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RSS: बच्चों के सवालों का जवाब क्यों नहीं दे पाते माता-पिता? पाठ्य पुस्तकों को लेकर क्या बोले संघ प्रमुख भागवत

Sat, 25 Jul 2026 02:14 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 25 Jul 2026 02:14 PM IST
सार

RSS: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि पाठ्य पुस्तकों में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी जानकारी शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों के सवालों के जवाब देने के लिए खुद भी जानकारी रखनी चाहिए और बच्चों से बातचीत करते रहना चाहिए। बच्चों की परवरिश पर भागवत ने क्या कहा, पढ़िए-

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Knowledge about Hindu gods should be in textbooks from beginning; parents should know too: Bhagwat
मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने पाठ्य पुस्तकों में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी जानकारी शामिल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि माता-पिता को भी इतना ज्ञान होना चाहिए कि वे बच्चों के धर्म से जुड़े सवालों का जवाब दे सकें।
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भागवत ने शुक्रवार को 'युगानुकूल मातृत्व' कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बच्चे अक्सर हिंदू देवी-देवताओं को लेकर सवाल पूछते हैं। लेकिन कई बार माता-पिता उनके सवालों का जवाब नहीं दे पाते। उन्होंने कहा,बच्चे अक्सर वापस आकर ऐसे सवाल पूछते हैं, जिनके जवाब जरूरी होते हैं। जैसे यह भगवान बंदर के चेहरे वाले क्यों हैं? यह भगवान हाथी के चेहरे वाले क्यों हैं? लेकिन अक्सर पिता को इन सवालों के जवाब नहीं पता होते और मां को भी नहीं। 
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उन्होंने कहा, ये बातें शुरुआत से ही पाठ्य पुस्तकों में होनी चाहिए। ये जानकारी आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। हम बच्चों को जो भी सिखाते हैं, वही ज्ञान वे हासिल करते हैं। पहले 12 साल तक उनका पालन-पोषण हमारे हाथ में होता है। हमें उन्हें जानकारी देनी चाहिए और इसके लिए हमें खुद भी सीखना चाहिए।
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बच्चों की परवरिश को लेकर क्या कहा?
  • आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आज की पीढ़ी के बच्चों की परवरिश के लिए अलग तरीके की जरूरत है। इसमें आदेश देने के बजाय बातचीत पर ज्यादा जोर होना चाहिए।
  • उन्होंने कहा, जब हम बच्चे थे, तब मां कुछ कह देती थीं या पिता कह देते थे कि कोई बहस नहीं होगी, तो हम उसे मान लेते थे। हम सवाल नहीं करते थे, क्योंकि हमें पता था कि उन्होंने जीवन देखा है और वे चीजों को हमसे बेहतर समझते हैं।
  • भागवत ने कहा, आज ऐसा नहीं है। आप बच्चों के साथ सख्त रवैया नहीं अपना सकते। आपको उन्हें चीजें समझानी होंगी। वे ऐसे माहौल में बड़े हो रहे हैं, जहां हर तरफ भौतिक चीजों का प्रभाव और लगातार प्रचार मौजूद है। हमें उन्हें इस उलझन से बाहर निकलने का रास्ता दिखाना होगा। 
  • उन्होंने कहा, उन्हें बहुत स्नेह की जरूरत है। उन्हें हमारा समय चाहिए। उन्हें बातचीत चाहिए। आदेश नहीं, बल्कि चर्चा चाहिए। हुक्म नहीं, बल्कि सहमति चाहिए। 

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मोबाइल से कम हुआ परिवारों में संवाद
परिवारों के सदस्यों के बीच बातचीत में कमी पर चिंता जताते हुए भागवत ने कहा कि मोबाइल फोन ने घरों में होने वाली बातचीत की जगह ले ली है।

उन्होंने कहा, आज परिवारों में लोगों ने बातचीत करना बंद कर दिया है। परिवार के हर सदस्य के पास मोबाइल फोन है। पति और पत्नी काम से लौटते हैं, बच्चे स्कूल से आते हैं, सभी खाना खाते हैं और फिर हर व्यक्ति अपने-अपने मोबाइल में लग जाता है। वे घर तो आते हैं, लेकिन वास्तव में एक-दूसरे से मिलते नहीं हैं। यह अनुभव आप सभी ने किया होगा। 

उन्होंने कहा, हमें समझना होगा कि अगर हम समय निकालेंगे, तभी बातचीत होगी और जब बातचीत होगी, तो बच्चे अपनी बातें बताएंगे। इसी आधार पर हम उनकी जिज्ञासाओं को दूर कर पाएंगे। 

माता-पिता के व्यवहार पर क्या कहा?
भागवत ने कहा कि बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार को ध्यान से देखते हैं और जो उन्हें सिखाया जाता है और घर में जो देखते हैं, उसके बीच अंतर को तुरंत समझ लेते हैं।


उन्होंने कहा, हम उन्हें जो बताते हैं, वह हमारे अपने जीवन में भी दिखाई देना चाहिए। वरना वे हमारी बातों पर विश्वास नहीं करेंगे। बच्चे बहुत ध्यान से देखते हैं। अगर उन्हें हमारे कहने और करने में अंतर दिखता है, तो वे सोचते हैं कि पिता झूठ बोल रहे हैं। वे अपनी मां से भी कहते हैं कि आप ऐसा क्यों कह रही हैं, जब वह खुद ऐसा नहीं करते। बच्चों की समझ तेज होती है और उनकी भावनात्मक क्षमता भी मजबूत होती है। इसलिए हमें अपने व्यवहार में सुधार करना होगा। 

'स्नेह और संवाद से बनते हैं संस्कार'
भागवत ने कहा कि मूल्य स्नेह, बातचीत और अपने उदाहरण से बच्चों तक पहुंचते हैं। ये तीनों चीजें बहुत जरूरी हैं और दुनिया में हर जगह लागू होती हैं। उन्होंने कहा, अगर यह आधार मजबूत होगा, तो बच्चों के लिए तकनीक के जाल से बाहर निकलना आसान होगा। 

उन्होंने कहा, अगर वे कुछ समय के लिए इसमें फंस भी जाते हैं, तो वे वापस रास्ता खोज पाएंगे। लेकिन हमें उन्हें उसी तरह तैयार करना होगा और उनके साथ लगातार जुड़े रहना होगा। 
 
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