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Ladakh: हिंसा पर गरजे कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी, बोले- हालात संभालने में पूरी तरह असफल रहे PM मोदी और शाह
Sat, 27 Sep 2025 03:44 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लेह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लेह
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sat, 27 Sep 2025 03:44 PM IST
सार
लद्दाख हिंसा पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा देने का वादा पूरा न होने से हालात बिगड़े। लेह में धारा 163 लागू है और सुरक्षा बल तैनात हैं। भाजपा कार्यालय जलाया गया, चार लोगों की मौत हुई और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया।
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कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी
- फोटो : ANI
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विस्तार
लद्दाख में बिगड़ते हालात को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हालात को काबू में करने के बजाय और बिगड़ने दिया है। तिवारी ने कहा कि गिरफ्तारियां समस्या का समाधान नहीं हैं, बल्कि केंद्र को अपने वादों को पूरा करना होगा।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने राज्य का दर्जा बहाल करने और जम्मू-कश्मीर के साथ लद्दाख को भी समान अधिकार देने का वादा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन वादों को पूरा करने के बजाय सरकार दमनकारी रवैया अपना रही है। तिवारी ने कहा कि मणिपुर को पिछले दो साल से संभाल नहीं पाए और अब लद्दाख में हालात हाथ से निकल गए।
लद्दाख में हिंसा और पाबंदियां
लेह में 24 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के जुटने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और बिना लिखित अनुमति के जुलूस, रैली या मार्च निकालने पर रोक है।
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ये भी पढ़ें- रेवंत रेड्डी का पिछड़ों को तोहफा: अब स्थानीय निकायों में मिलेगा 42% आरक्षण; राष्ट्रपति की मंजूरी पर टिकी नजर
लोगों की परेशानी
स्थानीय लोगों ने सरकार से प्रतिबंध हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि वे दूध और खाद्यान्न जैसी बुनियादी चीजें भी नहीं खरीद पा रहे हैं। भारी सुरक्षा के बीच लोग जैसे-तैसे अपने दैनिक कामकाज को जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।
हिंसा में आगजनी और मौतें
हिंसा के दौरान भाजपा का कार्यालय आग के हवाले कर दिया गया था। इस झड़प में चार लोगों की मौत हुई। दो दिन बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर केंद्रीय जेल भेज दिया गया। उन पर हिंसा भड़काने का आरोप है।
ये भी पढ़ें- हाईकोर्ट के आदेश पर 'सुप्रीम' मुहर, उत्तराखंड EC की याचिका खारिज; लगाया दो लाख का जुर्माना
सोनम वांगचुक की भूमिका
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। वह भूख हड़ताल पर भी थे, लेकिन हिंसा भड़कने के तुरंत बाद उन्होंने इसे खत्म कर दिया। छठी अनुसूची फिलहाल पूर्वोत्तर के असम, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय राज्यों में लागू है और इसमें आदिवासी क्षेत्रों को विशेष अधिकार मिलते हैं।
दमन नहीं संवाद से निकलेगा हल- प्रमोद तिवारी
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि लद्दाख भारत की संवेदनशील सीमा है, जहां चीन से सटी रेखा की सुरक्षा सबसे अहम है। लेकिन सरकार आंतरिक असंतोष को संभालने में विफल रही है। ऐसे हालात से पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों को फायदा मिल सकता है। तिवारी ने केंद्र को आगाह किया कि दमन और गिरफ्तारियां लद्दाख में शांति की गारंटी नहीं दे सकतीं।
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प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने राज्य का दर्जा बहाल करने और जम्मू-कश्मीर के साथ लद्दाख को भी समान अधिकार देने का वादा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन वादों को पूरा करने के बजाय सरकार दमनकारी रवैया अपना रही है। तिवारी ने कहा कि मणिपुर को पिछले दो साल से संभाल नहीं पाए और अब लद्दाख में हालात हाथ से निकल गए।
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लद्दाख में हिंसा और पाबंदियां
लेह में 24 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के जुटने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और बिना लिखित अनुमति के जुलूस, रैली या मार्च निकालने पर रोक है।
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स्थानीय लोगों ने सरकार से प्रतिबंध हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि वे दूध और खाद्यान्न जैसी बुनियादी चीजें भी नहीं खरीद पा रहे हैं। भारी सुरक्षा के बीच लोग जैसे-तैसे अपने दैनिक कामकाज को जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।
हिंसा में आगजनी और मौतें
हिंसा के दौरान भाजपा का कार्यालय आग के हवाले कर दिया गया था। इस झड़प में चार लोगों की मौत हुई। दो दिन बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर केंद्रीय जेल भेज दिया गया। उन पर हिंसा भड़काने का आरोप है।
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सोनम वांगचुक की भूमिका
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। वह भूख हड़ताल पर भी थे, लेकिन हिंसा भड़कने के तुरंत बाद उन्होंने इसे खत्म कर दिया। छठी अनुसूची फिलहाल पूर्वोत्तर के असम, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय राज्यों में लागू है और इसमें आदिवासी क्षेत्रों को विशेष अधिकार मिलते हैं।
दमन नहीं संवाद से निकलेगा हल- प्रमोद तिवारी
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि लद्दाख भारत की संवेदनशील सीमा है, जहां चीन से सटी रेखा की सुरक्षा सबसे अहम है। लेकिन सरकार आंतरिक असंतोष को संभालने में विफल रही है। ऐसे हालात से पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों को फायदा मिल सकता है। तिवारी ने केंद्र को आगाह किया कि दमन और गिरफ्तारियां लद्दाख में शांति की गारंटी नहीं दे सकतीं।