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Kerala: कुवैत के बैंक ने केरल की नर्सों पर लगाया 700 करोड़ का कर्ज न चुकाने का आरोप, प्राथमिकियां दर्ज
Tue, 10 Dec 2024 04:33 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 10 Dec 2024 04:33 PM IST
सार
Kerala: कुवैत के एक बैंक ने केरल के कई लोगों पर 700 करोड़ रुपये के ऋण न चुकाने का आरोप लगाया है। इनमें अधिकांश कुवैत में काम करने वाली नर्सें शामिल हैं। राज्य के कई थानों में प्राथमिकियां दर्ज की गईं हैं।
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जांच में जुटी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
कुवैत के एक प्रमुख बैंक ने केरल के विभिन्न थानों में शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि राज्य के 1,400 से अधिक लोगों ने कुवैत में काम करते समय जो बड़े कर्ज लिए थे, उन्हें चुकाने में विफल रहे हैं। इनमें अधिकांश नर्सें शामिल हैं। इन ऋणों की राशि करीब 700 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
बैंक के मुताबिक, कुवैत में काम करने के बाद ऋण न चुका पाने वाले ज्यादातर लोग कुवैत से अपने गृह राज्य लौट आए या फिर अन्य देशों में चले गए। इसलिए कुवैत के बैंक केएससीपी (कुवैत शेयरहोल्डिंग कंपनी) ने केरल पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि राज्य में 10 प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। इनमें से आठ प्राथमिकियां एर्नाकुलम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों और एक कुट्टयम में दर्ज की गई हैं। ये मामले बैंक के उप प्रबंधक मोहम्मद अब्दुल वेसी कामरान की शिकायत के बाद दर्ज किए गए हैं।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि ज्यादातर मामले पिछले महीने दर्ज किए गए और इन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406, 420, 120-बी, 34 आदि के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
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'अधिकांश नर्सों ने कोरोना महामारी के दौरान ऋण लिए'
बैंक को कानूनी मदद देने वाले वकील थॉमस जे. अनक्कुलुंकल ने इसे बड़ी धोखाधड़ी बताते हुए कहा कि इन लोगों ने बैंक से 75 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक के कर्ज लिए थे। उन्होंने बताया कि कुवैत के सरकारी अस्पतालों में काम करने वाली अधिकांस नर्सों ने कोरोना महामारी के दौरान ऋण लिया था और ये ऋण उन्होंने अपने वेतन प्रमाण पत्रों के आधार पर प्राप्त किए थे। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1,400 से ज्यादा लोगों ने करीब 700 करोड़ रुपये के ऋण का भुगतान नहीं किया।
'बैंक का भरोसा हासिल करने के लिए पहले लिए छोटे ऋण'
वकील ने आगे बताया कि इन लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी की। ये लोग पहले छोटे ऋण लेते थे और उन्हें बिना किसी परेशानी के चुका देते थे, जिससे वे बैंक अधिकारियों का भरोसा हासिल कर लेते थे। बाद में वे बड़े ऋण लेते, जिनकी राशि 75 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक होती और इनकी किस्तें भी दो-तीन बार समय पर चुकाते। इसके बाद वे छुट्टी के बहाने कुवैत से अपने अपने गृह राज्य वापस जाते और फिर कभी वापस नहीं लौटते या बाकी किस्तों का भुगतान नहीं करते।
'गृह मंत्रालय के सामने उठाया मुद्दा'
उन्होंने बताया कि कुवैत के बैंक ने इस मामले को भारत के गृह मंत्रालय के सामने उठाया, जो इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। वकील ने कहा, बैंक के पास इन लोगों के पासपोर्ट की जानकारी और घर के पते थे, इसलिए उन्हें ढूंढना और शिकायत दर्ज करना मुश्किल नहीं है।
'कई अन्य देश भी दर्ज करा सकते हैं इसी तरह की शिकायतें'
वकील ने यह भी कहा कि केवल कुवैत ही नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया के अन्य कई संस्थानी भी इसी तरह की धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं और वे भी इसी तरह शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कर्ज न चुकाने वाले लोगों के उस दावे को भी खारिज किया कि उन्होंने कोरोना महामारी के कारण नौकरी खोने के बाद ऋण की किस्तें चुकाने में असमर्थता जताई थी। वकील ने कहा कि यह एक झूठा बहाना है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच जारी है और कुछ कर्ज न चुकाने वाले लोगों ने राशि वापस करने की इच्छा जताई है।
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बैंक के मुताबिक, कुवैत में काम करने के बाद ऋण न चुका पाने वाले ज्यादातर लोग कुवैत से अपने गृह राज्य लौट आए या फिर अन्य देशों में चले गए। इसलिए कुवैत के बैंक केएससीपी (कुवैत शेयरहोल्डिंग कंपनी) ने केरल पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि राज्य में 10 प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। इनमें से आठ प्राथमिकियां एर्नाकुलम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों और एक कुट्टयम में दर्ज की गई हैं। ये मामले बैंक के उप प्रबंधक मोहम्मद अब्दुल वेसी कामरान की शिकायत के बाद दर्ज किए गए हैं।
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पुलिस सूत्रों ने बताया कि ज्यादातर मामले पिछले महीने दर्ज किए गए और इन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406, 420, 120-बी, 34 आदि के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
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'अधिकांश नर्सों ने कोरोना महामारी के दौरान ऋण लिए'
बैंक को कानूनी मदद देने वाले वकील थॉमस जे. अनक्कुलुंकल ने इसे बड़ी धोखाधड़ी बताते हुए कहा कि इन लोगों ने बैंक से 75 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक के कर्ज लिए थे। उन्होंने बताया कि कुवैत के सरकारी अस्पतालों में काम करने वाली अधिकांस नर्सों ने कोरोना महामारी के दौरान ऋण लिया था और ये ऋण उन्होंने अपने वेतन प्रमाण पत्रों के आधार पर प्राप्त किए थे। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1,400 से ज्यादा लोगों ने करीब 700 करोड़ रुपये के ऋण का भुगतान नहीं किया।
'बैंक का भरोसा हासिल करने के लिए पहले लिए छोटे ऋण'
वकील ने आगे बताया कि इन लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी की। ये लोग पहले छोटे ऋण लेते थे और उन्हें बिना किसी परेशानी के चुका देते थे, जिससे वे बैंक अधिकारियों का भरोसा हासिल कर लेते थे। बाद में वे बड़े ऋण लेते, जिनकी राशि 75 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक होती और इनकी किस्तें भी दो-तीन बार समय पर चुकाते। इसके बाद वे छुट्टी के बहाने कुवैत से अपने अपने गृह राज्य वापस जाते और फिर कभी वापस नहीं लौटते या बाकी किस्तों का भुगतान नहीं करते।
'गृह मंत्रालय के सामने उठाया मुद्दा'
उन्होंने बताया कि कुवैत के बैंक ने इस मामले को भारत के गृह मंत्रालय के सामने उठाया, जो इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। वकील ने कहा, बैंक के पास इन लोगों के पासपोर्ट की जानकारी और घर के पते थे, इसलिए उन्हें ढूंढना और शिकायत दर्ज करना मुश्किल नहीं है।
'कई अन्य देश भी दर्ज करा सकते हैं इसी तरह की शिकायतें'
वकील ने यह भी कहा कि केवल कुवैत ही नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया के अन्य कई संस्थानी भी इसी तरह की धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं और वे भी इसी तरह शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कर्ज न चुकाने वाले लोगों के उस दावे को भी खारिज किया कि उन्होंने कोरोना महामारी के कारण नौकरी खोने के बाद ऋण की किस्तें चुकाने में असमर्थता जताई थी। वकील ने कहा कि यह एक झूठा बहाना है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच जारी है और कुछ कर्ज न चुकाने वाले लोगों ने राशि वापस करने की इच्छा जताई है।