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राष्ट्रपति चुनाव के बाद सांसद पद छोड़ेंगे योगी, परिकर और मौर्य
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Wed, 22 Mar 2017 09:25 AM IST
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केशव प्रसाद मौर्य, योगी आदित्यनाथ व दिनेश शर्मा
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर से लोकसभा सांसद हैं। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर भी यूपी से ही राज्यसभा सांसद हैं। इन तीनों के विकल्प के रूप में नियुक्ति के 6 महीनों के बाद फिर से चुनाव होना है, जो इस साल सितंबर में किए जाएंगे। ऐसे में खबर है कि ये तीनों नेता जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों तक इस्तीफा नहीं देंगे।
हालांकि उत्तर प्रदेश के दूसरे उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने लखनऊ के महापौर के पद से इस्तीफा दे दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने भाजपा ने वरिष्ठ नेता के हवाले से कहा है कि "इन्हें राज्य के किसी एक सदन से चुना जाना जरूरी है। नियुक्ति के 6 महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया होती और इसके 14 दिन के अंदर लोकसभा और राज्यसभा से इस्तीफा देने का प्रवाधान है। इसलिए हम किसी जल्दी में नहीं हैं। हमारे सामने उप-चुनावों से ज्यादा गंभीर मसले हैं।"
सूत्रों के हवाले से खबर है कि भाजपा की नजरे अब राष्ट्रपति चुनावों पर हैं। गौरतलब है कि हाल ही में हुए 5 राज्यों के चुनाव में से 4 में भाजपा ने सरकार बनाई है। योगी और मौर्य के पास विधानसभा और विधान परिषद, दोनों ही का विकल्प है, क्योंकि यूपी राज्य में दोनों सदन मौजूद हैं। अखिलेश यादव और मायावती, दोनों ही विधान परिषद के सदस्य थे और बिना चुनाव लड़े ही मुख्यमंत्री बने थे।
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हालांकि उत्तर प्रदेश के दूसरे उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने लखनऊ के महापौर के पद से इस्तीफा दे दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने भाजपा ने वरिष्ठ नेता के हवाले से कहा है कि "इन्हें राज्य के किसी एक सदन से चुना जाना जरूरी है। नियुक्ति के 6 महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया होती और इसके 14 दिन के अंदर लोकसभा और राज्यसभा से इस्तीफा देने का प्रवाधान है। इसलिए हम किसी जल्दी में नहीं हैं। हमारे सामने उप-चुनावों से ज्यादा गंभीर मसले हैं।"
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सूत्रों के हवाले से खबर है कि भाजपा की नजरे अब राष्ट्रपति चुनावों पर हैं। गौरतलब है कि हाल ही में हुए 5 राज्यों के चुनाव में से 4 में भाजपा ने सरकार बनाई है। योगी और मौर्य के पास विधानसभा और विधान परिषद, दोनों ही का विकल्प है, क्योंकि यूपी राज्य में दोनों सदन मौजूद हैं। अखिलेश यादव और मायावती, दोनों ही विधान परिषद के सदस्य थे और बिना चुनाव लड़े ही मुख्यमंत्री बने थे।
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