कुरुक्षेत्रः सब पर भारी भज्जी पा जी का छक्का
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महाभारत में वनवासी पांडवों से यक्ष ने पांच प्रश्न पूछे थे, जिनका जवाब सिर्फ युद्धिष्ठिर ही दे सके थे। लेकिन भारतीय राजनीति के कुरुक्षेत्र में सत्ता से बाहर हो चुकी कांग्रेस से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ एक प्रश्न पूछा कि क्या कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है और 143 साल की पुरानी पार्टी कांग्रेस इसका जवाब खोजने में जुट गई। उधर शशि थरूर के हिंदू-पाकिस्तान वाले बयान को भाजपा ने उसी तरह लपका जैसे कभी एकनाथ सोलकर स्लिप में कैच लपक लेते थे।
टीवी चैनलों में राजनीतिक विश्लेषक, वरिष्ठ पत्रकार और तेज-तर्रार एंकर के साथ पार्टी प्रवक्ताओं, मुस्लिम विद्वानों, संघ विचारकों की गरमा-गरमी बढ़ गई और लगा कि प्रधानमंत्री का कांग्रेस से यक्ष प्रश्न सियासी विमर्श का एजेंडा तय कर देगा। लेकिन क्रिकेट के मैदान के महारथी हरभजन सिंह ने फीफा विश्वकप फुटबाल के फाइनल में 40 लाख की आबादी वाले क्रोएशिया के खेल का जिक्र करते हुए बेहद मासूम और भावुक टिप्पणी सोशल साइट ट्विटर पर करके देश के जन मानस को झकझोर दिया।
भज्जी पा जी ने तंज कसा कि क्रोएशिया फीफा विश्व कप फाइनल खेल रहा है और हम हिंदू-मुस्लिम खेल रहे हैं। भज्जी पा जी के इस गंभीर कटाक्ष ने सियासी दलों के साथ साथ मीडिया और सोशल मीडिया के रणबांकुरों को भी आईना दिखाया। कहा जा सकता है कि सब भारी भज्जी पा जी का छक्का।
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उधर पड़ोसी पाकिस्तान की चुनावी जंग में एक नया मोड़ तब आया जब भ्रष्टाचार की सजा पाए पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम नवाज़ की गिरफ्तारी हो गई। अचानक मैदान छोड़ चुकी नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग लड़ाई में वापस लौट आई। इसकी कुछ आंच इधर भी हिंदुस्तान में भी महसूस की गई और भारतीय एजेंसियों में भी पनामा घोटाले को लेकर हरकत शुरू हो गई। लेकिन भारतीय राजनीतिक प्रतिष्ठान इसमें अपने लिए कोई संदेश देखने की बजाय इसके दक्षिण एशिया में कूटनीतिक असर की बहस में ही उलझा हुआ है।
इसी गरमा-गरमी के बीच शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र और पहले ही दिन तेलुगु देशम पार्टी ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा में दिया जिसका खड़े होकर पूरे विपक्ष ने समर्थन किया और लोकसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव पर बहस और मतदान के लिए शुक्रवार का दिन भी तय कर दिया। यानी ये पूरा सप्ताह सियासी घटनाओं का एसा कुरुक्षेत्र बना कि सियासी योद्धाओं को तलवार भांजने का पूरा मौका और मीडिया का खबरों का खजाना मिल गया।
कांग्रेस पर मुस्लिम (कट्टरपंथी) तुष्टीकरण का पुराना आरोप है। संघ परिवार और भाजपा ही नहीं प्रगतिशील बिरादरी और उदारवादी मुसलमान भी इसके लिए कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। खासकर जब राजीव गांधी सरकार ने शाहबानो प्रकरण में कट्टरपंथी मुसलमानों के दबाव में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेअसर करने के लिए संसद में विधेयक पारित कराया। अपनी पार्टी पर लगे इस आरोप को धोने और मुसलमानों से संवाद बनाने के लिए राहुल गांधी ने मौलानाओं, उलेमाओं और इमामों की जगह तरक्की पसंद मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ मुलाकात की।
लेकिन पुरानी कहावत है कि हवन करने में हाथ जले और राहुल की इस मुलाकात का तफसरा छापते हुए एक उर्दू अखबार ने लिख दिया कि राहुल ने बैठक में कहा कि कांग्रेस तो मुसलमानों की पार्टी है। बस फिर क्या था, मुद्दे की तलाश में जुटे प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में सीधा सवाल दाग दिया कि क्या कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है और अगर एसा है तो क्या सिर्फ मुस्लिम पुरुषों की ही पार्टी है और मुस्लिम महिलाओं के दुख दर्द से उसे कुछ भी लेना देना नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह सवाल दाग कर साफ कर दिया कि भाजपा इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों और अगले साल अप्रैल में लोकसभा चुनावों के लिए हिंदुत्व को जमकर गरम करेगी। मोदी के सवाल को भाजपा ने अपने इसी एजेंडे के तहत तेज धार दी और पार्टी ने कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी कहते हुए हमले शुरू कर दिए। रही सही कसर टीवी चैनलों की बहसों ने पूरी कर दी और कांग्रेस सफाई देने में जुटी ही थी कि जलती आग में शशि थरूर के हिंदू पाकिस्तान वाले बयान की आहुति भाजपा ने डाली और लडखड़ाई कांग्रेस को इस बयान से खुद को अलग करना पड़ा।
थरूर ने बात तो अकादमिक रूप से कही थी जिसका आशय था कि अगर भाजपा 2019 में फिर जीत गई तो भारत में हिंदू कट्टरपंथ उसी तरह हावी हो जाएगा जैसे पाकिस्तान में मुस्लिम कट्टरपंथ हावी है। लेकिन बेहद छिछले स्तर के सामाजिक विमर्श के मौजूदा दौर में विषय की गंभीरता कौआ कान ले गया के शोर में हमेशा की तरह दब गई और रह गया सिर्फ हिंदू मुसलमान और पाकिस्तान का शोर।
भाजपा के मुस्लिम पार्टी के सवाल का जवाब आखिरकार राहुल गांधी ने ट्विट करके दिया कि मैं अंतिम आदमी के साथ हूं और बिना किसी की जाति धर्म रंग की परवाह के शोषित वंचित के साथ खड़ा हूं। आखिर में उन्होंने यह भी कह दिया कि मैं कांग्रेस हूं। साथ ही भाजपा के हिंदू मुस्लिम के शोर को ठंडा करने के लिए राहुल ने प्रधानंमत्री मोदी को पत्र लिखकर राज्यसभा से पारित महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा से पारित कराने का आग्रह करते हुए कांग्रेस के पूरे समर्थन का भरोसा दिया।
राहुल इसके जरिए विमर्श बदलना चाहते थे लेकिन जबाव में कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि सरकार इस शर्त पर महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में ला सकती है अगर कांग्रेस तीन तलाक और हलाला के मुद्दे पर सरकार के प्रस्ताव का संसद में समर्थन करने का भरोसा दे। यानी सरकार ने फिर विमर्श को मुस्लिम मुद्दे की ओर मोड़ दिया।
इसी बीच जिस दिन भीड़ हिंसा को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने गंभीर चिंता प्रकट करते हुए सरकार से इस मुद्दे पर कानून बनाने और राज्यों में कड़ाई से इस पर रोक लगाने का आदेश दिया, उसी दिन झारखंड के पाकुड़ा में सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर उन्मादी भीड़ ने हमला करके उन्हें बुरी तरह जख्मी कर दिया।
अग्निवेश का आरोप है कि हमलावर भाजपा के युवा संगठन भारतीय युवा जनता मोर्चा के कार्यकर्ता थे। झारखंड की भाजपा सरकार ने पूरी घटना की जांच के आदेश दे दिए और भाजपा ने अग्निवेश के आरोप का खंडन किया। लेकिन झारखंड भाजपा सरकार के एक मंत्री ओपी सिंह तो यहां तक कह गये कि अग्निवेश ने यह हमला खुद ही अपने ऊपर करवाया है।
यानी सरकार की जांच शुरू भी नहीं हुई मंत्री महोदय ने अपनी जांच रिपोर्ट पहले दे दी। अग्निवेश को हिंदू विरोधी और ईसाई मिशनरी का एजेंट बताते हुए उन पर हमले और हमलावरों के पक्ष में सोशल मीडिया पर जिस तरह का अभियान चल रहा है उससे भी सामाजिक विमर्श में हिंदुत्व को धार मिल रही है।
अब संसद में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा, किसानों का संकट, बेरोजगारी, महंगाई, विदेश नीति, महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों के साथ साथ भीड हिंसा का मुद्दा भी उठेगा। विपक्ष इसे लेकर सरकार को घेरेगा और सरकार न सिर्फ अपना बचाव करेगी बल्कि विपक्ष को कठघरे में खड़ा करते हुए इस मौके का इस्तेमाल अपने हिंदुत्व की धार को और तेज करने के लिए करेगी और सामाजिक राजनीतिक विमर्श फिर हिंदू मुसलमान के इर्द गिर्द ही घूमेगा। तब आम जनता के लिये खेल के मैदान से उठी अराजनीतिक हरभजन सिंह की बात कि हम आखिर हिंदू मुस्लिम कब तक खेलेंगे ही सबसे ज्यादा प्रासंगिक होगी।