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Ladakh: चीन ने डेमचोक में LAC के पास बसाया गांव, भारत ने भी जवाब में पर्यटकों को लेकर शुरू किया ये खास ट्रायल!
सार
जियो-इंटेलिजेंस एक्सपर्ट नेचर देसाई ने ईएसए इमेजरी की सैटेलाइट इमेज जारी की हैं, जिसमें पूर्वी लददाख के डेमचोक सेक्टर में इसी साल 2024 में गर्मियों की शुरुआत में एक नया गांव जियाओकांग बसाना शुरू कर दिया है। यह इलाका भारतीय सीमा के साथ डेमचोक सेक्टर से सटा हुआ है।
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LAC Row
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
चीन ने पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो पर पुल बनाने के बाद डेमचोक इलाके पर भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से सटे डेमचोक सेक्टर में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने एक नया गांव बसाना शुरू कर दिया है। सैटेलाइट इमेज में खुलासा हुआ है कि नए गांव में 100 नई इमारतें दिखाई दे रही हैं। चीन का यह नया गांव LAC से लगभग 17 किमी दूर है।
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चीन डेमचोक में भी अपनी वही पुरानी सलामी स्लाइसिंग रणनीति का प्रयोग कर रहा है। देपसांग और डेमचोक लद्दाख में दो ऐसे बिंदु हैं, जहां भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच गतिरोध जारी है। 2018 में चीन ने डेमचोक सेक्टर में चारडिंग निलुंग नाला पर टेंट लगा दिए थे, ताकि इस इलाके में भारतीय सैनिकों की पहुंच को रोका जा सके।
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नए गांव का नाम जियाओकांग
जियो-इंटेलिजेंस एक्सपर्ट नेचर देसाई ने ईएसए इमेजरी की सैटेलाइट इमेज जारी की हैं, जिसमें पूर्वी लददाख के डेमचोक सेक्टर में इसी साल 2024 में गर्मियों की शुरुआत में एक नया गांव जियाओकांग बसाना शुरू कर दिया है। यह इलाका भारतीय सीमा के साथ डेमचोक सेक्टर से सटा हुआ है। चीन की इस कार्रवाई से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि वह 2020 में गलवान में हुए बढ़े तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर चल रही बातचीत के बावजूद, एलएसी पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वह एक तरफ तो बातचीत का ढोंग कर रहा है, तो दूसरी तरफ एलएसी पर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा हुआ है।
2018 में चीन ने डेमचोक के भीतर गाड़ दिए थे टेंट
सैटेलाइट तस्वीरों में चीन के नए गांव जियाओकांग में लगभग 100 नई इमारतें दिखाई दे रही हैं। यह गांव पूर्वी लद्दाख में एलएसी से लगभग 10 मील की दूरी पर स्थित हैं। सूत्रों का कहना है कि इस गांव का इस्तेमाल चरवाहों के रहने के लिए किया जा सकता है। चरवाहों के नेटवर्क के जरिए चीन को सीमा निगरानी और पेट्रोलिंग में मदद मिलती है। हालांकि यह गांव चीनी क्षेत्र में है, लेकिन एलएसी के बेहद करीब है। 2018 में चीन ने डेमचोक के चार्डिंग निलुंग नाला में टेंट लगा दिए थे, ताकि इलाके में भारतीय सैनिकों की पहुंच को रोका जा सके। वहीं गलवान में हुई हिंसा के बाद भारत और चीन में गतिरोध पैदा हो गया था।
डेमचोक में अंदर तक जाएंगे पर्यटक!
लद्दाख में तैनात सेना के वरिष्ठ सूत्रों ने बताया कि डेमचोक इलाके में चीन की गतिविधियों को लेकर सरकार काफी गंभीर हैं। सरकार वहां पर्यटन को बढ़ाने की रणनीति पर काम कर ही है। इस रणनीति के तहत डेमचोक को पर्यटकों के लिए खोला जा रहा है। डेमचोक में जहां अभी तक पर्यटक डेमटोक के एंट्री पॉइंट पर स्थित चौकी तक ही जा पाते थे, तो वहीं ट्रायल के स्तर पर अभी कुछ बाइकर्स को डेमचोक के अंदर जाने की इजाजत दी गई है। वे चार्डिंग नाले तक जा पा रहे हैं। इस इलाके को सभी तरह के पर्यटकों को खोलने को लेकर अभी विचार-विमर्श जारी है।
डेमचोक में सबसे ऊंची सड़क बना रहा भारत
भारत भी डेमचोक इलाके में सबसे ऊंची मोटरेबल रोड बना रहा है। हानले के निकट बनने वाली लिकारू-मिग ला-फुक्चे सड़क 64 किलोमीटर लंबी होगी, जिसकी ऊंचाई 19,400 फीट होगी। इसके पूरा होने के बाद यह दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क बन जाएगी। दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क का वर्तमान रिकॉर्ड लद्दाख में 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित उमलिंग ला रोड का है, जिसे बीआरओ ने ही बनाया है। 52 किलोमीटर लंबी यह सड़क चिशुमले को डेमचोक से जोड़ती है, जो एलएसी पर स्थित है। वहीं लिकारू को फुक्चे से जोड़ने वाली यह सड़क पूर्वी लद्दाख में एलएसी से मात्र तीन किलोमीटर दूर है।
पैंगोंग त्सो पर चीन ने बनाया पुल
इससे पहले 17 जुलाई 2024 की सैटेलाइट इमेज से जानकारी मिली थी कि चीन ने पैंगोंग त्सो पुल बना कर तैयार कर लिया है, वहीं पुल पर सड़क भी बन कर तैयार है। यह पुल अक्तूबर 2021 के आसपास बनना शुरू हुआ था। इस पुल को 134 किलोमीटर लंबी पैंगोंग झील के सबसे संकरे बिंदु पर स्थित खुर्नक किले के पास बनाया जा रहा है। चीन ने जून 1958 में खुर्नक किले के आसपास के इलाके पर कब्जा कर लिया था। यह पुल पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे को दक्षिणी किनारे से जोड़ेगा, जिससे चीन को एक किनारे से दूसरे किनारे पर तेजी से सेना भेजने में आसानी हो जाएगी। साथ ही अग्रिम इलाकों में सप्लाई और रसद की तेजी से आवाजाही भी हो सकेगी। इसके अलावा दक्षिण किनारे पर स्थित रेजांग ला के नजदीक स्पांगुर त्सो तक पहुंच आसान हो जाएगी।
डेपसांग-डेमचोक पर अभी कोई बात नहीं
वहीं, 25 जुलाई लाओस की राजधानी वीएनतियान में विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। जिसमें सीमा पर जारी तनाव को जल्द खत्म करने के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों के दूसरे पहलुओं पर बात हुई। जयशंकर और वांग यी के बीच इसके पहले चार जुलाई को अस्ताना में शंघाई सहयोग संगठन के दौरान बैठक हुई थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पूर्वी लद्दाख में विवादित सीमा पर कम से कम दो बिंदुओं पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच गतिरोध जारी है। भारतीय इलाके के लगभग 18 किमी अंदर डेपसांग के पूर्व में 'बॉटलनेक' या 'वाई-जंक्शन' में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने भारतीय सैनिकों को उनके पेट्रोलिंग पॉइंट्स 10, 11, 11अल्फा, 12 और 13 पर जाने से रोक हुआ है। वहीं डेमचोक में भी टकराव जारी है। इससे पहले चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने डेमचोक में सीएनएन जंक्शन पर सैडल पास के नजदीक एलएसी के भीतर चरवाहों की मौजूदगी पर आपत्ति जता चुके हैं।
सलामी स्लाइसिंग को टक्कर दे रहा वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम
वहीं, चीन से सलामी स्लाइसिंग रणनीति से निपटने के लिए भारत भी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को अमली जामा पहना रहा है, ताकि चीन के साथ एलएसी पर बसे गांवों में पलायन को रोका जा सके। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को सरकार कितना महत्व दे रही है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में कार्यभार संभालने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 जुलाई को एक उच्च स्तरीय बैठक में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के प्रबंधन की समीक्षा की थी। 2024-25 के केंद्रीय बजट में सरकार ने अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के 19 जिलों के गांवों के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) के लिए 1,050 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। सरकार ने 15 फरवरी, 2023 को वीवीपी को मंजूरी दी थी, जिसमें उत्तरी सीमा से सटे 46 ब्लॉकों के इन गांवों के विकास के लिए 2022-23 से 2025-26 के लिए 4,800 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।