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Lancet Report : कोरोना से बचाई जा सकती थीं लाखों जिंदगियां, कई स्तरों पर हुई चूक, मेडिकल जर्नल में दावा
Fri, 16 Sep 2022 06:01 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो. नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो. नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 16 Sep 2022 06:01 AM IST
सार
आयोग ने महामारी के पहले दो साल में दुनियाभर में उठाए गए कदमों की समीक्षा की है। रिपोर्ट में रोकथाम के उपायों, पारदर्शिता, जागरूकता, बुनियादी जन स्वास्थ्य व्यवस्था, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता में व्यापक नाकामी का जिक्र किया है, जिसके चलते एक करोड़ 77 लाख लोगों की मौत होने का अनुमान है।
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कोरोना की जांच (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना महामारी से लड़ने में कई स्तर पर चूक के चलते लाखों लोगों की मौत हुई है, जबकि इन जिंदगियों को बचाया जा सकता था। यह दावा मेडिकल जर्नल द लैंसेट के कोविड आयोग की ओर से जारी रिपोर्ट में किया गया है। साथ ही यह भी कहा है कि इससे कई देशों में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
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आयोग ने महामारी के पहले दो साल में दुनियाभर में उठाए गए कदमों की समीक्षा की है। रिपोर्ट में रोकथाम के उपायों, पारदर्शिता, जागरूकता, बुनियादी जन स्वास्थ्य व्यवस्था, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता में व्यापक नाकामी का जिक्र किया है, जिसके चलते एक करोड़ 77 लाख लोगों की मौत होने का अनुमान है।
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रिपोर्ट में कहा गया कि अधिकांश देशों की सरकारें तैयार नही थीं और उनकी प्रतिक्रिया बहुत धीमी थी। इसके अलावा, उन्होंने समाज के सबसे संवेदनशील समूहों को बहुत कम तवज्जो दी। साथ ही गलत सूचनाओं की बाढ़ के कारण स्थिति और खराब हो गई।
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आयोग के मुताबिक, लक्ष्य प्राप्ति के लिए स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में निवेश करने व नई योजनाएं बनाने तथा भेदभाव का सामना करने वाली आबादी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।आयोग ने नए महामारी विज्ञान और वित्तीय विश्लेषणों का उपयोग करके उन सिफारिशों की रूपरेखा तैयार की है, जिससे कोविड-19 आपातकाल को समाप्त करने, भविष्य के स्वास्थ्य खतरों के प्रभाव को कम करने और दीर्घकालीन सतत विकास हासिल करने में मदद मिल सकती है।