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शोध: भारत में इस्तेमाल किए गए 47% एंटीबायोटिक फॉर्मूलेशन अस्वीकृत, सबसे ज्यादा एजिथ्रोमाइसिन का हुआ इस्तेमाल

Wed, 07 Sep 2022 03:10 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Wed, 07 Sep 2022 03:10 PM IST
सार

शोध में पाया गया है कि एजिथ्रोमाइसिन- 500 एमजी टैबलेट भारत में सबसे अधिक खपत वाली एंटीबायोटिक फॉर्मूलेशन थी। वहीं दूसरे नंबर पर सेफिक्साइम 200 एमजी थी

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Lancet study: 47% antibiotic formulations used in India unapproved, azithromycin used the most
दवाइयां - फोटो : amar ujala

विस्तार

भारत में 2019 में निजी क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले 47 प्रतिशत से ज्यादा एंटीबायोटिक फॉर्मूलेशन को केंद्रीय दवा नियामक द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया था। इस बात का खुलासा लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित एक अध्ययन में हुआ है। शोध में पाया गया है कि एजिथ्रोमाइसिन- 500 एमजी टैबलेट भारत में सबसे अधिक खपत वाली एंटीबायोटिक फॉर्मूलेशन थी। इसका इस्तेमाल 7.6 प्रतिशत था। वहीं दूसरे नंबर पर सेफिक्साइम 200 एमजी थी, जिसका इस्तेमाल 6.5 प्रतिशत था।

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दरअसल, बोस्टन यूनिवर्सिटी और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के शोधकर्ताओं ने निजी क्षेत्र के एंटीबायोटिक उपयोग की जांच की। इसमें पाया गया कि भारत में एंटीबायोजिक फॉर्मूलेशन कुल खपत का 85 से 90 प्रतिशत है।
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इन आंकड़ों में सार्वजनिक सुविधाओं के माध्यम से दी जाने वाली दवाओं को शामिल नहीं किया गया था। अध्ययन में कहा गया है, भारत में एंटीबायोटिक दवाओं की प्रति व्यक्ति खपत दर कई देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है। इसके बावजूद भारत बड़ी मात्रा में व्यापक स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक दवाओं का उपभोग करता है, जिन्हें आदर्श रूप से कम इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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शोध में कहा गया है कि उन्होंने कहा कि 2019 में कुल परिभाषित दैनिक खुराक (डीडीडी) की खपत 5,071 मिलियन थी, जो प्रति दिन प्रति 1,000 जनसंख्या पर 10.4 डीडीडी थी। एनएलईएम (आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची) में सूचीबद्ध फॉर्मूलेशन ने देश में 49.0% (2486 मिलियन डीडीडी) का योगदान दिया, फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) ने 34.0% (1722 मिलियन) का योगदान दिया। इसके अलावा अस्वीकृत फॉर्मूलेशन ने 47.1% (2408 मिलियन डीडीडी) प्रयोग हुआ। 

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