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Sudhakaran: रामायण से जुड़े विवादित बयान के बाद कांग्रेस नेता की सफाई, कहा- सिर्फ बचपन में सुनी एक कहानी बताई
Sun, 16 Oct 2022 09:21 PM IST
अभिषेक दीक्षित
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 16 Oct 2022 09:21 PM IST
सार
कांग्रेस नेता ने कहा कि मैंने सिर्फ एक कहानी सुनाई है, जो मैंने बचपन में सुनी थी। किसी को नीचा दिखाने या अपमान करने का इरादा नहीं था। मेरा मकसद लोगों को विभाजित करने का नहीं था।
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के सुधाकरन।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
कांग्रेस की केरल इकाई के अध्यक्ष के. सुधाकरन ने रामायाण से जुड़ा एक उदाहरण देने के मामले पर खेद जताया है। उन्होंने रविवार को अपना बयान वापसलि लिया। दरअसल, उनके बयान के बाद माकपा-भाजपा समेत आम लोग भी उन पर हमलावर हो गए थे और उनकी आलोचना कर रहे थे।
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रामायण को लेकर क्या कहा था?
सुधाकरन ने एक अखबार को साक्षात्कार दिया था। इस दौरान उन्होंने एक सवाल के जवाब में रामायण का जिक्र किया था। उनसे पूछा गया था कि वे वे मालाबार और मध्य केरल के राजनेताओं के बीच क्या अंतर है? इस पर उन्होंने एक कहानी सुनाई।
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सुधाकरन ने कहा था कि रावण को हराने के बाद पुष्पक विमान पर लंका से लौटते समय लक्ष्मण के मन में अपने भाई भगवान राम को समुद्र में धकेलने और उनकी पत्नी सीता के साथ जाने जैसे विचार चल रहे थे।
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कांग्रेस नेता ने कहा था कि हालांकि, जब तक वे मध्य केरल पहुंचे, तब तक लक्ष्मण का हृदय परिवर्तन हो चुका था। इस पर भगवान राम ने उनके कंधे पर थपथपाते हुए कहा था कि उन्होंने लक्ष्मण के मन को पढ़ लिया था और यह उनकी (लक्ष्मण) नहीं, बल्कि उस भूमि (दक्षिणी केरल) की गलती थी।
सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हुआ विरोध
साक्षात्कार के इस हिस्से के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही उनका विरोध शुरू हो गया। जनता और नेताओं ने उनकी जमकर आलोचना की। भाजपा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी उनकी कड़ी आलोचना की थी। माकपा के प्रदेश सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि हर राजनीतिक दल को लोगों को जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए, न कि उन्हें बांटने की।
अब दी सफाई
इसके बाद सुधाकरन ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह मालाबार क्षेत्र में प्रचलित एक कहानी थी। वह इसे बचपन से सुनकर बड़े हुए थे। कांग्रेस नेता ने कहा कि मैंने सिर्फ एक कहानी सुनाई है, जो मैंने बचपन में सुनी थी। किसी को नीचा दिखाने या अपमान करने का इरादा नहीं था। मेरा मकसद लोगों को विभाजित करने का नहीं था।