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गांवों में खुलेंगे कृषि क्लिनिक, नीति आयोग ने राज्य सरकारों से शुरू की बातचीत

Tue, 04 Sep 2018 02:23 AM IST
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली Updated Tue, 04 Sep 2018 02:23 AM IST
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krishi clinics will be opened in villages
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किसानों की सहायता के लिए केंद्र सरकार कृषि क्लिनिक खोलने की तैयारी में है। इसके जरिये खेतिहर जमीनों के बारे में किसानों को सभी परामर्श सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की इस सिफारिश पर कृषि मंत्रालय के अधिकारी सहमत हैं और इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है।

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आईसीएआर के मुताबिक, कृषि क्लिनिक स्थापित करने के लिए प्रौद्योगिकी एजेंट किसानों को जरूरी परामर्श सेवाएं मुहैया करा सकते हैं। इसमें कृषि को बेहतर करने वाली गुणवत्तापूर्ण और नई तकनीक के प्रयोग की जानकारी शामिल होगी। परिषद का कहना है कि इससे कई फायदे होंगे। युवाओं को रोजगार मिलेगा और किसानों को सही जानकारी हासिल होगी। 
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निजी क्षेत्र की संस्थाओं जैसे कॉरपोरेट संगठनों, समुदाय आधारित संगठनों, किसान संघों, कृषक सहकारिताओं और स्वयं सहायता समूहों सहित अन्य को इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है। किसानों की तमाम समस्याओं का इन क्लिनिकों के माध्यम से हल निकाला जा सकता है, साथ ही किसानों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को भी इसके माध्यम से एकीकृत किया जा सकता है। 
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पीपीपी मॉडल पर होगी व्यवस्था

परिषद का कहना है कि किराये पर उपकरण मुहैया कराने में आज देशभर में निजी क्षेत्र की कई कंपनियां शामिल हो चुकी हैं। उसी तरह, कृषि क्लिनिक में भी विभिन्न क्षेत्रों को जोड़कर जानकारी नहीं होने की वजह से बड़े पैमाने पर हो रहे नुकसान से किसानों को निजात दिलाई जा सकती है। आईसीएआर के एक अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय को क्लिनिक से संबंधित सिफारिश भेजी गई है। माना जा रहा है कि नीति आयोग ने इस बारे में कुछ राज्य सरकारों से विचार-विमर्श भी किया है। 

पहले गांवों को मिलेगी सुविधा

शुरुआती दौर में आबादी के हिसाब से ग्रामीण क्षेत्रों में क्लिनिक की स्थापना की जा सकती है। इससे विभिन्न सरकारी सेवाओं को जोड़कर किसानों को खेतिहर जमीन पर बेहतर फसल उगाने और बुवाई, कटाई, जुताई सहित अन्य कामों से जुड़ी सही तकनीक के बारे में पूरी जानकारी दी जा सकती है। 


परिषद के एक अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय इस सिफारिश पर रूपरेखा तैयार कर आगे बढ़ेगा। रूपरेखा तैयार होने के बाद सभी राज्य सरकारों को प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह पूरी व्यवस्था सार्वजनिक-निजी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित होगी। गौरतलब है कि सरकार 100 करोड़ से भी ज्यादा मृदा कार्ड देश में किसानों को दे चुकी है। मिट्टी की गुणवत्ता परखने जैसी तमाम योजनाओं में कृषि क्लिनिक अहम भूमिका निभा सकता है।

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