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लखीमपुर कांड: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, एसआईटी ने यूपी सरकार पर लगाए आरोप

Mon, 04 Apr 2022 12:34 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 04 Apr 2022 12:34 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जांच के लिए गठित की गई एसआईटी ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। वहीं यूपी सरकार के वकील ंमहेश जेठमलानी ने भी अपना पक्ष रखा।

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Lakhimpur Kheri Case Supreme Court Hearing on Ashish Mishra Against Bail Cancel Plea Today
आशीष मिश्रा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। शीर्ष अदालत ने अब फैसले को सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान जांच के लिए गठित की गई एसआईटी ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। एसआईटी ने कहा कि हमने किसानों को कुचलने के आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए यूपी सरकार से दो बार कहा। लेकिन आशीष मिश्रा की जमानत रद्द नहीं हुई। वहीं  यूपी सरकार तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि मैं मानता हूं कि यह जघन्य अपराध है लेकिन आरोपी आशीष मिश्रा के भागने का खतरा नहीं है इसलिए अदालत सरकार की ओर से निश्चिंत रहें। यूपी सरकार के वकील ने आगे कहा कि हमने इस मामले की जांच कर रही एसआईटी की रिपोर्ट प्राप्त की है जिसे राज्य सरकार को भेज दिया गया है। इसपर मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन ने कहा कि आपने ये नहीं बताया कि चिट्ठी कब लिखी गई थी और ये ऐसा मामला नहीं हो जिसमें आप इतना इंतजार करें।  बता दें कि लखीमपुर हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत के मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

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जानें एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दाखिल की गई अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि एसआईटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को दो बार मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को दी गई जमानत को रद्द करने की सिफारिश की थी। लेकिन जमानत रद्द करने पर कोई विचार नहीं किया गया है। इसकी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं कि केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उस जगह पर थे, जिसमें आठ लोग मारे गए थे, और वे अक्तूबर में यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा अपनाए गए मार्ग में बदलाव के बारे में जानते थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से 4 अप्रैल तक रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए कहा था
इस मामले में चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की विशेष पीठ ने 30 मार्च को यूपी सरकार से 4 अप्रैल तक उन रिपोर्ट पर जवाब मांगा था, जिनमें रिटायर्ड जज की निगरानी में बनी एसआईटी ने जमानत रद्द करने का सुझाव दिया था। शीर्ष अदालत ने पाया कि एसआईटी ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को दो पत्र लिख कर मामले के मुख्य आरोपी की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का सुझाव दिया था। तब यूपी सरकार के वकील महेश जेठमलानी ने पीठ को सूचित किया था कि उन्हें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं। इस पर पीठ ने जेठमलानी से कहा था कि एसआईटी की रिपोर्ट पढ़कर 4 अप्रैल तक जवाब दाखिल कीजिए।

आपने जमानत खारिज की, तो कोई कोर्ट जमानत नहीं देगा :  आरोपी के वकील की दलील
आशीष की ओर से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने हाईकोर्ट के आदेश का बचाव किया। कहा, उनका मुवक्किल घटना के समय मौजूद नहीं था। अगर अदालत जमानत के लिए कोई शर्त जोड़ना चाहती है, तो जोड़ दे। लेकिन, शीर्ष कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी तो उनके मुवक्किल को देश की कोई अदालत जमानत नहीं दे सकती।

अपराध गंभीर...पर आरोपी भागेगा नहीं 

  • यूपी सरकार के वकील महेश जेठमलानी ने कहा, जमानत को चुनौती देने वाली सिफारिश सरकारी अधिकारियों के साथ शुक्रवार को साझा की गई है। 
  • एसआईटी ने रिपोर्ट में कहा है, आशीष रसूखदार व्यक्ति है। गवाहों को प्रभावित कर सुबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। हालांकि हम इससे सहमत नहीं हैं। 
  • जेठमलानी ने कहा, यह कहना कि अपराध जानबूझकर किया गया था या नहीं, ट्रायल का विषय है। हालांकि अपराध गंभीर है और सरकार ने जमानत का विरोध किया है। आरोपी के भागने की आशंका नहीं है।

कोर्ट रूम लाइव : हम इस बकवास को मंजूरी नहीं दे सकते

  • याचिकाकर्ता के वकील दुष्यंत दवे : हाईकोर्ट ने आरोपपत्र पर विचार नहीं किया, बल्कि प्राथमिकी पर भरोसा किया, जिसमें कथित रूप से एक व्यक्ति को गोली लगने की बात कही गई है। जमानत यह तथ्य को ध्यान में रखते हुए दी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतकों के शरीर में गोली के घाव के सुबूत नहीं मिले हैं।
  • सीजेआई रमण : जज पोस्टमार्टम रिपोर्ट वगैरह के विवरण में कैसे जा सकते हैं। हम जमानत का मामला सुन रहे हैं। इसे लंबा नहीं खींच सकते। जमानत के मामले में जिस तरह से केस के मेरिट पर विचार किया गया, वह गैरजरूरी था। हम इस तरह की बकवास को मंजूरी नहीं दे सकते। ऐसे शब्द का इस्तेमाल करने के लिए माफ करें। ...ट्रायल शुरू नहीं हुआ है और सुबूत जुटाए जा रहे हैं।
  • पीठ : जस्टिस राकेश कुमार जैन की निगरानी वाली एसआईटी ने मिश्र की जमानत के खिलाफ अपील दायर करने की सिफारिश की थी। यूपी सरकार का रुख क्या है?
  • सरकार के वकील जेठमलानी : एसआईटी ने गवाहों को प्रभावित करने और सुबूत नष्ट करने की आशंका जताते हुए जमानत के खिलाफ अपील करने की सिफारिश की थी। मामले के सभी 98 गवाहों से संपर्क कर उनकी सुरक्षा की जानकारी हासिल की गई, पर किसी भी गवाह ने डराने-धमकाने की बात नहीं की। हमने जमानत का पहले भी विरोध किया था, हमारा रुख अब भी वही है।
  • दवे : मामले में एक गवाह को मार्च में पीटते हुए धमकी दी गई कि अब भाजपा सत्ता में है, देख तेरा क्या हाल होगा। 

गवाहों को सुरक्षा जारी रहे
लखीमपुर हिंसा में मारे लोगों के परिजनों की याचिका पर 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार और आशीष को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिया था कि सभी गवाहों को सुरक्षा जारी रहनी चाहिए। पिछले साल 3 अक्तूबर को लखीमपुर में एसयूवी से कुचलकर 4 किसानों की मौत हुई थी।

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