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लद्दाख: पूर्व सांसद छेवांग ने गृह मंत्रालय के साथ वार्ता को बताया सकारात्मक, दो संगठनों की चुप्पी पर उठाए सवाल
Sat, 12 Sep 2026 05:12 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 12 Sep 2026 05:12 PM IST
सार
लद्दाख के पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग ने 9 सितंबर की गृह मंत्रालय बैठक को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक सुरक्षा, भर्ती, यूटी-स्तरीय निकाय, जिला परिषद चुनाव और वित्तीय अधिकारों पर प्रगति हुई। छेवांग ने आंदोलन फिर शुरू करने की अपील की आलोचना करते हुए बातचीत और संस्थागत समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही।
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थुपस्तान छेवांग, लद्दाख के पूर्व सांसद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
लद्दाख के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता थुपस्तान छेवांग ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय में 9 सितंबर को 'लेह एपेक्स बॉडी' और 'कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस' (केडीए) के प्रतिनिधियों की बैठक सकारात्मक रही है। इसमें लद्दाख से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के नतीजों को बाद में जिस तरह से जनता के सामने पेश किया गया, उस पर निराशा जताते हुए छेवांग ने कहा कि बैठक के दौरान हुई कई सकारात्मक बातें और जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी, उन्हें लोगों के सामने नहीं लाया गया। इसके उलट, नेशनल और सोशल मीडिया में ऐसी बातें फैलाई गईं कि बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई।
तय एजेंडे से हटकर कोई बात नहीं हुई
पूर्व सांसद छेवांग ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि उन्होंने ही बातचीत का नेतृत्व किया था और याद दिलाया कि एपेक्स बॉडी के गठन में उनकी अहम भूमिका थी। उनके मुताबिक, गृह मंत्रालय के साथ एपेक्स बॉडी और केडीए की हालिया बातचीत में तय एजेंडे से हटकर कोई बात नहीं हुई। हालांकि पहले वे अपनी मर्जी से एपेक्स बॉडी से दूर रहे थे, लेकिन बाद में सोनम वांगचुक, गोबा और रिग्जिन जोरा के मनाने पर वे फिर से इसमें शामिल हो गए। समय के साथ अलग-अलग विचारधाराओं और राजनीतिक एजेंडे वाले लोग भी इस आंदोलन से जुड़ गए, जबकि लद्दाख की मांगों को लेकर उनका अपना रुख शुरू से ही एक जैसा रहा है।
सुरक्षा उपायों और भर्ती पर सहमति
छेवांग के मुताबिक, वे आम तौर से इन मामलों पर मीडिया में आने से बचते रहे हैं, लेकिन कई दौर की बातचीत के बाद हुई सकारात्मक प्रगति को देखते हुए उन्हें अब बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा। गृह मंत्रालय में भर्ती और संवैधानिक सुरक्षा उपायों सहित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई थी। लंबी बातचीत के बाद कई पहलुओं पर सहमति बनी, जिसमें अनुच्छेद 371 के तहत सुरक्षा उपायों की मांग भी शामिल थी, जिस पर 22 मई की बैठक में चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत शामिल किए जाने की मांगें व्यापक राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनी रहीं, लेकिन अंततः चर्चा लद्दाख के लिए व्यावहारिक संवैधानिक और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय खोजने की दिशा में आगे बढ़ी।
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हालिया बैठक में यूटी-स्तर की संस्था पर चर्चा
केंद्रीय गृह मंत्रालय की हालिया बैठक का जिक्र करते हुए छेवांग ने कहा कि प्रस्तावित यूटी-स्तरीय प्रतिनिधि संस्था उन प्रमुख मुद्दों में से एक थी, जिन पर चर्चा की गई। एपेक्स बॉडी से सरकार के सामने अपने सुझाव रखने को कहा गया। उनके अनुसार, एपेक्स चेयरमैन शेरिंग दोरजे लाक्रुक ने आगे बढ़ने से पहले सरकार का ड्राफ्ट देखने की बात कही। इसके बाद प्रतिभागियों के सामने एक रूपरेखा रखी गई और सुझाव मांगे गए, जिसमें यूटी-स्तरीय संस्था के प्रस्तावित नाम और संरचना के बारे में सुझाव भी शामिल थे। इस बात पर भी चर्चा हुई कि यूटी-स्तरीय संस्था के गठन से पहले मौजूदा जिला-स्तरीय परिषदों के चुनाव होने चाहिए।
सभी जिलों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव और एलएएचडीसी
छेवांग ने कहा, एपेक्स बॉडी और केडीए ने प्रत्यक्ष चुनाव के मुद्दे पर चर्चा की और चुनावी प्रक्रिया के संबंध में कई विकल्पों पर विचार किया गया। चर्चा किए गए विकल्पों में से एक यह था कि सभी जिलों में एलएएचडीसी स्थापित किए जाएं और उसके बाद प्रत्यक्ष चुनाव हों। बैठक के अपने विवरण के अनुसार छेवांग के मुताबिक, सभी विकल्पों पर चर्चा करने के बाद यह राय बनी कि प्रत्यक्ष चुनाव होने चाहिए। उन्होंने लद्दाख की जनजातीय पहचान पर भी जोर दिया और कहा कि अनुसूचित जनजातियों की मौजूदगी को देखते हुए, प्रस्तावित व्यवस्था में पर्याप्त प्रतिनिधित्व और नामांकन के प्रावधान होने चाहिए।
भूमि, संस्कृति, पर्यावरण और खनिज शामिल
एपेक्स बॉडी ने प्रस्ताव दिया कि प्रस्तावित यूटी-स्तरीय विधायिका का महत्वपूर्ण विषयों, विशेष रूप से भूमि, संस्कृति, पर्यावरण और खनिजों पर नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वित्तीय नियंत्रण भी प्रस्तावित यूटी-लेवल बॉडी के पास ही रहना चाहिए। उनके अनुसार, बैठक में इन बिंदुओं पर चर्चा हुई और उन पर सहमति बनी। निर्वाचन क्षेत्रों और सभी इलाकों में समान प्रतिनिधित्व व अधिकार सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों से सुझाव मांगे गए। छेवांग ने कहा, चर्चा इस स्तर पर पहुंची, जिससे यह स्पष्ट हो गया था कि प्रस्तावित यूटी-लेवल बॉडी को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। चर्चा के दौरान के माहौल को याद करते हुए छेवांग ने कहा कि एक पल ऐसा भी आया जब उन्होंने प्रगति की सराहना की और कहा, अब हमें एक पार्टी बनानी चाहिए। इससे यह संकेत मिलता है कि संस्थागत ढांचा तय होने के बाद एक संगठित राजनीतिक ढांचे की ओर बढ़ना महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने गृह मंत्रालय की बैठक को असफल बताने की कोशिशों की आलोचना की है।
चुनाव और यूटी-लेवल बॉडी के समय पर मतभेद
छेवांग ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक और केडीए के कुछ वर्ग इस बात पर जोर देते रहे कि ध्यान यूटी-लेवल बॉडी पर ही रहना चाहिए। चुनाव तुरंत नहीं हों। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बहस हुई, लेकिन उनका मानना था कि एलएएचडीसी चुनाव और परिषद के ढांचे को लागू करने का काम होना चाहिए, जबकि यूटी-लेवल बॉडी को बाद में स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि आगे बढ़ने में देरी गृह मंत्रालय की तरफ से नहीं, बल्कि प्रस्तावित संस्थाओं के क्रम और उन्हें लागू करने को लेकर एपेक्स बॉडी और केडीए के बीच मतभेदों के कारण हुई। छेवांग के अनुसार, अब उम्मीद है कि हुई चर्चाओं के आधार पर यूटी-लेवल बॉडी के लिए सरकारी ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
फंड, कैडर और भर्ती को लेकर चुप्पी पर सवाल
छेवांग ने यह भी सवाल उठाया कि एपेक्स बॉडी और केडीए ने लद्दाख के लिए कई सकारात्मक बदलावों के बारे में सार्वजनिक रूप से बात क्यों नहीं की। केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) को अतिरिक्त वित्तीय मदद मिलने के बाद लद्दाख को काफी फंड मिला है। कैडर व भर्ती की प्रक्रियाएं भी आगे बढ़ी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सिर्फ मांगों और आंदोलन पर ध्यान देने के बजाय इन बदलावों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए। इनकी सराहना की जानी चाहिए थी।
शहीदों-घायलों का मुआवजा और केस वापस लेना
छेवांग ने आगे दावा किया कि जान गंवाने वालों और घायल हुए लोगों को मुआवजा देने, साथ ही 24 सितंबर, 2025 की अशांति से जुड़े केस वापस लेने के मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। उन्होंने चिंता जताई कि बैठक के बाद सार्वजनिक जानकारी में इन पहलुओं पर बात नहीं की गई। उनके अनुसार, एपेक्स बॉडी और केडीए की सार्वजनिक जानकारी मुख्य रूप से काउंसिल चुनावों और यूटी-स्तर की संस्था पर केंद्रित थी, जिसमें मुआवजे और केस पर हुई चर्चा का पर्याप्त जिक्र नहीं था। छेवांग ने सोनम वांगचुक की ओर से फिर से आंदोलन शुरू करने की कथित अपील और लद्दाख की मांगों को पूरा करने से जुड़ी चेतावनी की भी आलोचना की। उन्होंने एक और आंदोलन की जरूरत पर सवाल उठाया, जबकि उनके अनुसार, गृह मंत्रालय के साथ बातचीत से काफी प्रगति हुई थी। लद्दाख पहले ही 24 सितंबर की घटना के गंभीर परिणाम देख चुका है और ऐसी किसी भी गतिविधि के खिलाफ चेतावनी दी जिससे वैसी स्थिति फिर से पैदा हो सकती है।
आंदोलन करना है, तो कारगिल में करें
एक तीखे बयान में, छेवांग ने कहा कि अगर सोनम वांगचुक और एपेक्स बॉडी अभी भी आंदोलन जारी रखना चाहते हैं, तो उन्हें कारगिल में इसे करने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि उनके अनुसार, कुछ मांगों को आगे बढ़ाने में कारगिल की ज्यादा दिलचस्पी है। लेह ने वर्षों तक संघर्ष देखा है, जबकि कारगिल को आंदोलन के बाद हुए बदलावों से फ़ायदा हुआ है। छेवांग ने आंदोलन में अन्य राजनीतिक दलों को शामिल करने की कोशिशों पर भी सवाल उठाए और कहा कि लेह पहले ही लंबे संघर्ष का अनुभव कर चुका है और अब राजनीतिक रणनीति पर सावधानी से विचार करने की जरूरत है। मीडिया के साथ अपनी बात खत्म करते हुए, छेवांग ने एपेक्स बॉडी और सोनम वांगचुक से जिम्मेदारी से काम लेने और ऐसा कोई भी कदम न उठाने की अपील की जिससे लद्दाख में फिर से तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो सकती है।
आंदोलन के नतीजों की जिम्मेदारी लेनी होगी
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आंदोलन फिर से शुरू हुआ और 24 सितंबर जैसी स्थिति दोबारा बनी, तो ऐसे आंदोलन की अगुवाई करने या उसका आह्वान करने वालों को नतीजों की जिम्मेदारी लेनी होगी। छेवांग का कहना था कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ हुई बातचीत को बातचीत से हुई प्रगति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनका मानना था कि तुरंत टकराव की स्थिति में लौटने के बजाय, अब ध्यान प्रस्तावित यूटी-स्तरीय निकाय को अंतिम रूप देने, जिला परिषदों को मजबूत करने, संवैधानिक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने और एक सहमत संस्थागत ढांचे के जरिए आगे बढ़ने पर होना चाहिए।
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तय एजेंडे से हटकर कोई बात नहीं हुई
पूर्व सांसद छेवांग ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि उन्होंने ही बातचीत का नेतृत्व किया था और याद दिलाया कि एपेक्स बॉडी के गठन में उनकी अहम भूमिका थी। उनके मुताबिक, गृह मंत्रालय के साथ एपेक्स बॉडी और केडीए की हालिया बातचीत में तय एजेंडे से हटकर कोई बात नहीं हुई। हालांकि पहले वे अपनी मर्जी से एपेक्स बॉडी से दूर रहे थे, लेकिन बाद में सोनम वांगचुक, गोबा और रिग्जिन जोरा के मनाने पर वे फिर से इसमें शामिल हो गए। समय के साथ अलग-अलग विचारधाराओं और राजनीतिक एजेंडे वाले लोग भी इस आंदोलन से जुड़ गए, जबकि लद्दाख की मांगों को लेकर उनका अपना रुख शुरू से ही एक जैसा रहा है।
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सुरक्षा उपायों और भर्ती पर सहमति
छेवांग के मुताबिक, वे आम तौर से इन मामलों पर मीडिया में आने से बचते रहे हैं, लेकिन कई दौर की बातचीत के बाद हुई सकारात्मक प्रगति को देखते हुए उन्हें अब बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा। गृह मंत्रालय में भर्ती और संवैधानिक सुरक्षा उपायों सहित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई थी। लंबी बातचीत के बाद कई पहलुओं पर सहमति बनी, जिसमें अनुच्छेद 371 के तहत सुरक्षा उपायों की मांग भी शामिल थी, जिस पर 22 मई की बैठक में चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत शामिल किए जाने की मांगें व्यापक राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनी रहीं, लेकिन अंततः चर्चा लद्दाख के लिए व्यावहारिक संवैधानिक और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय खोजने की दिशा में आगे बढ़ी।
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हालिया बैठक में यूटी-स्तर की संस्था पर चर्चा
केंद्रीय गृह मंत्रालय की हालिया बैठक का जिक्र करते हुए छेवांग ने कहा कि प्रस्तावित यूटी-स्तरीय प्रतिनिधि संस्था उन प्रमुख मुद्दों में से एक थी, जिन पर चर्चा की गई। एपेक्स बॉडी से सरकार के सामने अपने सुझाव रखने को कहा गया। उनके अनुसार, एपेक्स चेयरमैन शेरिंग दोरजे लाक्रुक ने आगे बढ़ने से पहले सरकार का ड्राफ्ट देखने की बात कही। इसके बाद प्रतिभागियों के सामने एक रूपरेखा रखी गई और सुझाव मांगे गए, जिसमें यूटी-स्तरीय संस्था के प्रस्तावित नाम और संरचना के बारे में सुझाव भी शामिल थे। इस बात पर भी चर्चा हुई कि यूटी-स्तरीय संस्था के गठन से पहले मौजूदा जिला-स्तरीय परिषदों के चुनाव होने चाहिए।
सभी जिलों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव और एलएएचडीसी
छेवांग ने कहा, एपेक्स बॉडी और केडीए ने प्रत्यक्ष चुनाव के मुद्दे पर चर्चा की और चुनावी प्रक्रिया के संबंध में कई विकल्पों पर विचार किया गया। चर्चा किए गए विकल्पों में से एक यह था कि सभी जिलों में एलएएचडीसी स्थापित किए जाएं और उसके बाद प्रत्यक्ष चुनाव हों। बैठक के अपने विवरण के अनुसार छेवांग के मुताबिक, सभी विकल्पों पर चर्चा करने के बाद यह राय बनी कि प्रत्यक्ष चुनाव होने चाहिए। उन्होंने लद्दाख की जनजातीय पहचान पर भी जोर दिया और कहा कि अनुसूचित जनजातियों की मौजूदगी को देखते हुए, प्रस्तावित व्यवस्था में पर्याप्त प्रतिनिधित्व और नामांकन के प्रावधान होने चाहिए।
भूमि, संस्कृति, पर्यावरण और खनिज शामिल
एपेक्स बॉडी ने प्रस्ताव दिया कि प्रस्तावित यूटी-स्तरीय विधायिका का महत्वपूर्ण विषयों, विशेष रूप से भूमि, संस्कृति, पर्यावरण और खनिजों पर नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वित्तीय नियंत्रण भी प्रस्तावित यूटी-लेवल बॉडी के पास ही रहना चाहिए। उनके अनुसार, बैठक में इन बिंदुओं पर चर्चा हुई और उन पर सहमति बनी। निर्वाचन क्षेत्रों और सभी इलाकों में समान प्रतिनिधित्व व अधिकार सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों से सुझाव मांगे गए। छेवांग ने कहा, चर्चा इस स्तर पर पहुंची, जिससे यह स्पष्ट हो गया था कि प्रस्तावित यूटी-लेवल बॉडी को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। चर्चा के दौरान के माहौल को याद करते हुए छेवांग ने कहा कि एक पल ऐसा भी आया जब उन्होंने प्रगति की सराहना की और कहा, अब हमें एक पार्टी बनानी चाहिए। इससे यह संकेत मिलता है कि संस्थागत ढांचा तय होने के बाद एक संगठित राजनीतिक ढांचे की ओर बढ़ना महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने गृह मंत्रालय की बैठक को असफल बताने की कोशिशों की आलोचना की है।
चुनाव और यूटी-लेवल बॉडी के समय पर मतभेद
छेवांग ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक और केडीए के कुछ वर्ग इस बात पर जोर देते रहे कि ध्यान यूटी-लेवल बॉडी पर ही रहना चाहिए। चुनाव तुरंत नहीं हों। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बहस हुई, लेकिन उनका मानना था कि एलएएचडीसी चुनाव और परिषद के ढांचे को लागू करने का काम होना चाहिए, जबकि यूटी-लेवल बॉडी को बाद में स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि आगे बढ़ने में देरी गृह मंत्रालय की तरफ से नहीं, बल्कि प्रस्तावित संस्थाओं के क्रम और उन्हें लागू करने को लेकर एपेक्स बॉडी और केडीए के बीच मतभेदों के कारण हुई। छेवांग के अनुसार, अब उम्मीद है कि हुई चर्चाओं के आधार पर यूटी-लेवल बॉडी के लिए सरकारी ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
फंड, कैडर और भर्ती को लेकर चुप्पी पर सवाल
छेवांग ने यह भी सवाल उठाया कि एपेक्स बॉडी और केडीए ने लद्दाख के लिए कई सकारात्मक बदलावों के बारे में सार्वजनिक रूप से बात क्यों नहीं की। केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) को अतिरिक्त वित्तीय मदद मिलने के बाद लद्दाख को काफी फंड मिला है। कैडर व भर्ती की प्रक्रियाएं भी आगे बढ़ी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सिर्फ मांगों और आंदोलन पर ध्यान देने के बजाय इन बदलावों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए। इनकी सराहना की जानी चाहिए थी।
शहीदों-घायलों का मुआवजा और केस वापस लेना
छेवांग ने आगे दावा किया कि जान गंवाने वालों और घायल हुए लोगों को मुआवजा देने, साथ ही 24 सितंबर, 2025 की अशांति से जुड़े केस वापस लेने के मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। उन्होंने चिंता जताई कि बैठक के बाद सार्वजनिक जानकारी में इन पहलुओं पर बात नहीं की गई। उनके अनुसार, एपेक्स बॉडी और केडीए की सार्वजनिक जानकारी मुख्य रूप से काउंसिल चुनावों और यूटी-स्तर की संस्था पर केंद्रित थी, जिसमें मुआवजे और केस पर हुई चर्चा का पर्याप्त जिक्र नहीं था। छेवांग ने सोनम वांगचुक की ओर से फिर से आंदोलन शुरू करने की कथित अपील और लद्दाख की मांगों को पूरा करने से जुड़ी चेतावनी की भी आलोचना की। उन्होंने एक और आंदोलन की जरूरत पर सवाल उठाया, जबकि उनके अनुसार, गृह मंत्रालय के साथ बातचीत से काफी प्रगति हुई थी। लद्दाख पहले ही 24 सितंबर की घटना के गंभीर परिणाम देख चुका है और ऐसी किसी भी गतिविधि के खिलाफ चेतावनी दी जिससे वैसी स्थिति फिर से पैदा हो सकती है।
आंदोलन करना है, तो कारगिल में करें
एक तीखे बयान में, छेवांग ने कहा कि अगर सोनम वांगचुक और एपेक्स बॉडी अभी भी आंदोलन जारी रखना चाहते हैं, तो उन्हें कारगिल में इसे करने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि उनके अनुसार, कुछ मांगों को आगे बढ़ाने में कारगिल की ज्यादा दिलचस्पी है। लेह ने वर्षों तक संघर्ष देखा है, जबकि कारगिल को आंदोलन के बाद हुए बदलावों से फ़ायदा हुआ है। छेवांग ने आंदोलन में अन्य राजनीतिक दलों को शामिल करने की कोशिशों पर भी सवाल उठाए और कहा कि लेह पहले ही लंबे संघर्ष का अनुभव कर चुका है और अब राजनीतिक रणनीति पर सावधानी से विचार करने की जरूरत है। मीडिया के साथ अपनी बात खत्म करते हुए, छेवांग ने एपेक्स बॉडी और सोनम वांगचुक से जिम्मेदारी से काम लेने और ऐसा कोई भी कदम न उठाने की अपील की जिससे लद्दाख में फिर से तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो सकती है।
आंदोलन के नतीजों की जिम्मेदारी लेनी होगी
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आंदोलन फिर से शुरू हुआ और 24 सितंबर जैसी स्थिति दोबारा बनी, तो ऐसे आंदोलन की अगुवाई करने या उसका आह्वान करने वालों को नतीजों की जिम्मेदारी लेनी होगी। छेवांग का कहना था कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ हुई बातचीत को बातचीत से हुई प्रगति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनका मानना था कि तुरंत टकराव की स्थिति में लौटने के बजाय, अब ध्यान प्रस्तावित यूटी-स्तरीय निकाय को अंतिम रूप देने, जिला परिषदों को मजबूत करने, संवैधानिक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने और एक सहमत संस्थागत ढांचे के जरिए आगे बढ़ने पर होना चाहिए।