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Lakhimpur kheri case: आशीष मिश्र के खिलाफ चार्जशीट बनी भाजपा के गले की हड्डी, यूपी चुनाव में बन सकता है बड़ा मुद्दा

Mon, 03 Jan 2022 03:22 PM IST
प्रतिभा ज्योति प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Mon, 03 Jan 2022 03:22 PM IST
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सार
एक वाहन से कथित रूप से कुचले जाने के बाद चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई थी। गुस्साई भीड़ की जवाबी कार्रवाई में भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं की भी जान चली गई थी। नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी का पुनर्गठन किया था।
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Lakhimpur Kheri violence case SIT files chargesheet in this case, names MoS Ajay Misra son ashish mishra as prime accused, can be A big poll issue in UP elections
आशीष मिश्रा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने चार्जशीट दायर कर दी है। बताया जा रहा है कि 5000 पन्ने की  इस चार्जशीट में मुख्य आरोपी गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र को बनाया गया है। चार्जशीट में कहा गया है कि आशीष मिश्र तीन अक्तूबर 2021 को किसानों को कार से रौंदने वाले घटना के दिन घटनास्थल पर ही मौजूद थे। आशीष मिश्र के खिलाफ एसआईटी का यह चार्जशीट वो अहम सबूत है जिसकी गिरफ्त से निकलना न केवल आशीष मिश्र के लिए अब मुश्किल है, बल्कि इसने उनके पिता अजय मिश्र और भारतीय जनता पार्टी के लिए भी एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। 


इस मामले में मुख्य आरोपी आशीष मिश्र समेत सभी 13 आरोपी जेल में बंद हैं। भाजपा के लिए तो यह पूरा प्रकरण उसके गले की हड्डी बन गई है जो न तो पार्टी के निगलते बन रहा है न उगलते, क्योंकि अजय मिश्र ने यह दावा किया था कि जब यह घटना हुई थी तो उनके बेटे घटनास्थल पर मौजूद थे। लेकिन अब चार्जशीट में अजय मिश्र का बयान गलत साबित होता दिख रहा है।  


भाजपा के लिए क्या चुनौती? 
चुनाव आयोग पांच जनवरी के बाद कभी भी उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनावों की घोषणा कर सकता है। ऐसे में एसआईटी की चार्जशीट में आशीष मिश्र को मुख्य आरोपी बनाना विपक्ष के लिए यूपी चुनाव में एक बड़ा मुद्दा हो सकता है। विपक्ष पहले से इस मुद्दे पर भाजपा और अजय मिश्र को घेर रहा है। पिछले साल दिसंबर में खत्म हुए संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष पहले दिन से इस मसले पर लगातार अजय मिश्र का इस्तीफा मांग रहा था। किसान आंदोलन में शामिल किसान संगठनों ने भी उनके इस्तीफे की मांग की थी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने तो इस मुद्दे को उठाकर चुनाव में कांग्रेस को चर्चा में ला दिया था। 
 

गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त करने की मांग करते कांग्रेसी विधायक व विधान परिषद सदस्य
गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त करने की मांग करते कांग्रेसी विधायक व विधान परिषद सदस्य - फोटो : अमर उजाला
अजय मिश्र के इस्तीफे की बढ़ेगी मांग
बताया जा रहा है कि जैसे-जैसे चुनाव करीब आएगा विपक्ष का पूरा जोर अजय मिश्र और भाजपा को कटघरे में खड़े करने का होगा। विपक्ष पूरी मजबूती से अब अजय मिश्र के इस्तीफे की मांग करेगी, क्योंकि गृह राज्य मंत्री ने इस घटना के बाद खुद कहा था कि यदि उनके बेटे के खिलाफ सबूत मिल गया तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। 

उत्तर प्रदेश से जुड़े एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के मुताबिक भाजपा बड़ी-बड़ी परियोजनाओं को उद्घाटन करके विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहती है, जिसमें कोई हर्ज नहीं है, लेकिन यदि भाजपा नेता और मंत्री के बेटे के हाथ खून से रंगें हो तो ऐसे विकास का गरीब जनता और किसान क्या करेगी। उन्होंने कहा, हम इस मुद्दे को गांव-गांव और चौराहों तक  जनता के बीच में ले कर जाएंगे कि क्या मजबूरी है कि एक आरोपी के मंत्री पिता का इस्तीफा भाजपा नहीं ले रही है।

अजय मिश्र का इस्तीफा क्यों नहीं ले रही सरकार
गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के इस्तीफे के लिए विपक्ष के तमाम दबाव के बावजूद सरकार ने उनका इस्तीफा नहीं लिया। इसके पक्ष में भाजपा यह तर्क देती रही कि मामला कोर्ट के विचाराधीन है और दूसरी बात कि यदि गुनाह उनके बेटे ने किया है तो इसकी सजा उनके पिता को नहीं दी जा सकती। लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि आमतौर पर नेताओं की सार्वजनिक छवि को लेकर सतर्क रहने वाली भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के सामने ऐसी क्या मजबूरी है अजय मिश्र का इस्तीफा नहीं लिया गया। 

गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र
गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र - फोटो : Amar Ujala
क्या मजबूरी है? 
दरअसल अजय मिश्र के मंत्री पद को बचाने के पीछे की सबसे बड़ी वजह यूपी चुनाव में ब्राह्मण वोटों का समीकरण है। इस साल होने वाले चुनाव और ब्राह्मण वोटों के समीकरण को देखते हुए ही भाजपा उन पर किसी भी तरह की कार्रवाई करने से बच रही है। इसी समीकरण की वजह से ही पिछले साल जुलाई में पीएम नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में अजय मिश्र टेनी एंट्री हुई थी। ऐसे में भाजपा नेतृत्व उन्हें हटाकर ब्राह्मणों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है।

बताया जा रहा है कि यदि उनसे मंत्री पद छीना गया तो कथित तौर पर भाजपा से पहले से ही नाराज ब्राह्मण समुदाय और नाराज हो सकता है। ऐसे में एक बड़ा वोट बैंक भाजपा के हाथ से निकल सकता है। बीते सप्ताह ही ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व काफी सक्रिय हुआ है। इसी मुद्दे पर यूपी के ब्राह्मण नेताओं के साथ केंद्रीय मंत्री और यूपी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की बैठक हुई है। कहा गया कि भाजपा के लिए ब्राह्मण वोट बैंक चिंता का विषय है और पार्टी गुस्से को कम करने पर काम कर रही है।

नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण नेताओं की बैठक हुई।
नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण नेताओं की बैठक हुई। - फोटो : अमर उजाला
भाजपा के लिए यह धारणा क्यों बनी है? 
बताया जा रहा है कि यूपी में ब्राह्मण भाजपा से नाराज है, पार्टी के प्रति यह धारणा पुलिस एनकाउंटर में गैंगस्टर विकास दुबे की मौत के बाद मजबूत हुई है। लंबे समय से कहा जा रहा है कि यूपी के करीब 10 फीसदी ब्राह्मण जो कभी भाजपा के समर्थक रहे, वे योगी सरकार से नाराज हैं। ब्राह्मण वर्ग की ओर से लगातार आवाज आ रही है कि यूपी में सरकार ने इस समाज के लिए कुछ नहीं किया। दूसरी तरफ ब्राह्मणों का यह आरोप रहा कि अपनी ही सरकार ने उनका 'उत्पीड़न'  किया है, जिसके बाद  भाजपा बचाव की मुद्रा में है।

केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी।
केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी। - फोटो : अमर उजाला
मिश्र से बचने की भी कोशिश
एक तरफ पार्टी अजय मिश्र पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही, लेकिन छवि बिगड़ने का डर भी पार्टी को सता रहा है, इसलिए मिश्र को ज्यादतर चुनावी गतिविधियों से दूर रखा गया है। वे दिल्ली में धर्मेंद्र प्रधान के साथ हुई यूपी के ब्राह्मण नेताओं की  बैठक में तो शामिल हुए थे, जिसमें ब्राह्मणों तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप तैयार करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया था, लेकिन जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक में अनुपस्थित थे। एक सूत्र ने कहा कि मिश्र को ब्राह्मण आउटरीच कार्यक्रम के तहत कोई काम नहीं सौंपा गया है। वे राज्य भर में चल रही भाजपा जन विश्वास यात्रा के किसी कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुए हैं। 

सूत्रों ने यह भी बताया कि यात्रा के तीन दिवसीय लखीमपुर चरण के दौरान आठ विधानसभा क्षेत्रों में 20 से अधिक बैठकें हुईं लेकिन इसमें भी मिश्र गैर-मौजूद थे। भाजपा के एक नेता ने कहा कि पार्टी के प्रचार से संबंधित गतिविधियों में उन्हें शामिल किए जाने की संभावना कम है, हालांकि चुनाव की घोषणा होने पर वे लखीमपुर में प्रचार कर सकते हैं क्योंकि वे वहां का लोकप्रियता चेहरा हैं।
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