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कुरुक्षेत्र : कांग्रेस में राजनीतिक प्रबंधक बनकर उभरी हैं प्रियंका, असंतोष को थामने की पूरी कवायद की असली सूत्रधार

Vinod Agnihotri विनोद अग्निहोत्री
Updated Sun, 20 Dec 2020 08:36 PM IST
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प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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कांग्रेस में बगावती तेवर अपनाने वाले नाराज 23 नेताओं और कांग्रेस नेतृत्व यानी सोनिया गांधी परिवार के बीच पार्टी के भविष्य को लेकर बनी सहमति से राहुल गांधी के फिर कांग्रेस अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ होता तो दिखाई दे रहा है। लेकिन आगे अभी बड़ी कठिन डगर है पनघट की। फिलहाल तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने इस उद्देश्य में सफल हो गईं कि एक बार फिर राहुल ही उनके उत्तराधिकारी बनें और बेटी प्रियंका अपने बड़े भाई की सहायता करें। लेकिन जिस तरह बैठक में राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने के अजय माकन के प्रस्ताव पर गुट-23 के नेताओं की प्रतिक्रिया ठंडी रही उससे संकेत है कि भले ही सोनिया गांधी के सामने किसी असंतुष्ट नेता ने मुंह नहीं खोला हो, लेकिन जब सांगठनिक चुनाव प्रक्रिया होगी, तब सबको मनाने के लिए एक बार फिर बड़ी सियासी कवायद करनी होगी।
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 कांग्रेस नेतृत्व की तब असली सियासी अग्निपरीक्षा होगी कि अध्यक्ष पद के चुनाव में राहुल गांधी के मुकाबले कोई दूसरा नेता खड़ा होकर सोनिया गांधी बनाम जीतेंद्र प्रसाद वाला इतिहास न दोहरा पाए। इस पूरे घटनाक्रम में घटी पर्दे के पीछे की सियासत की जानकारी देते हुए एक प्रमुख कांग्रेसी नेता ने बताया कि प्रियंका ने जिस राजनीतिक चतुराई से खुद को आगे करके पार्टी के नाराज दिग्गज नेताओं के असंतोष को थामा है, उससे साबित हो गया है कि आने वाले दिनों में अध्यक्ष भले ही राहुल गांधी बनें, लेकिन कांग्रेस के राजनीतिक प्रबंधन में प्रियंका गांधी अब बेहद अहम भूमिका निभाएंगी। एक तरह से वह सोनिया गांधी के बेहद विश्वासपात्र सिपहसालार रहे मरहूम अहमद पटेल की राजनीतिक भूमिका अब प्रियंका ही संभालेंगी। जबकि और पार्टी के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जिम्मे होगी।


शनिवार को सोनिया गांधी के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक से पहले इस बात को लेकर बेहद उहापोह थी कि क्या नाराज गुट-23 के नेता राहुल गांधी को फिर अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमत होंगे या नहीं। इसके लिए कांग्रेस नेतृत्व ने पूरी सियासी नाकेबंदी कर ली थी। इसीलिए गुट 23 के नेताओं को दबाव में लेने की रणनीति के तहत बैठक में सोनिया के वफादार ए के एंटोनी, अंबिका सोनी, अशोक गहलोत, कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ साथ अजय माकन, भक्तचरण दास जैसे टीम राहुल के नेताओं को भी बुलाया गया था। दस जनपथ के करीबी सूत्रों के मुताबिक, सुबह सबसे पहले कमलनाथ और अशोक गहलोत दस जनपथ पहुंचे और वहां उन्होंने प्रियंका गांधी के साथ गहरी मंत्रणा की। 
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अजय माकन ने राहुल को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया

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