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Pahalgam Attack: 'कलमा पढ़ो..हम समझे नहीं तो पिता को गोली मार दी', आतंकी हमले की पीड़िता ने बताया क्या हुआ था
Thu, 24 Apr 2025 03:46 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 24 Apr 2025 03:46 PM IST
सार
आरती ने बताया कि जब उनके फोन का सिग्नल मिला तो उन्होंने अपने ड्राइवर को फोन किया। उनकी मां भी कार में ही मौजूद थीं। आरती ने बताया कि स्थानीय लोगों ने उनकी बहुत मदद की। ड्राइवर मुसाफिर और एक अन्य व्यक्ति समीर ने मुश्किल घड़ी में काफी मदद की।
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हमले की पीड़िता ने बताई आपबीती
- फोटो : एएनआई
विस्तार
जम्मू कश्मीर के पहलगाम को इसकी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मिनी स्विट्जरलैंड कहा जाता है, लेकिन 22 अप्रैल की दोपहर यहां हुए आतंकी हमले ने पीड़ितों को ऐसा दर्द दिया है, जो जीवन भर उन्हें परेशान करेगा। केरल के कोच्चि की रहने वाली आरती आर मेनन भी उन पीड़ितों में शामिल हैं, जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में अपने प्रियजनों को खोया। आतंकी हमले के तीन दिन बाद आरती कोच्चि स्थित अपने घर पहुंचीं, लेकिन अभी तक वे उस सदमे से उबर नहीं पाई हैं, जिसने उनके पिता का साया छीन लिया।
कलमा न पढ़ पाने पर मारी गोली
आरती ने मीडिया से बात करते हुए घटना को याद करते हुए बताया कि 'हमले के वक्त पहले उन्हें लगा कि आतिशबाजी हो रही है, लेकिन जब और गोलियां चलीं तो मैं समझ गई कि यह आतंकी हमला है।' आरती हमले के वक्त अपने पिता एन रामचंद्रन (65 वर्षीय) और दो जुड़वां बेटों के साथ पहलगाम की बैसारण घाटी में मौजूद थीं। आरती ने बताया कि जैसे ही हमें अहसास हुआ कि यह आतंकी हमला है हम बचने के लिए भागने लगे। वहां चीख-पुकार हो रही थी और लोग इधर उधर भाग रहे थे। हम भी बचने की कोशिश कर रहे थे, तभी नजदीकी झाड़ियों से निकलकर एक आतंकी हमारे सामने आया और हमारे सामने आकर खड़ा हो गया।
ये भी पढ़ें- पहलगाम हमले की कहानी, मासूम की जुबानी: आतंकियों ने सिर पर कैमरा बांधा था, पापा को कब गोली लगी, देख नहीं पाया
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आरती ने बताया कि आतंकी ने उन्हें कलमा पढ़ने को कहा। हम समझ नहीं पाए तो आतंकी ने मेरे पिता को गोली मार दी। गोली लगते ही मेरे पिता गिर गए। इस पर मेरे बेटों ने चीखना शुरू कर दिया। मैं जानती थी मेरे पिता जा चुके हैं। मैंने अपने बेटों को लिया और जंगलों की तरफ भागना शुरू कर दिया। हमें नहीं पता था कि हम कहां जा रहे हैं। हम करीब एक घंटे जंगल में भटकते रहे।
स्थानीय लोगों ने काफी मदद की
आरती ने बताया कि जब उनके फोन का सिग्नल मिला तो उन्होंने अपने ड्राइवर को फोन किया। उनकी मांग भी कार में ही मौजूद थीं। आरती ने बताया कि स्थानीय लोगों ने उनकी बहुत मदद की। ड्राइवर मुसाफिर और एक अन्य व्यक्ति समीर ने मुश्किल घड़ी में काफी मदद की। बुधवार रात को एन रामचंद्रन का शव कोच्चि पहुंचा और गुरुवार सुबह उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। आरती ने बताया कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें काफी मदद मिली, जिससे वे पिता का शव कोच्चि ला सकीं। आरती ने बताया कि वह दुबई में काम करती हैं और हाल ही में छुट्टी बिताने के लिए भारत आईं थी।
ये भी पढ़ें- Pahalgam Attack: मैदान में लोगों को इकट्ठा किया... फिर आतंकियों ने बरसाईं गोलियां, हमले का नया वीडियो; देखें
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कलमा न पढ़ पाने पर मारी गोली
आरती ने मीडिया से बात करते हुए घटना को याद करते हुए बताया कि 'हमले के वक्त पहले उन्हें लगा कि आतिशबाजी हो रही है, लेकिन जब और गोलियां चलीं तो मैं समझ गई कि यह आतंकी हमला है।' आरती हमले के वक्त अपने पिता एन रामचंद्रन (65 वर्षीय) और दो जुड़वां बेटों के साथ पहलगाम की बैसारण घाटी में मौजूद थीं। आरती ने बताया कि जैसे ही हमें अहसास हुआ कि यह आतंकी हमला है हम बचने के लिए भागने लगे। वहां चीख-पुकार हो रही थी और लोग इधर उधर भाग रहे थे। हम भी बचने की कोशिश कर रहे थे, तभी नजदीकी झाड़ियों से निकलकर एक आतंकी हमारे सामने आया और हमारे सामने आकर खड़ा हो गया।
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आरती ने बताया कि आतंकी ने उन्हें कलमा पढ़ने को कहा। हम समझ नहीं पाए तो आतंकी ने मेरे पिता को गोली मार दी। गोली लगते ही मेरे पिता गिर गए। इस पर मेरे बेटों ने चीखना शुरू कर दिया। मैं जानती थी मेरे पिता जा चुके हैं। मैंने अपने बेटों को लिया और जंगलों की तरफ भागना शुरू कर दिया। हमें नहीं पता था कि हम कहां जा रहे हैं। हम करीब एक घंटे जंगल में भटकते रहे।
स्थानीय लोगों ने काफी मदद की
आरती ने बताया कि जब उनके फोन का सिग्नल मिला तो उन्होंने अपने ड्राइवर को फोन किया। उनकी मांग भी कार में ही मौजूद थीं। आरती ने बताया कि स्थानीय लोगों ने उनकी बहुत मदद की। ड्राइवर मुसाफिर और एक अन्य व्यक्ति समीर ने मुश्किल घड़ी में काफी मदद की। बुधवार रात को एन रामचंद्रन का शव कोच्चि पहुंचा और गुरुवार सुबह उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। आरती ने बताया कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें काफी मदद मिली, जिससे वे पिता का शव कोच्चि ला सकीं। आरती ने बताया कि वह दुबई में काम करती हैं और हाल ही में छुट्टी बिताने के लिए भारत आईं थी।
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