'अगर तनाव से मेरी मौत हुई तो...': अस्पताल में पुलिस से वांगचुक की बहस का वीडियो वायरल; अधिकारियों ने क्या कहा?
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और सुरक्षा कर्मियों के बीच बस का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वांगचुक ने खुद को परेशान किए जाने का आरोप लगाया, जबकि अधिकारियों ने पूरी घटना पर सफाई दी। पूरा मामला क्या है, जानिए-
विस्तार
यह वीडियो उस बड़े वीडियो का हिस्सा है, जिसे वांगचुक ने शुक्रवार रात अपने सोशल मीडिया खाते और यूट्यूब पर साझा किया। इसमें उन्होंने 26 दिन के अनशन के बाद भी अपनी ईमानदारी साबित करने की जरूरत पर सवाल उठाया।
वीडियो में क्या कहते नजर आ रहे वांगचुक?
वीडियो में वांगचुक सुरक्षा कर्मियों से बहस करते दिखाई दे रहे हैं। वह आरोप लगाते हैं कि अनशन के दौरान उन्हें परेशान किया जा रहा है। एक समय वह कहते हैं- उन्हें कहो मुझे गिरफ्तार करें, मुझे गिरफ्तार करें, गिरफ्तार करें। मेरे अनशन के 20वें दिन तीन घंटे तक मुझे परेशान क्यों किया जा रहा है? इसके बाद वीडियो में वांगचुक कहते सुनाई देते हैं- आप सभी मुझे परेशान कर रहे हैं। अगर तनाव के कारण मेरी मौत हो जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी आपकी होगी।
AFTER 26 DAYS OF HUNGER DO I NEED TO PROVE MY SINCERITY !!!
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 24, 2026
Do please watch and help spread the word. Find the full 22 minutes video on my YouTube Channel: Sonam Wangchuk pic.twitter.com/6CO3tjZsSD
वह आगे दरवाजा खोलने की मांग करते हुए कहते हैं- कृपया खोलिए, मैं जा रहा हूं। मुझे गिरफ्तार कर लीजिए। आप लोगों को जबरदस्ती क्यों रोक रहे हैं... यह यातना है। अगर आप चाहते हैं तो अब मुझे गिरफ्तार कर लीजिए। आप मुझे जहां रोक सकते हैं रोकिए, देश को पता चलने दीजिए।
अस्पताल के फर्श पर लेट गए वांगचुक
वीडियो में दिख रहा है कि बहस बढ़ने के बाद वांगचुक विरोध जताते हुए अस्पताल के फर्श पर लेट जाते हैं। समर्थक इस पूरी घटना की रिकॉर्डिंग करते रहते हैं। इस दौरान वह कहते सुनाई देते हैं- तस्वीरें खींचो, देखते हैं कौन आपका फोन छीनता है। इससे कुछ समय पहले ऐसा दिखाई देता है कि जब वांगचुक की टीम का एक सदस्य घटना की रिकॉर्डिंग कर रहा था, तब किसी ने उसके हाथ से फोन छीनने की कोशिश की थी।
बातचीत के दौरान वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो भी गुस्सा जाहिर करती दिखाई देती हैं। फर्श पर लेटे हुए वांगचुक बार-बार कहते हैं कि अदालत का आदेश सार्वजनिक है। वह कहते हैं- यह डिजिटल रूप से हर जगह है। पूरी दुनिया को पता है, सिर्फ आपको नहीं। पूरी दुनिया जानती है।इसके बाद वह दोहराते हैं- अदालत का आदेश हर जगह है, पूरी दुनिया जानती है, सिर्फ आप लोगों को नहीं।
अधिकारियों ने क्या कहा?
अधिकारियों ने पुष्टि की कि वायरल वीडियो 21 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल में रिकॉर्ड किया गया था। इसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट ने वांगचुक के परिवार को बताया था कि उन्हें मेदांता अस्पताल भेजा जा सकता है।
एक अधिकारी ने कहा, यह 21 जुलाई का वीडियो है, जिस दिन अदालत ने सोनम के परिवार को बताया था कि उन्हें मेदांता अस्पताल भेजा जा सकता है।
वांगचुक को रोकने की वजह बताते हुए अधिकारी ने कहा कि वह मेदांता अस्पताल जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें जाने की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि हम पहले अदालत के आदेश का इंतजार कर रहे थे। इसलिए उन्हें रोका जा रहा था।
ये भी पढ़ें: PM Modi Selfie Video: पीएम मोदी के इंस्टा वीडियो ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, युवाओं से नए संदेश में क्या कहा?
अस्पताल ने भी जारी किया बयान
इस बीच, सफदरजंग अस्पताल ने भी कहा कि वायरल वीडियो उस समय रिकॉर्ड किया गया था, जब अस्पताल प्रशासन को सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल भेजने की अनुमति देने वाला दिल्ली हाईकोर्ट का लिखित आदेश नहीं मिला था।
अस्पताल के अनुसार, वांगचुक मीडिया में आई खबरों के आधार पर अस्पताल छोड़ना चाहते थे, जबकि अदालत का औपचारिक लिखित आदेश प्रशासन तक नहीं पहुंचा था।
पीटीआई के अनुसार, अस्पताल ने अपने बयान में कहा, वीडियो कथित तौर पर उस समय रिकॉर्ड किया गया था, जब अस्पताल प्रशासन को हाईकोर्ट का लिखित आदेश नहीं मिला था। उस समय वांगचुक मीडिया में उपलब्ध जानकारी के आधार पर अस्पताल से जाना चाहते थे। अस्पताल ने कहा, यह ध्यान देने वाली बात है कि उसी दिन शाम 6 बजकर 40 मिनट पर लिखित आदेश मिलने के तुरंत बाद वांगचुक को मेदांता गुरुग्राम के डॉक्टरों की टीम को सौंप दिया गया था।
वांगचुक ने कैदी जैसा महसूस होने की बात कही
यह वीडियो वांगचुक की ओर से शुक्रवार देर रात यूट्यूब पर अपलोड किए गए वीडियो का हिस्सा था। इसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना अनिश्चितकालीन अनशन खत्म करने का फैसला क्यों लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अनशन तभी खत्म करने पर सहमति दी, जब केंद्र सरकार ने लिखित आश्वासन दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
वांगचुक ने आरोप लगाया कि 18 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद उनके साथ 'कैदी जैसा' व्यवहार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति नहीं थी, मिलने वालों से मिलने से रोका गया और मोबाइल फोन या लैपटॉप रखने की भी अनुमति नहीं दी गई।
उन्होंने कहा, यह उत्तर कोरिया में रहने जैसा था। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से मेदांता अस्पताल जाने की अनुमति मिलने के बाद भी उन्हें कई घंटों तक सफदरजंग अस्पताल से बाहर नहीं जाने दिया गया।
वीडियो में वांगचुक ने बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग न करने को लेकर हो रही आलोचना का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी तत्काल प्राथमिकता शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को कानूनी कार्रवाई से बचाना थी।
केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में अनशन खत्म करने के उनके फैसले पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए वांगचुक ने कहा कि वह उस स्थिति को नहीं जानते, जिसका सामना उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद करना पड़ा। उन्होंने कहा, अगर मुझे कोई समझौता करना होता, तो क्या मैं 26 दिन तक भूखा रहता? क्या मैं दिल्ली की गर्मी में अनशन करने के बजाय वातानुकूलित कमरे में बैठकर समझौता नहीं कर सकता था?