Karnataka: कर्नाटक के वन मंत्री पर केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी का हमला, बोले- एचएमटी से क्यों वापस चाहिए जमीन?
कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने नौ अगस्त को वन विभाग को निर्देश दिए थे कि बंगलूरू के पीन्या-जलाहल्ली में 599 एकड़ भूमि वन भूमि थी। इस भूमि पर हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) लिमिटेड स्थापित है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत इस भूमि में से खाली पड़ी 281 एकड़ भूमि को एचएमटी से वापस ले लिया जाए।
विस्तार
केंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी ने हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) लिमिटेड से 281 एकड़ जमीन वापस लेने के लिए निर्देश जारी करने पर कर्नाटक वन मंत्री ईश्वर खंड्रे पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस उपक्रम ने 90 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ लंबे समय तक घड़ी बाजार पर राज किया, उससे वह वन भूमि के नाम पर जमीन वापस क्यों लेना चाहते हैं? जबकि वह बंद होने के कगार पर है। उन्होंने कहा कि वे अपनी संकीर्ण विचारधारा को त्यागें और बंगलूरू के गौरव को दोबारा जीवन देने के लिए उनके साथ मिलकर काम करें।
दरअसल कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने नौ अगस्त को वन विभाग को निर्देश दिए थे कि बंगलूरू के पीन्या-जलाहल्ली में सर्वेक्षण संख्या 1 में 599 एकड़ भूमि वन भूमि थी। इस भूमि पर हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) लिमिटेड स्थापित है। उन्होंने कहा कि यह भूमि एचएमटी को उपहार में दी गई थी, ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत इस भूमि में से खाली पड़ी 281 एकड़ भूमि को एचएमटी से वापस ले लिया जाए। खंड्रे के निर्देश कुमारस्वामी के एचएमटी लिमिटेड का दौरा करने और अधिकारियों के साथ बैठक करने के कुछ दिन बाद जारी हुए।
इसे लेकर केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने वन मंत्री से सवाल किया कि क्या सार्वजनिक उपक्रम की दयनीय स्थिति उनकी आंखों में आसूं नहीं लाती? क्या आपको कर्नाटक पर गर्व नहीं है? ऐसे संयंत्रों को बंद करने के लिए ही क्या वे सत्ता में आए हैं? इस संकीर्ण विचारधारा को छोड़ें और कर्नाटक के विकास के लिए काम करें।
उन्होंने कहा कि एचएमटी को 1958-59 और 1968-70 में भूमि अधिग्रहण के बाद स्थापित किया गया था। इस संयंत्र का पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री औ इंदिरा गांधी ने भी दौरा किया था। 1970 में एचएमटी ने 270 करोड़ रुपये लाभ भी कमाया और हैदराबाद, उत्तराखंड, अजमेर और केरल में अपनी इकाइयां स्थापित कीं। इसके बाद टाटा अपने टाइटन ब्रांड के साथ आए और एचएमटी से 350 इंजीनियरों को अपनी इकाई में ले गए। इससे केंद्रीय पीएसयू का पतन हो गया।
कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य के वन मंत्री इतने वर्षों तक चुप क्यों थे? उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसे निर्देश देकर भूमि वापस ली जा सकती है? उन्होंने कहा कि देश में 40 सीपीएसयू हैं। इनमें से 27 बंद हो चुके हैं और अन्य बंद होने के कगार पर हैं। इन सार्वजनिक उपक्रमों को नया जीवन देने के लिए वह कड़ा संघर्ष कर रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वह इस सार्वजनिक उपक्रमों को पुर्नजीवित करने के लिए मना लेंगे। जब मैं इतना संघर्ष कर रहा हूं तो वह जमीन वापस लेने के निर्देश देकर क्या हासिल करना चाहते हैं? आपने जल्दबाजी में खाली जमीन का अधिग्रहण करने का आदेश दिया है। आप यह ज़मीन किसे देना चाहते हैं?
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि एचएमटी ने भूमि के लिए भुगतान किया है। 1960 में मुख्य वन संरक्षक ने भी इस पर निर्देश जारी किए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी ने कुछ भी मुफ्त में नहीं लिया है। हर चीज का भुगतान किया गया। उन्होंने मैसूर के महाराजा द्वारा एचएमटी को दान में दी गई भूमि को लेकर जारी की गई अधिसूचना भी दिखाई।
उन्होंने कहा कि अगर यह वन भूमि है तो एचएमटी लिमिटेड से संपत्ति कर कैसे एकत्र किया जाता है? उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ नाराजगी के कारण राज्य को बर्बाद मत करो। मैं विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील प्लांट को बेहतर बनाने का भी प्रयास कर रहा हूं। हमारा सहयोग करें। यह लूट अब बहुत हो गई।
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