यहां पर औरतें पिला रही हैं लाठियों को तेल
- अपने नए वस्त्र तैयार करने के साथ-साथ लाठी चलाने का अभ्यास भी कर रहीं हैं।
- एनआरआई बहुएं भी लठामार होली खेलेंगी, उनमें होली को लेकर काफी उत्साह है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
होली खेले तो आ जइयो बरसाने रसिया..., आ जइयो श्याम बरसाने तोय लठियन को मजा चखाइ दुंगी... इन्हीं गीत के भाव के साथ बरसाना की हुरियारिनें अपनी लाठियों को तेल पिलाकर मजबूत कर रहीं हैं। श्यामा-श्याम के अनन्य प्रेम की दिव्य लठामार रंगीली होली की तैयारी में पूरा बरसाना जुटा है, हुरियारिनें काफी उत्साहित हैं। वह अपने नए वस्त्र तैयार करने के साथ-साथ लाठी चलाने का अभ्यास भी कर रहीं हैं। बरसाना में एनआरआई बहुएं भी लठामार होली खेलेंगी, उनमें होली को लेकर काफी उत्साह है।
कहते हैं कि योगेश्वर श्रीकृष्ण पूरी दुनिया के लिए ईश्वर हैं, लेकिन बरसाना वासियों के लिए वे आज भी नंद के लाल हैं। श्रीकृष्ण की लीलाओं को करीब साढ़े पांच हजार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन बरसाना के लोग आज भी उसी भाव और परंपरा में माखन चोर श्रीकृष्ण को प्रेम पगी गाली देते हैं। बरसाना की प्रसिद्ध लठामार होली को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु 16 मार्च को बरसाना पहुंचेंगे।
चंद्रकांता गोस्वामी ने बताया कि वह 43 वर्ष से लठामार होली खेलती आ रहीं हैं। लाठी चलाने के लिए होली से चार पांच दिन पहले तैयारी करती हैं और नई हुरियारिनों को लाठी चलाने के गुर सिखाती हैं। करीब 10 वर्ष से होली खेल रहीं नेहा गोस्वामी ने बताया कि होली के लिए वह काफी उत्साहित हैं। जब हुरियारों पर लाठी बरसाते हैं तो हम मन ही मन में राधा-कृष्ण का जाप करते रहते हैं।
बरसाना की एनआरआई बहू दीपा गोस्वामी ने बताया कि यह उनकी दूसरी होली है। बड़ा ही अच्छा लगता है विदेशी कल्चर से अलग ब्रज संस्कृति बड़ी निराली है। जिस भाव के साथ ब्रज में होली खेली जाती है ऐसा भाव और कहीं देखने को नहीं मिलता है। मैं बड़ी सौभग्यशाली हूं कि मेरी ससुराल बरसाना में है।
लठामार की तैयारियों में जुटे हुरियारे
वृंदावन में 16 मार्च को आयोजित होने वाले लठामार होली कार्यक्रम के स्थगन की खबर सुनते ही नंदगांव के हुरियारे अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। कोई ढाल को सजा रहा है तो कोई नई धोती बगलबंदी तैयार करा रहा है। युवाओं के साथ बूढे़ और बच्चों में लठामार होली के लिए बड़ा जोश है।
ब्राह्मण समाज के घर-घर में मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। कस्बे से बाहर रहने वाले हुरियारों ने अपनी टिकट बुक करा ली है। अमर उजाला की टीम ने जब हुरियारों के घरों पर दस्तक दी तो ज्यादातर लोग होली की तैयारियों में व्यस्त थे।
रमेश पंच के घर में ढाल तैयार कर रहे एक समूह के मुकेश गोस्वामी उर्फ मुकुट बिहारी ने बताया कि सूखे चमड़े की ढाल लाठियों की चोट से चटक जाती हैं। ढालों की सुरक्षा के लिए दो तीन बार तेल लगा कर उन्हें सुखाया जा रहा है।
गौरव गोस्वामी ने बताया कि लठामार के लिए नए वस्त्र तैयार कराए जा रहे हैं। नए वस्त्रों पर पड़ा टेसू के फूलों का रंग मन को बेहद शांति देता है। ललित गोस्वामी ने बताया कि 15 दिन से वे पौष्टिक आहर ले रहे हैं।
बरसाना की हुरियारिनों से टक्कर जो लेनी है। कृष्णा ने बताया कि पिचकारियों को तैयार किया जा रहा है। बरसाने वालों के स्वागत के लिए टेसू के फूलों का रंग बनाया जा रहा है।
गोपाल गोस्वामी ने बताया कि श्रीजी को सुंदर पदों के माध्यम से होली सुनाने के लिए प्रतिदिन नंदभवन में समाज गायन के माध्यम से अभ्यास किया जा रहा है। रमेश पंच ने बताया कि भांग पीकैं होरी खेलिबे कौ आनंद कछू और ही होइ। जाके तांई भांग कौ कट्टा लै आए हैं। भांग अमनियां करी जाय रही है।