया, जिसे उन्होंने अदालत में चुनौती दी। इससे पहले 8 जून की सुनवाई में भी हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि सरकार द्वारा आवंटन से इनकार किए जाने के बावजूद पठान बिना किसी भुगतान के सार्वजनिक जमीन पर कैसे कब्जा बनाए हुए हैं।

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अब अदालत ने यूसुफ पठान को चार सप्ताह का समय दिया है ताकि वह राज्य की नीति के तहत अपने दावे को आगे बढ़ा सकें, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जमीन पर कब्जा बनाए रखने की अवधि के लिए हर्जाना देना अनिवार्य होगा।
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